सऊदी अरब में दो पंजाबियों को सिर कलम कर दी गई मौत की सजा

सऊदी अरब में दो पंजाबियों को सिर कलम कर दी गई मौत की सजा

नई दिल्ली -

भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो भारतीय नागरिकों के सऊदी अरब में हत्या के जुर्म में फांसी पर चढ़ाए जाने की पुष्टि की। पंजाब के होशियारपुर निवासी सतविंदर सिंह और लुधियाना के हरजीत सिंह पर अपने साथी आरिफ इमामुद्दीन की हत्या का आरोप था।

दोनों को 9 दिसंबर 2015 को हुई वारदात के सिलसिले में गिरफ्तार कर रियाद जेल में रखा गया था। 28 फरवरी, 2019 को इनको सजा हुई। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस घटना को 'बर्बर और अमानवीय' बताते हुए नाराजगी जाहिर की है। ये दोनों वर्क परमिट पर वहां काम कर रहे थे।

हत्या के दोष में होशियारपुर निवासी सतविंदर कुमार और लुधियाना निवासी हरजीत सिंह का सिर कलम कर दिया गया था। कैप्टन ने इस पर शोक जताते हुए कहा कि यह बहुत दुखद है कि सभ्य देशों में आज भी ऐसी अमानवीय घटनाएं होती हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना की विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है. घटना 28 फरवरी की है।


रियाद में भारतीय दूतावास को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। दोनों को फांसी पर चढ़ाने से पहले भारतीय दूतावास को सूचना नहीं दी गई। दोनों मृतकों के परिवार को शायद उनके शव नहीं दिए जाए क्योंकि यह सऊदीके नियमों के खिलाफ है। हरजीत और सतविंदर ने इमामुद्दीन नाम के भारतीय की हत्या पैसों के विवाद में कर दी थी। तीनों ने यह पैसा लूट के जरिए जमा किया था।

कुछ दिनों बाद दोनों को लड़ाई-झगड़ा करने और शराब पीने के अपराध में अरेस्ट किया गया। दोनों को वापस देश भेजने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के दौरान ही मर्डर में इनके शामिल होने के कुछ सबूत मिले। इसके बाद दोनों को रियाद जेल में ट्रायल के लिए भेज दिया गया। दोनों को फांसी की सजा दी जाने के बारे में उस वक्त पता चला जब हरजीत की पत्नी सीमा रानी ने एक याचिका दी थी।

याचिका पर कार्रवाई करते हुए विदेश मंत्रालय को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। सीमा रानी को भेजे गए पत्र के अनुसार, सतवीर और हरजीत को 2015 में 9 दिसंबर को अरेस्ट किया गया दोनों पर आरिफ इमामुद्दीन की हत्या का आरोप था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 'दोनों को ट्रायल के लिए रियाद की जेल में भेजा गया जहां दोनों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया। 31 मई 2017 को उनके केस की सुनवाई के दौरान एक भारतीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

हालांकि, केस की सुनवाई के ही दौरान दोनों पर हिराबा (हाईवे पर लूटपाट) का केस भी शुरू हो गया। इस अपराध में भी फांसी की सजा तय है। ' प्रकाश चंद, डायरेक्टर (काउंसलर) के हस्ताक्षर वाले पत्र में यह जानकारी दी गई कि दोनों से केस ट्रायल के दौरान कुछ भारतीय अधिकारियों ने मुलाकात की थी। हालांकि, 28 फरवरी को इस साल उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया, लेकिन इसकी सूचना दूतावास को नहीं दी गई। मंत्रालय की तरफ से मृतकों के अवशेष लौटाने के लिए कई पत्र लिखे गए, लेकिन यह सऊदीकानूनों के दायरे में नहीं होने के कारण संभव नहीं हो सका

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