भाजपा सरकार में भी माफिया हावी, सरकार की मंशा को लगा रहे पलीता 

भाजपा सरकार में भी माफिया हावी, सरकार की मंशा को लगा रहे पलीता 

फ़तेहपुर ख़बर  

- भाजपा से जुड़ी संस्था की जमीन का कर डाला सौदा

- निष्पक्ष विवेचना हुई, तो होंगे कई सफेदपोश बेनकाब 

फ़तेहपुर ,

उत्तर प्रदेश में जब तक समाजवादी पार्टी की सरकार रही तब तक भाजपा सहित अन्य दलों ने पानी पी पीकर खूब कोसा। कहा कि यह गुंडों की सरकार है, भूमाफियाओं की सरकार है, खनन माफियाओं की सरकार है।

मगर यूपी में सरकार बदलने के बाद, योगी जैसे सख्त मुख्यमंत्री होने के बावजूद सरकारी ऑफिसों में व्याप्त भ्रष्टाचार, जमीनों पर कब्जे, जमीनों की खरीद-फरोख्त में हो रही धांधली थमने का नाम नहीं ले रही। या फिर यह कहें कि आज भी पूर्व की तरह ही भूमाफिया, खनन माफिया, शराब माफिया सभी हावी हैं।

जिसका स्पष्ट उदाहरण हाल में ही हुए कई घटनाक्रम हैं जिनमें जबरिया भाजपा के नेताओं की संलिप्तता से कई जमीनों पर जबरन कब्जा कर लिया गया। वही जिले के तीन जनप्रतिनिधि आज भी जमीनों की खरीद-फरोख्त में सबसे आगे हैं

उनके नाम पर दर्जनो विवादित मामले औने पौने दामों पर उनके सहयोगी उठा लेते हैं और अधिकारियों पर दबाव बनाकर उनके नाम का इस्तेमाल कर करोड़ों में निपटा देते हैं। जब सरकार के ही जनप्रतिनिधि प्रॉपर्टी डीलर बन जाएंगे तो आप सभी समझ सकते हैं कि सही गलत सब एक किनारे धरा रह जाएगा।

     इसी प्रकार पटेल नगर चौराहे पर स्थित एक बेशकीमती जमीन का फर्जी इकरारनामा कर कुछ लोगों ने कृष्णा नगर कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति धर्मेंद्र को बिक्री कर दिया जबकि उक्त जमीन सरकारी है और लगभग दो से तीन दशक पूर्व भाजपा पार्टी से जुड़ी संस्था दीनदयाल शोध संस्थान फतेहपुर के नाम दे दी गई थी। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि इस जमीन पर भाजपा का कार्यालय बनना था मगर इस जमीन को हेराफेरी करके एक ऐसे व्यक्ति को बेचा गया जो जिले के ही एक जनप्रतिनिधि का जमीनी पार्टनर बताया जाता है।

बताते हैं की इस जमीन को हथियाने के लिए कई वर्षों से खेल शुरू हो गया था जिसके बाद उसको 6 दिसम्बर 2018 में अमलीजामा पहनाया गया और फर्जी कागजों के आधार पर इसका इकरारनामा कराया गया। यह मामला भाजपा के लगभग सभी जिम्मेदारों को पता होने के बावजूद इसमें ढील बरती गई।

नहीं तो यह एफआईआर लगभग 11 महीने पूर्व ही हो जानी चाहिए थी। मगर प्रदेश मुख्यालय से नए कार्यालय की जांच करने आए भाजपा के वरिष्ठ नेता भारत दीक्षित व राकेश त्रिवेदी ने इस मामले की भी पड़ताल की और कई विधायकों से इस बाबत जानकारी भी हासिल की। वहीं एक पूर्व मंत्री से घंटों तक इस मामले पर चर्चा हुई। इसके बाद जिले के अधिकारियों से बात करके इसमें तत्काल मुकदमा पंजीकृत करने के लिए कहा गया।

तब जाकर 5 दिसंबर 2019 को यह मुकदमा पंजीकृत हुआ। जिसमें नगरपालिका के बाबू राजीव पांडे को वादी बनाया गया है उन्होंने सात लोगों के खिलाफ कागजों में हेरफेर करके जमीन का खरीद-फरोख्त करने का मुकदमा कोतवाली में दर्ज कराया है।

जिसमें रामबाबू, फूलमती, संतलाल, श्यामा देवी, अनारकली, धर्मेंद्र कुमार व अग्रहरी ट्रेडर्स शामिल हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि भाजपा से जुड़ी संस्था की जमीन भी फर्जीवाड़ा करके सौदा करने की कोशिश की गई मगर 1 वर्ष बाद उसका मुकदमा पंजीकृत हो पाया।

जब सत्ता में काबिज पार्टी अपनी जमीन बचाने में वर्षों से जूझती नजर आ रही है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं सूत्र बताते हैं कि अगर इस मामले की निष्पक्ष विवेचना हो गई

तो कई सफेदपोश बेनकाब हो जाएंगे। और जनता जनार्दन के प्रति या पार्टी के प्रति समर्पित होने का उनका ढोंग सबके सामने जगजाहिर हो जाएगा ।

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