बच्चे सेहतमंद हैं या बीमार, अब एप से होगी निगरानी

    बच्चे सेहतमंद हैं या बीमार, अब एप से होगी निगरानी

  

 

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के एप के माध्यम से स्कूल-कॉलेज व आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के स्वास्थ्य की अब सटीक मॉनीटरिग होगी।

एप के माध्यम से स्वास्थ परीक्षण के नाम पर होने वाली खानापूर्ति बंद होगी। मोबाइल हेल्थ टीम मौके पर जाए बगैर रिपोर्ट नहीं लगा पाएगी। बच्चे नहीं मिले या स्कूल बंद था, ऐसे बहाने भी नहीं चलेंगे।

मोबाइल हेल्थ टीम को बच्चों की फोटो के साथ पूरी रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी। ये एप, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों के मोबाइल पर भी होगा।

 

आरबीएसके के अंतर्गत जनपद के 7 ब्लाकों में 14 मोबाइल हेल्थ टीम लगी हुई हैं। प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर और दो पैरा मेडिकल स्टाफ है। कुल 56 सदस्यीय टीम प्रत्येक ब्लाक में सोमवार से लेकर शुक्रवार तक एक्टिव रहती है। टीम के सदस्य स्कूल-कॉलेज में साल में एक बार और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की साल में दो बार स्क्रीनिग करते हैं। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बच्चों को निकट सीएचसी व पीएचसी, जिला स्तरीय अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में भर्ती भी कराते हैं। आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर गौरीश राज पाल ने बताया कि चिकित्सक को अपने मोबाइल पर आरबीएसके एप डाउन लोड करना होगा। दो दिन पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को आगमन की सूचना देनी होगी। विजिट के दौरान पहुंचने का समय, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बच्चों और अपनी टीम का ग्रुप फोटो उसका विवरण व निकलने का समय एप पर अपलोड करना होगा। खास बात ये है कि यह एप ऑफ लाइन भी काम करेगा। यानी नेट बंद होने का बहाना नहीं चलेगा। एप के माध्यम से डीएम, सीडीओ, सीएमओ, एसीएमओ, डीपीओ, सीडीपीओ, बीएसए, एबीएसए, डीईआईसी मैनेजर, स्वास्थ्य निदेशक व लखनऊ में बैठे अधिकारी टीम के कार्य की पड़ताल कर सकेंगे। पुराने फोटो के साथ फर्जी रिपोर्ट अपलोड होगी तो उसका तुरंत पता चल जाएगा। 23 अप्रैल को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

 

अब बेहतर तरीके से होगी निगरानी

 

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.संतराज ने बताया कि आरबीएसके एप के माध्यम से स्कूल-कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्रों में रजिस्टर्ड बच्चों के स्वास्थ्य की सही जानकारी समय-समय पर उपलब्ध रहेगी। टीम काम कर रही है या नहीं, इसकी मॉनीटरिग भी आसानी से होती रहेगी।

कुल मिलाकर इस एप से स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतर तरीके से निगरानी होगी। इस एप का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। जल्द ही इस एप के माध्यम से काम शुरू हो जाएगा।

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