धनतेरस जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, राशि के अनुसार क्या खरीदें

धनतेरस जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, राशि के अनुसार क्या खरीदें

स्वतंत्र प्रभात न्यूज़/पत्रकार अमन कुमार सोनी 

जैन आगम में धनतेरस को 'धन्य तेरस' या 'ध्यान तेरस' भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिये चले गये थे। तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुये दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुये। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रथा 

धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था।भगवान धन्वन्तरि चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर लोग धनिया के बीज खरीद कर भी घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।

धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है

जिसके सम्भव न हो पाने पर लोग चांदी के बने बर्तन खरीदते हैं। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है। भगवान धन्वन्तरि जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।

धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है। इस प्रथा के पीछे एक लोक कथा है, कथा के अनुसार किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था। दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा।

राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े। दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया।

विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा। यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक ने यम देवता से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए।

दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यम देवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं सो सुनो। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।

धनतेरस पर सभी महिलाओं को रजत लेख की अपनी पसंद खरीदने के लिए गहने या चांदी की दुकानों पर खरीदारी करना व्यस्त हो जाता है। लेकिन बहुत व्यस्त कार्यक्रमों और काम के कारण कई महिलाओं को अपने पसंदीदा आइटम की खरीदारी करने के लिए समय की स्वतंत्रता नहीं है। इसलिए उनके लिए ऑनलाइन खरीदारी की अग्रिम तकनीक का विकल्प उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए धनतेरस के लिए शुद्ध रजत लेखों की पेशकश करते हैं। और कई बार 21 वीं शताब्दी की महिलाओं की मदद करने के लिए अपने समय की सुविधा और धनतेरस और दिवाली का आनंद लेने वाले कार्य क्षेत्रों का आनंद उठाया जा सकता है।

धन्वंतरि

धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है। धनतेरस के संदर्भ में एक लोक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज ने यमदूतों से पूछा कि प्राणियों को मृत्यु की गोद में सुलाते समय तुम्हारे मन में कभी दया का भाव नहीं आता क्या।

दूतों ने यमदेवता के भय से पहले तो कहा कि वह अपना कर्तव्य निभाते है और उनकी आज्ञा का पालन करते हें परंतु जब यमदेवता ने दूतों के मन का भय दूर कर दिया तो उन्होंने कहा कि एक बार राजा हेमा के ब्रह्मचारी पुत्र का प्राण लेते समय उसकी नवविवाहिता पत्नी का विलाप सुनकर हमारा हृदय भी पसीज गया लेकिन विधि के विधान के अनुसार हम चाह कर भी कुछ न कर सके।

एक दूत ने बातों ही बातों में तब यमराज से प्रश्न किया कि अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय है क्या। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए यम देवता ने कहा कि जो प्राणी धनतेरस की शाम यम के नाम पर दक्षिण दिशा में दीया जलाकर रखता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस मान्यता के अनुसार धनतेरस की शाम लोग आँगन में यम देवता के नाम पर दीप जलाकर रखते हैं। इस दिन लोग यम देवता के नाम पर व्रत भी रखते हैं।

धनतेरस के दिन दीप जलाककर भगवान धन्वन्तरि की पूजा करें। भगवान धन्वन्तरी से स्वास्थ और सेहतमंद बनाये रखने हेतु प्रार्थना करें। चांदी का कोई बर्तन या लक्ष्मी गणेश अंकित चांदी का सिक्का खरीदें। नया बर्तन खरीदे जिसमें दीपावली की रात भगवान श्री गणेश व देवी लक्ष्मी के लिए भोग चढ़ाएं। कहा जाता है कि समु्द्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, यही वजह है कि धनतेरस को भगवान धनवंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है । धनतेरस दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है।

क्यों खरीदते हैं पीतल

ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु लंबे समय तक चलती हैं और वस्तु शुभ फल प्रदान करती है लेकिन अगर पीतल की खरीद-दारी की जाए तो इसका तेरह गुना अधिक लाभ मिलता है। कहा जाता है कि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है। भगवान धनवंतरी को नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में उन्होंने शंख और चक्र धारण किए हुए हैं, दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है।

