जे.एन.यू. की नियुक्तियों में हुआ घोटाला ;    यूजीसी एवं विज्ञापनों के नियमों में  उल्लंघन  से उम्मीदवार नाराज

जे.एन.यू. की नियुक्तियों में हुआ घोटाला ;    यूजीसी एवं विज्ञापनों के नियमों में  उल्लंघन  से उम्मीदवार नाराज

नरेश गुप्ता /डा. अनिल कुमार

जे.एन.यू. की नियुक्तियों में हुआ घोटाला ;  
 यूजीसी एवं विज्ञापनों के नियमों में  उल्लंघन  से उम्मीदवार नाराज

          (स्वतंत्र प्रभात विशेष)

डॉ.अनिल कुमार मीणा 
असिस्टेंट प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय

दिल्ली देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के घोटाले सामने आए हैं | जिसमें   सहायक प्रोफेसर के आवेदन करने वाले प्रत्याशियों का आरोप है कि साक्षात्कार के लिए नियुक्त समिति ने खुलेआम  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं विज्ञापनों में दिए गए नियमों का उल्लंघन किया है |जिन्होंने कभी जिस क्षेत्र में कभी विशेषज्ञता हासिल  ही नहीं की उनको उसी क्षेत्र में नियुक्ति दे देना उच्च शिक्षा  एवं शोधकर्ताओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है |

जे.एन.यू. के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल  स्टडीज में  लेटिन अमेरिकी एवं कनाडाई विभाग में  सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए विज्ञापन में इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले उम्मीदवारों को साक्षात्कार में बुलाने का नियम बनाया था | लेकिन हुआ इसके विपरीत | इन विभागों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले प्रत्याशियों का आरोप है कि उनके कई साथियों को साक्षात्कार में आमंत्रित ही नहीं किया गया |  जब सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति का परिणाम आया तो यह साफ हो गया कि जेएनयू में कई नियुक्तियों में घोटाले व्यापक स्तर पर हुए हैं | जिनमें योग्यता का कोई स्थान नहीं |  

नियुक्त होने वाले अंशुल जोशी ने CIPOD में किया है एवं स्नेहा भगत प्रसाद ने पीएचडी दक्षिण पूर्व एशिया में किया है और दोनों की क्रम से नियुक्ति अमेरिकी  कनाडाई विभाग में कर दी गई  | साक्षात्कार देने वाली डॉ. सुप्रिया भारद्वाज का कहना है कि साक्षात्कार में किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सत्तारूढ़ दल से जुड़े होने के कारण की नियुक्ति की गई है जो कि भारतीय उच्च शिक्षा के ऊपर काला धब्बा है | इस क्षेत्र में अध्ययन के लिए अध्ययन के लिए आने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है |  योग्य व्यक्तियों के आवेदनों को जानबूझकर खारिज किया जा रहा है | सरकार इस हद तक गिर चुकी है कि उनको साक्षात्कार तक बुलाना भी उचित नहीं समझती |

जे.एन.यू. में जिस तरह से साक्षात्कार की प्रक्रिया में जल्दबाजी दिख रही है उससे तो साफ साफ यह दिख रहा है कि  वाइस चांसलर ने पहले से ही नियुक्त करने वाले अभ्यर्थियों के नाम तय कर लिए हैं | साक्षात्कार तो एक मात्र दिखावा है | दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रभारी डॉ अनिल मीणा का कहना है कि सरकार चुन चुन कर सत्तारूढ़ संगठन के हितों की पूर्ति करने वाले  अयोग्य लोगों को जिम्मेदार पदों पर नियुक्त कर रही है जिससे देश की दशा और दिशा क्या होगी यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है | हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था अंधकार युग की तरफ बढ़ रही है | समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में देश को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा|

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