दिल्ली के धार्मिक स्थलों पर होता रहता है जुए के साथ मदिरापान, सूचना देने वाले पर ही पुलिस बना देती है दबाव

दिल्ली के धार्मिक स्थलों पर होता रहता है जुए के साथ मदिरापान, सूचना देने वाले पर ही पुलिस बना देती है दबाव

 

प्रशांत तिवारी

 

(दिल्ली)

राजधानी की सड़कों पर सांझ होते ही मंडराने लगता है डर और दहशत, गुंडे मवालियों और जुआरियों का  बन जाता है अड्डा. उन जुआरियों को नशे की हालत में यह तक नहीं पता होता कि किसी धार्मिक स्थल मंदिर और गुरुद्वारा के सामने दारू पीना जुआ खेलना सामाजिकता के दायरे में नहीं आता है l

इनका विरोध करने वालों को नशेड़ियों के द्वारा बदतमीजी करते हुए मारना-पीटना तो राजधानी के लिए आम बात हो गई है या यह कह सकते हैं सोती रहती है राजधानी दिल्ली की पुलिस. 

 

घर के पचास से सौ मीटर के दायरे में भी नहीं है महफूज राजधानी के लोग क्या बच्चे क्या बूढ़े कब किसकी शामत आई है नशेड़ियों के द्वारा कोई पता ठिकाना नहीं इलाके के लोग डर और दहशत में जिंदगी काटते हैं लेकिन विरोध नहीं कर सकते उन अपराधियों वा नशेड़ियों का यह कोई नया नहीं दिल्ली वासियों के लिए, वारदात होने के इंतजार में पड़ी रहती है दिल्ली पुलिस. 

 

अपराध होने के घंटे बाद तक सोती रहती है दिल्ली पुलिस

 

 अपराध होने के घंटों बाद भी इंतजार के आस में और 100 नंबर डायल करने में लगे रहते हैं दिल्लीवासी लेकिन पुलिस कान में रुई डालकर सोने में कोई कसर नहीं छोड़ती है दिल्ली पुलिस. इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि 10:00 बजे की वारदात के लिए लगभग 1:00 बजे पुलिस का पहुंचना कितनी सक्रियता है राजधानी पुलिस की कार्यशैली पर  गौर फ़रमाया जा सकता है.

 

पीड़ित से प्राप्त जानकारी के अनुसार ताजा मामला राजपुरा गुड़ मंडी दिल्ली क्षेत्र का है जहां स्थानीय निवासी रामनिवास सब्जी लेने लगभग 9:45 बजे के करीब अपने दरवाजे से मात्र 50 से सौ मीटर की दूरी पर गए हुए थे जहां आसपास में मंदिर और गुरुद्वारे का क्षेत्र भी सटा हुआ है l

अचानक वैगनार कार आकर लग जाती है जिसमें कुछ लोग मौज मस्ती के साथ शराब मांस का सेवन करते हुए गाड़ी के अंदर ही जुआ खेलने में लग गए और अपने शराब और मांस का टुकड़ा मंदिर और गुरुद्वारे के सामने ही फेंके जा रहे थे

बीच सड़क पर कार के खड़े होने की वजह से किसी भी तरह की गाड़ियों का आना जाना बंद हो चुका था तभी एक ऑटो वाले ने ऑटो निकालने के लिए रास्ता मांगा तो नशेड़ियों ने ऑटो ड्राइवर को गाली गलौज करते हुए रास्ता ना देने की बात की जिस का विरोध रामनिवास ने भी सब्जी लेना छोड़ कर किया अचानक नशेड़ियों ने दारू की बोतल और मांस के टुकड़ों को मंदिर के सामने फेंकते हुए रामनिवास के ऊपर टूट पड़े मदद की गुहार लगाता रहा रामनिवास

लेकिन स्थानीय लोग हिम्मत नहीं जुटा पाए और नशेड़ियों ने लात घूसों से रामनिवास को बुरी तरह से मारा पीटा, रामनिवास के 100 नंबर पर कॉल करने के बावजूद भी स्थानीय मॉडल टाउन थाना क्षेत्र दिल्ली रात 1:00 बजे तक भी नहीं पहुंच पाई थी.

रामनिवास ने बताया कि 12 से 15 कॉल करने के बाद भी सो नंबर की सहायता नहीं मिल पाई और तब तक नशेड़ियों ने रामनिवास को बुरी तरह से पीट डाला था करीब रात 1:00 बजे पीसीआर वैन का फोन करके आना और कहना कि नगेंद्र साहब इस केस को देख रहे हैं तुम थाने पहुंचो.

तो बड़ा ही अटपटा सा कार्रवाई दिल्ली पुलिस की तरफ से रही अंततः रामनिवास को घर से बाइक मंगा कर थाने पहुंचना पड़ा जहां खबर लिखे जाने तक रामनिवास थाने के अंदर तहरीर लिख रहे थे वही रिपोर्टरों के द्वारा दरोगा नरेंद्र से बात करने की कोशिश की गई

तो दरोगा जी का पीड़ित को डराते हुए यह कहना कि या तो तुम उनसे बात करवा लो या तो हमसे बात करो. क्या दिल्ली पुलिस से रिपोर्टरों का  किसी मामले में  बात करना और उसकी जानकारी लेना इतना नागवार गुजरता है दिल्ली पुलिस के लिए कि वह थाने में ही पीड़ित को धमकाने शुरु कर देती है वही नशेड़ीयो जुआरियों का कोई भी सुराग अभी तक नहीं मालूम चल सका है. 

 

दिल्ली में यह दुर्दशा तो बाकी राज्यों का क्या

 

लेकिन राजधानी जैसे इलाकों के लिए इतनी लापरवाही वह भी पुलिस प्रशासन के द्वारा कैसे हो सकता है या दिल्ली पुलिस केजरीवाल और LG से इतना घुल मिल गई है कि गवर्नर और मुख्यमंत्री का डर अंदर रह ही नहीं गया है जब दिल्ली जैसे इलाके का हाल ऐसा है l

तो बाकी राज्यों से क्या उम्मीद की जा सकती है अब देखना यह होगा कि राजधानी दिल्ली की पुलिस क्या इस तरह के वारदातों से प्रदेश के लोगों को सुरक्षित कर पाती है या नहीं. या यूं ही लोग डर और दहशत में जिंदगी जीने को मजबूर होते रहेंगे. 

Comments