पूजा-पाठ में क्यों है पीतल का महत्व

तांबे और जस्ता धातु को मिलाकर ही पीतल का निर्माण होता है। धार्मिक कर्म और सनातन धर्म में पूजा-पाठ के लिए पीतल के बर्तन का इस्तेमाल होता था। महाभारत में एक किस्सा भी वर्णित है। सूर्यदेव ने द्रौपदी को पीतल का अक्षयपात्र वरदान में दिया था जिसकी विशेषता थी कि द्रौपदी चाहे जितने लोगों को भोजन करा दें, खाना कम नहीं होता था।

दीया जलाना ना भूलें

धनतेरस की शॉपिंग में बिजी होकर शाम के समय दीपदान करना ना भूलें। धनतेरस की शाम दीपदान का भी बड़ा महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु से बचाव होता है। इससे जुड़ी एक कथा है। एक बार यमराज ने यमदूतों से कहा कि लोगों के प्राण हरते समय तुम्हें कभी दुख हुआ है। इस पर यमदूत ने कहा कि एक बार एक राजकुमार के प्राण हरते समय हमें बहुत दुःख हुआ था।

राजकुमार की शादी के चार ही दिन हुए थे। राजमहल में विलाप और हाहाकार मच गया , जिससे हमारा हदय हमें धिक्कारने लगा। उन्होंने यमदेव से कहा कि आप कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे प्राणी की अकाल मृत्यु ना हो। यमराज ने कहा कि ‘जो व्यक्ति धनतेरस के दिन मेरे नाम से दीप जलाकर मुझे स्मरण करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा।

धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त

सुबह 07:07 से 09:15 बजे तक

दोपहर 01:00 से 02:30 बजे तक

रात 05:35 से 07:30 बजे तक 

कैसे करें धनतेरस की पूजा

1. सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी की फोटो स्थापित करें।

2. चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें।

3. भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें।

4. हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें।

पूजा के समय इस मंत्र का करें जप

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान, दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः 

पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो, धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः 

ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि

राशि अनुसार करें खरीदारी

मेष राशि - चांदी के बर्तन एवं इलेक्ट्रानिक सामान खरीदना लाभदायक रहेगा।

वृष राशि - चमकीले वस्त्र चांदी अथवा ताबें के बर्तन खरीदना शुभ रहेगा।

मिथुन राशि - सोने के आभूषण, केसर, वाहन, खरीदना शुभ रहेगा।

कर्क राशि - चांदी के आभूषण, सिक्के एवं घरेलू इलैक्ट्रिक सामान खरीदना उत्तम रहेगा।

सिंह राशि - ताबें, कांसे के बर्तन,कपड़े एवं सोने की कोई चीज खरीदना शुभ रहेगा।

कन्या राशि - गणेश जी की मरगज की मूर्ति, चांदी का सामान अथवा रसोई का सामान खरीदना शुभ रहेगा।

तुला राशि - सौन्दर्य का सामान, चांदी के बर्तन, सिक्के या सोने का सामान, अथवा सजावटी सामान खरीदना शुभ फलदायक रहेगा।

वृश्चिक राशि - इलैक्ट्राॅनिक उपकरण सोने के आभूषण खरीदना शुभ रहेगा।

धनु राशि - सुगंधित सामान, सोने के सिक्के, आभूषण अथवा सोने का सामान खरीदना शुभ रहेगा।

मकर राशि - वाहन, कपड़े, चांदी के बर्तन, आभूषण खरीदना शुभ रहेगा।

कुंभ राशि - प्रसाधन के सामान, दो पहिया वाहन, सौन्दर्य प्रसाधन का सामान खरीदना शुभ होगा।

मीन राशि - चांदी के सिक्के, सोना, चांदी के बर्तन एवं इलैक्ट्रानिक उपकरण खरीदना लाभदायक रहेगा।

मान्यता: धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की अनोखी परंपरा

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