क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की जद में आयेगें बीएसए महरौनी

क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की जद में आयेगें बीएसए महरौनी

क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की जद में आयेगें बीएसए महरौनी
डीएम ने पदभार ग्रहण करते ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ शुरू कर दी कार्यवाही
भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी पर भ्रष्टाचार के आरोप हो चुके सिद्ध
पूर्व में कार्यवाही न होने के कारण बड़ा है मनोबल


ललितपुर।Ravi shankar sen

 

जिलाधिकारी के रूप में येागेश कुमार के आते ही किसानों भूमि संरक्षण विभाग चल रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही उम्मीद फिर जाग गयी है। एक वर्ष पूर्व किसानों की शिकायत पर जिला प्रशासन द्वारा जाँच करायी गयी थी, जाँच में भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी देवेन्द्र सिंह दोषी भी पाये गये थे। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने कार्यवाही न कर एक उच्चस्तरीय कमेटी भी गठित कर दी। उस जाँच में भूमि संरक्षण अधिकारी द्वारा किसानों रिश्वत लेने की बात सिद्ध हुई, किन्तु कार्यवाही न होने के कारण वहाँ तैनात अधिकारी का मनोबल काफी बढ़ गया है। इसलिए विभाग में भ्रष्टाचार थमने के बजाय चरम पर पहुँच गया है। जनपद में जिलाधिकारी ने कार्यभार ग्रहण करते ही भ्रष्टाचार में लिप्त एक लेखपाल को निलम्बित कर दिया, तो वहीं एसडीएम पाली के पेशगार के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही की है। इससे माना जा रहा है कि कार्यवाही जद में शीघ्र ही भूमि संरक्षण विभाग भी आ जायेगा।


सरकार द्वारा किसानों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने व बरसात में मछली पालन के लिए बहुउद्देशीय योजना खेत तालाब लागू की, जिसका उद्देश्य किसानों को खेती के पानी के अलावा उन्हें अजीविका बढ़ाने का भी प्रयास था। किन्तु जनपद के भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी द्वारा पूरी योजना को पलीता लगा दिया गया। यहाँ पर नालों को तालाब दिखाकर किसानों के खाते में धन डालकर बंन्दर बाँट कर लिया गया। ग्राम भौढ़ी में तो लाभार्थी के खेत में तालाब न खोदकर अन्य किसान के खेत में तालाब खोद दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा कराई गयी जाँच में यह स्पष्ट हो गया। परन्तु इसके बाद उन्होंने उपजिलाधिकारी महरौनी से रिकवरी के लिए आदेशित किया। किन्तु अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नही हुई है। इसके अलावा भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी के ऊपर एनएफएसए योजना के अन्तर्गत पशु वितरण मामले में रुपया लेने के आरोप लगाये गये।

जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नामित किया। जाँच में आधे से अधिक शिकायतकर्ताओं ने लिखित शपथपत्र देकर जाँच अधिकारी के सामने कबूल किया है कि उनसे पशु वितरण के तहत धन लिया गया है। चूँकि शिकायत कर्ताओं से ही धन लिया गया है। इससे पूरा प्रकरण एकदम साफ हो गया। यही नही कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी कबूल किया, कि पहले उनसे धन लिया गया, इसके बाद उन्हें वापिस कर दिया गया। पूरे मामले में जाँच अधिकारी ने पाया कि भूमि संरक्षण अधिकारी महरौनी देवेन्द्र प्रताप द्वारा किसानों से पशुओं की अनुदान राशि देने में अवैध तरीके से धन लिया गया है। जाँच अधिकारी जिलाधिकारी को जाँच रिपोर्ट सौंप दी गयी। माना जा रहा था कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दम भरने वाली भाजपा पार्टी की सरकार में दोषी भूमि संरक्षण अधिकारी के खिलाफ कढ़ी कार्यवाही होगी, किन्तु ऐसा नहीं किया गया।

जब तक ऐसे भ्रष्टाचारियों को सरकार किसानों की योजना सौंपेगी, तब तक किसानों को सरकारी कोई भी योजना का लाभ नहीं मिल पायेगा। तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा कार्यवाही न करने के कारण विभाग में तैनात अधिकारी व कर्मचारियों का मनोबल बढ़ गया है। किन्तु जनपद में जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने आते ही भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों के खिलाफ जिस प्रकार कार्यवाही की है। उससे तो ऐसा लग रहा है शीघ्र ही कार्यवाही गाज भूमि संरक्षण अधिकारी पर लटकी नजर आयेगी।

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