BHU के रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा, बनारस के 66 प्रतिशत लोगों में मिली ये समस्‍या*

BHU के रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा, बनारस के 66 प्रतिशत लोगों में मिली ये समस्‍या*

BHU के रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा, बनारस के 66 प्रतिशत लोगों में मिली ये समस्‍या


वाराणसी:

काशी हिन्‍दू विश्‍वविदयालय के एक रिसर्च में बड़ा तथ्‍य निकलकर सामने आया है।

वाराणसी के 35 से 44 वर्ष के लोगों पर किये गये अध्‍ययन में तकरीबन 66 प्रतिशत से ज्‍यादा बनारसियों में मुख और दांतों की बीमारियां मिली हैं।

सबसे अहम बात ये है कि इस मामले में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में मुंह और दांतों की समस्‍या ज्‍यादा मिली है।

इस टीम ने किया रिसर्च

भारत के विभिन्न भागों के साथ साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में भी दांतो की समस्या का अध्ययन बीएचयू के दन्त चिकित्सा संकाय के प्रोफेसर टीपी चतुर्वेदी, डॉ राजूल विवेक, डॉ अतुल भटनागर और डॉ नीतीश शुक्ला द्वारा किया गया है।

पाये गये ये विकार

इन बीमारियों में दांतों का सड़ना, दांतों का गिरना, मुख का संक्रमण, फटे होठ एवं तालू का होना एवं टेढ़े-मेढ़े दांत तथा जबड़े का होना पाया गया है।

इसकी वजह से चबानें में, मुस्कुराने में, बोलने में, काटने एवं दिमागी तौर पर भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हो सकता है एड्स भी

चिकित्‍सकों की मानें तो एड्स जैसी बीमारी की शुरूआत कभी-कभी मुख के संक्रमण से भी होती है।

मुख की बीमारी से हृदय, श्वास, रक्त, गुर्दा, एवं अन्य मुख्य अंग भी प्रभावित हो सकते है। इसके कारण दिमागी बुखार हो सकता है।

दांतों में कीड़े लगने एवं सड़न की समस्या (डेन्टल कैरीज/कैवीटीज) के प्रसार का अध्ययन भारत समेत दुनिया के विभिन्न भागों में किया जा रहे हैं।

35 से 44 वर्ष के लोगों पर किया गया अध्ययन

टीम की मानें तो इस रिसर्च में वाराणसी के 35 से 44 वर्ष के लोगों को शामिल किया गया है। इस अध्ययन में कुल 1490 लोगों का परीक्षण किया गया,

जिसमें 690 पुरुष एवं 800 महिलाएं शामिल रहीं। यह परीक्षण वाराणसी शहर के विभिन्न भागों में डेन्टल कैम्प लगाकर किया गया।

66.66 प्रतिशत लोगों में पायी गयी समस्या

इस अध्ययन में दांतो की सड़न की समस्या कुल 66.66 प्रतिशत लोगों पायी गयी, जिसमें महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा यह समस्या देखी गयी।

अध्ययन करने वाली टीम के अनुसार वाराणसी के अलावा दक्षिण भारत में यह समस्या महिलाओं और पुरुषों में 45-85 प्रतिशत, उत्तर भारत में 52-84 प्रतिशत, पूर्वी भारत में 50-97 प्रतिशत और पश्चिम भारत में 41-56 प्रतिशत लोगों में देखी जा चुकी है।

इसी तरह अमेरिका में यह समस्या 40-50 प्रतिशत, अफ्रिका में 30-50 प्रतिशत और यूरोपियन देश में 40-60 प्रतिशत पायी गयी है।

बीएचयू के दंत चिकित्‍सा संकाय के डॉक्‍टरों के अनुसार मुख से संबंधित बीमारियों से बचने के लिये हमें इन बातों का ध्‍यान रखना चाहिये।

1- तम्बाकू का सेवन न करें, क्योंकि इससे मुख, होठ, गला, खाने की नली, फेफड़ों का कैंसर होता है एवं हृदय और दमे का रोग भी हो सकता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
2- दिन में दो बार ब्रश करना एवं खाने के बाद पानी से कुल्ला करना अति आवश्यक है।
3- मसूड़ों की मालिश करना भी आवश्यक है, जो ब्रश करने के बाद किया जा सकता है।
4- स्वस्थ एवं सुदृढ़ दांत एवं मसूड़ों के लिए हरी सब्जी, दूध, दही इत्यादि, मौसमी फल, टमाटर एवं गाजर का सेवन अपने खान-पान में नियमित तौर पर करें।
5- चिपचिपे एवं अत्यधिक मीठे पदार्थ का सेवन कम करें एवं मीठे पेय पदार्थ कम लें। मिठाई का उपयोग खाने के साथ किया जा सकता है।
6- आमतौर पर 6 महीने में दांतों का परीक्षण किसी अच्‍छे दंत चिकित्सक से करा लेना चाहिए।

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