मेला हज़रत गुलज़ार शाह होगा या नही संशय बरकरार।

मेला हज़रत गुलज़ार शाह होगा या नही संशय बरकरार।

नरेश गुप्ता/ अयूब खान की रिपोर्ट

मेला हज़रत गुलज़ार शाह होगा या नही संशय बरकरार।
   

 

बिसवां नगर सीतापुर -

हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक महान सूफी संत शैखुल औलिया बाबा हज़रत गुलज़ार शाह रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स व मेला गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी विवादो में घिरा है वहीं कई आयोजक समितियां अपना अपना दावा पेश कर रही हैं। मेला प्रबंध को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं लंबित हैं कानून के जानकारों की मानें तो उनका मत है।

जब प्रकरण न्यायालय में लंबित है तो बिना न्यायालय आदेश के प्रशासन किसी भी पक्ष को मेला आयोजित करने की अनुमति देकर इस संवेदनशील मामले पर अपने को सम्मिलित करने से गुरेज करेगा राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक महान सूफी संत हजरत गुलजार शाह उर्फ टक्करी बाबा का वार्षिक उर्स व मेला कई दशकों से माह अगहन में आयोजित होता रहा है। जिसमें देश के कोने कोने से दुकानदार आते हैं।

इसके साथ ही मेला समिति की और से प्रदेशिक स्तर की खेलकूद प्रतियोगिताएं एवं साहित्यिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते है वर्तमान समय में पूर्व चेयर मैन अब्दुल अतीक व मौलाना अनवर द्वारा 15 दिसम्बर से मेले के आयोजन का एलान किया चुका है। जिससे मेले की तिथि ज्यों ज्यों निकट आ रही है। कई समितियां अपने अपने प्रोग्रामों सहित दावा पेश कर रहीं हैं। स्थानीय प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर स्वयं को दूर ही रखना चाह रहा है। मेला आयोजन को लेकर कई प्रबंध समितियां माननीय उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर कर चुकी हैं। ऐसे में यह मामला लम्बा खिंचता नजर आ रहा है। वहीं कानून के जानकारों का मानना है। कि जब प्रकरण उच्च न्यायालय में लंबित है

तो ऐसे हालात में माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को देखते हुए प्रशासन किसी भी समिति को  मेला करने की अनुमति प्रदान कर देगा ऐसा संभव नहीं लग रहा है।मगर बक्फ बोर्ड कमेटी द्वारा मेले का आयोजन करवाने को लेकर विपक्षी पार्टियों के मास्टर मंजूर नूरुद्दीन शब्बीर व मजार के मुजव्वर द्वारा 30 नवम्बर को कोतवाली व उपजिलाधिकारी बिसवां को शिकायती पत्र सौंपा जा चुका है।जिसमे उन्होंने आरोप लगाया है कि मेले में दुकानदारों से जबरन अवैध वसूली की जा रही है।व मेला ऑफिस में अपना ताला डाल दिया है।

अब  देखना यह दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठेता है। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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