स्वामी श्री प्रखर जी महाराज ने दीपोत्सव पर्व पर परिचर्चा की

स्वामी श्री प्रखर जी महाराज ने दीपोत्सव पर्व पर परिचर्चा की

दीपावली दीपों का त्योहार है पटाखों से दूर रहें प्रदूषण मुक्त भारत बनाएं - स्वामी श्री प्रखर जी महाराज

कानपुर -

प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट के तत्वाधान में परम पूज्य गुरुदेव अनंत श्री विभूषित एक सम्राट महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रखर जी महाराज ने दीपोत्सव पर्व पर अपने भक्तों को धनतेरस एवं दिवाली के महत्व पर परिचर्चा कर विस्तार पूर्वक बताया देश भर से पधारे महाराज श्री के शिष्यों ने परिचर्चा में भाग लिया जिसमें दिल्ली के श्री अजय बंसल आरती बंसल एवं अनिल गर्ग व सोनीपत से अमित मित्तल ने परिचर्चा में हिस्सा लिया।

महाराज ने धनतेरस के महत्व पर बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहते हैं यह त्यौहार दीपावली आने की पर्व सूचना देता है इस दिन नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है धनतेरस की मृत्यु के देवता यमराज एवं भगवान धनवंतरी की पूजा का महत्व है

शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथों से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि भगवान विष्णु की अशावतार है संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार एवं प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धन्वंतरि का अवतार लिया था।

दीपावली के महत्व बताया कि दिवाली का पर्व कार्तिक अमावस्या के दिन दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है क्योंकि भगवान राम रात्रि में अयोध्या से वापस आए थे और अमावस की रात थी अयोध्या वासियों ने पूरे शहर को दीपको से जगमग आ दिया था दीपावली से दो बातें का गहरा संबंध है एक तो माता लक्ष्मी का पूजन एवं दूसरा भगवान राम का लंका विजय के पश्चात अयोध्या वापस प्रचलित

मान्यताओं के अनुसार इस महापर्व पर रघुवंशी भगवान श्री राम की रावण पर विजय इसके पश्चात अयोध्या आगमन पर नागरिकों ने दीपावली अपने अंदर प्रकाश का ऐसा उजियारा धारण करती है जिसके प्रभाव से अनीति आतंक एवं अत्याचार का अंत होता है और मर्यादा नीति एवं सत्य की प्रतिष्ठा होती है।

कार्यक्रम का समानवन्य सुरेश गुप्ता ने किया कार्यक्रम प्रमुख रुप से श्री कृष्ण अग्रवाल विश्वनाथ कनोडिया नरेंद्र शर्मा संतोष गर्ग मनीष गर्ग इस नारायण त्रिवेदी नवीन अग्रवाल मदन कनोडिया प्रकाश मिश्रा योगेश सिंह हरिप्रसाद आत्मबोध प्रकाश ब्रह्मचारी आदि लोग मौजूद रहे।

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