चार साल में कृष्णानन्द ने अकेले खोद डाला 6 फुट गहरा,8 बीघे का तालाब

चार साल में कृष्णानन्द ने अकेले खोद डाला 6 फुट गहरा,8 बीघे का तालाब

हमीरपुर/सुमेरपुर :
रिपोर्ट - सुनील विश्वकर्मा 

हमीरपुर के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के बड़ा पचखुरा गांव में स्थित एक मंदिर में कृष्णानन्द का बसेरा है जो बचपन से ही संत बनकर जीवन जी रहा है।कृष्णानन्द ने वो काम कर किया है जिसे सुनकर कर आप को बिहार के दशरथ मांझी की याद आ जाएगी। कृष्णानन्द ने दशरथ मांझी की तरह ही ऐसा काम किया है!

जैसा बूंद-बूंद को तरसते बुन्देलखण्ड में करने की कोई सोच भी नहीं सकता है। लगातार 4 साल से बदहाल बुन्देलखण्ड का पूरा इलाका बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है। नहरें, नदियां और तालाब सूख चुके हैं। ऐसे हालात में एक शख्स ने अकेले अपने दम पर परोपकार के लिए 8 बीघे का तालाब खोद कर हमीरपुर की बंजर जमीन को हरा-भरा करने के साथ ही जानवरों के लिए भी पानी की व्यवस्था कर डाली है।

उसकी जिद इतनी पक्की थी कि उसने जो सोचा वह कर दिखाया। 
अपने गांव की प्यास देख कर कृष्णानन्द ने खुद ही एक आठ बीघा का तालाब खोद कर समाज के लिए मिसाल पेश कर दी. करीब 4 साल से दिन-रात जी-तोड़ मेहनत और लगान से कृष्णानन्द ने 6 फुट गहरा तालाब महज इसलिए खोद डाला कि आने वाली बारिश में यह पानी से लबालब हो जाए!

और उसके गांव के लोगों और जानवरों को पानी के लिए दर-दर भटकना न पड़े. कृष्णानन्द ने अकेले जब इस तालाब की खुदाई शुरू की तो गांव वालों ने उसे पागल कहते हुए उसका मजाक उड़ाया, लेकिन कृष्णानन्द ने हार नहीं मानी और अपने अटूट इरादों से तालाब खोदने में जुटा रहा .... और आज वह गांव वालों के लिए एक नायक बन गया है।

कागजों में चल रही है खेत और तालाब योजना
 
सरकार इस समय बुन्देलखण्ड में खेत और तालाब योजना पर बल दे रही है, लेकिन यह योजना भी यहां कागजो में पूरी हो रही है।मनरेगा से भी तालाबों के लिए खुदाई हो रही है लेकिन तालाब की खुदाई में महज 6 फुट की गहराई के लिए मजदूरों को 200 से 250 रुपए का भुगतान किया जा है, लेकिन कृष्णानन्द ने अकेले दम ही 6 फुट गहरा तालाब खोद डाला है।

बारिश के पानी से भर चुका है तालाब

कृष्णानंद ने 6 फुट की गहराई से मिट्टी ऊपर लाकर पूरे तालाब की मेडबंदी भी कर दी है। जिस काम को सैकड़ों मजदूर करते उस काम को कृष्णानन्द ने अकेले कर दिखाया है. कृष्णानन्द की इस पहल ने बुन्देलखण्ड में बारिश के पानी के प्रबन्धन की एक नई पहल की शुरुआत की है। इस समय बारिश के पानी से यह तालाब भर गया है और अब जलीय जीवों के साथ स्थानीय लोगों को समुचित पानी मिल रहा है।

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