बिहार बालिका आश्रयगृह में यौनाचार की घटनाओं की पुष्टि  और सीबीआई से जांच के आदेश पर विशेष-

बिहार बालिका आश्रयगृह में यौनाचार की घटनाओं की पुष्टि  और सीबीआई से जांच के आदेश पर विशेष-

बिहार बालिका आश्रयगृह में यौनाचार की घटनाओं की पुष्टि  और सीबीआई से जांच के आदेश पर विशेष-
 

सुप्रभातम-सम्पादकीय 
 
साथियों,


     कहावत है कि-" वही छिनार वही डोला के साथ" यानी जो डोली मेंं बैठी दुल्हन की रखवाली करने के लिए साथ चल रहे वहीं दुल्हन की इज्ज़त के लिये खतरा हैं। कुछ यहीं हालात बिहार सरकार की है और यहाँ पर अनाथालय में रहने वाली बालिकाओं को आबरू सुरक्षित नहीं है।अनाथालय में रहने वाली बालिकाओं के साथ किस तरह का सलूक किया जा रहा है

यह अब किसी से छिपा नहीं रह गया है। बिहार के चौदह बालिका आश्रयगृह में अनाथ बालिकाओं के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार एवं यौन शोषण की पुष्टि अब तक हो रही है जिसमें बिहार सरकार की एक मंत्री के पति भी शामिल हैं हालांकि मामला सुर्खियों में आने के मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अनाथालय में बालिकाओं के साथ हो रहे कुकृत्यों का पर्दाफाश होने के बाद बिहार पुलिस ने कहने के लिए प्राथमिकी तो दर्ज करा दी गई लेकिन पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी न करके हीलाहवाली कर रही है।

बिहार सरकार एवं पुलिस की लचर जांच के चलते मामला देश की सबसे बड़ी अदालत के समक्ष पेश हो चुका है।इस याचिका में सभी सत्तरह मामलों की जांच पुलिस की जगह सीबीआई से कराने की मांग की गई है जबकि सरकार सभी मामलों की जांच सीबीआई से नहीं कराना चाहती है।इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार सरकार के अरमानों को चकनाचूर करते हुए सरकार को करारा झटका देते हुए सभी मामलों की जांच सीबीआई से कराने का फैसला लिया गया है।

शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार द्वारा सभी मामलों की जांच सीबीआई से नहीं कराने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि सभी मामलों की जांच सीबीआई करेगी और जांच में लगे किसी अधिकारी का तबादला जांच के दौरान नहीं किया जायेगा। इतना ही नहीं शीर्ष अदालत ने सरकार के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि बिहार पुलिस अपना काम नहीं कर रही है जबकि सीबीआई सभी मामलों की जांच करने के लिये तैयार खड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले मंगलवार को मुजफ्फरपुर बालिका आश्रयगृह के मामले में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाई थी और बिहार सरकार के रवैये को अमानवीय एवं शर्मनाक बताते हुए सरकार की मानसिकता को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।जिस देश में बालिकाओं को देवी स्वरूपा माना जाता हो उस देश की बेबस बेसहारा बालिकाओं के साथ यौन दुराचार करना अपनी औकात को भूलने जैसा है। इन अनाथालयों में इन बेचारी बालिका के साथ खिलवाड़ आज से नहीं बल्कि लम्बे अरसे से चल रहा है

लेकिन कभी इसका पर्दाफाश नहीं हुआ।इस बार भी अगर बालिकाएं अनाथालय से तंग आकर नहीं भागती तो अभी भी इसका पर्दाफाश नहीं हो पाता क्योंकि इन बालिकाओं का यौन शोषण वह लोग कर रहे थे जो सरकार या ऊँचे पदों से जुड़े थे और जिनके कंधों पर इन अभागी बालिकाओं की सुरक्षा का भार था।बिहार के मुख्यमंत्री को अबतक एक करेक्टर वाला माना जा रहा था लेकिन बालिका अनाथालय में जो भूमिका उन्होंने निभाई उससे उनके करेक्टर पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

सरकार और पुलिस की टालमटोल वाली कार्यशैली आज उसके गले की हड्डी बन गयी जो अब न खाते बन रही है और न ही निगलते ही बन रही है।इन दुखियारी बालिकाओं का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि जो उनके रक्षक थे वहीं उनके भक्षक बन बैठे हैं। सुप्रीम कोर्ट का सभी मामलों की जांच सीबीआई से कराने का फैसला हमारी न्यायिक प्रणाली को मजबूती प्रदान करने वाला एक सराहनीय कदम है जिसकी जितनी तारीफ की जाय वह कम है।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद सरकार और उससे जुड़े लोगों का सत्ता में बने रहने का कोई औचित्य नहीं लगता है क्योंकि मामला भ्रष्टाचार से नहीं बल्कि यौनाचार से जुड़ा हुआ है।

 

           भोलानाथ मिश्र
 वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी

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