प्रदेश के अधिकतर जिलों में लोग डेंगू बुखार की चपेट में, लगातार डेंगू बुखार से हो रही है मौते,

प्रदेश के अधिकतर जिलों में लोग डेंगू बुखार की चपेट में, लगातार डेंगू बुखार से हो रही है मौते,

लख़नऊ

रिपोर्टर-गौरव बाजपेयी

 

"ज़िम्मेदार नही कर रहे ड़ेंगू के लिए समुचित इंतजाम"
"प्रदेश में पैर पसारता ड़ेंगू बुखार,आकड़ो में कर रहे हेराफेरी"
 डेंगू से अकेले कानपुर में मरने वालों की संख्या सैंकड़ा पार,
 

माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने डेंगू से मरने वाले मरीजों के परिवारों को 25 लाख रूपये मुआवजा दिये जाने का निर्देश, साथ ही सभी जिलाधिकारियों को डेंगू से रोकथाम के लिए समस्त आवश्यक उपाय और इसकी मानीटरिंग करने का जो आदेश दिया है वह प्रदेश सरकार तत्काल सुनिश्चित कराये ताकि डेंगू बुखार से ग्रस्त लोगो को बचाया जा सके। 

 डेंगू पीड़ित गांव खेड़ा मऊ, सरैया दस्तरखान, बरनपुरवा और पिहानी गांव गये।  

सिर्फ पिहानी गांव में डेंगू से 17 लोगों की एक महीने के अंदर मौत हुई है और हर घर में दूसरा या तीसरा सदस्य डेंगू से पीड़ित है लेकिन प्रशासन इस पर आंख मूंदे हुए है और आंकड़ों का हेरा फेरी कर रहा है।

मृतकों को डेंगू से पीड़ित नहीं घोषित कर रहा है जबकि इन गांवों में हालत यह है कि डेंगू से हर दूसरे परिवार का एक सदस्य मर रहा है या बीमार है। पिहानी गांव में ममता और प्रियंका एक ही घर की दो लड़कियों की मौत हुई है मंजू कटियार सहित कुल 17 लोग पिहानी गांव में मरे हैं।

इसी गांव के ग्रामीण निजाम मरणासन्न पड़े हुए हैं वे इलाज के अभाव में जिन्दगी और मौत से जूझ रहे हैं इनके ही परिवार के 12 सदस्य डेंगू और बुखार से पीड़ित है। 

मकनपुर, बिल्हौर, देहात और सिंगरौली केा मिलाकर इन जगहों में 130 से 135 लोग डेंगू से मरे हैं लेकिन प्रशासन इसको छुपाने के लिए तमाम तरह से प्रयास कर रहा है। यहां तक कि प्रशासन द्वारा डेंगू से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार व कीट भी उपलब्ध नहीं करा रहा है। न ही इन गांवों में डेंगू निवारण के लिए मच्छरों को मारने के लिए दवा का छिड़काव किया गया है। कानपुर देहात और नगर मिलाकर लगभग एक हजार से अधिक लोग डेंगू से प्रभावित हैं।

पनकी कूड़ा निस्तारण व्यवस्था ध्वस्त होने की वजह से लगभग दो किलोमीटर तक आसपास के इलाकों में कूड़े का पहाड़ जमा हो गया है। यहां तक कि नगर निगम का आफिस और उसके लगे स्कूल के चारों तरफ कूड़े का ढेर लग गया है जो लगातार जल रहा है जिससे धुआं और बदबू ने पूरे शहर को आगोश में ले लिया है। 

कूड़ा रिसाइकलिंग की व्यवस्था लगभग 4 सालों से ठप हो जाने की वजह से आसपास के एक दर्जन गांवों में लोगों का रहना दूभर हो गया है। जिसमें चितईपुर, सिरसई, मक्खनपुर, नौरैया खेड़ा, सरायमीता, जमुई, पनका, पनकी, बधवापुरवा के लोग पलायन के लिए मजबूर हैं। यहां पर कूड़ाजनित तमाम संक्रामक बीमारियों, महामारी, डेंगू फैल गया है कूड़े की बदबू और दुर्गन्ध से इन गांवों के लोग पलायन कर रहे हैं लोगों का यहां तक कहना है कि इन गांवों के लोगों की शादी और ब्याह तक इस कूड़े के ढेर की वजह से नहीं हो रहा है लोग रिश्ता लेकर गांव तक नहीं आ रहे हैं।

राम लखन इण्टर कालेज जो कूड़े से चारों तरफ घिर गया है सभी बच्चे यहां से स्कूल छोड़कर जा चुके हैं हल्की बारिश पर जो सड़न और बदबू होती है जिससे लोग भाग खड़े होते हैं और शहर के कचरों से जो धुआं निकल रहा है वह जानलेवा है।  प्रशासन पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि सत्य आकड़ो को सामने नही लाया जा रहा बल्कि यदि तत्काल कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कर दी जाए तो सभी के लिए बेहतर होगा। 

कानपुर के हैलट अस्पताल में डेंगू से पीड़ित मरीजों का  प्रशासन के द्वारा समुचित व बेहतर इलाज नही हो रहा।

दुःख की बात तो यह है कि प्रशासन लगातार डेंगू से मरने वाले लोगों की संख्या को कम बताने के लिए लोगों का इलाज ही नहीं करा रहा है। और गरीब लोगों को प्राइवेट हास्पिटल में मरीजों को भर्ती कराना पड़ रहा है। इनकी जान और माल दोनों पर सरकार ने डाका डाल दिया है और अपने नैतिक दायित्व से मुकर गयी है। 

संचार माध्यमों के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि -

बुधवार को मेडिकल कालेज, उर्सला पैथालाजी में पता चले रोगियों की संख्या-33 

ऽ इनमें से नगर से डेंगू रोगी-23  इन दोनों पैथालाॅजी में अब तक पता चले डेंगू रेागी-2311

3465 घरों, दफ्तरों में मिले डेंगू के लार्वा

उत्तर प्रदेश में जुलाई से सितम्बर तक मेडिकल काउन्सिल आफ इण्डिया के आंकड़े के अनुसार 792 मरीज डेंगू से पीड़ित पाये गये जबकि अक्टूबर और नवम्बर का आंकड़े के बारे में अभी तक पता नहीं है। 

लखनऊ में 500, कानपुर में 700 और इलाहाबाद में 325 डेंगू के मरीज के मामले माह जुलाई से अक्टूबर तक आ चुके हैं।

 

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