दिवाली पर पूजा करने की यह है सही विधि , दिवाली व्रत कथा और पूजा विधि 

दिवाली पर पूजा करने की यह है सही विधि  , दिवाली व्रत कथा और पूजा विधि 

दिवाली व्रत कथा और पूजा विधि 


दिवाली हिन्दू धर्म के सबसे प्रमुख त्यौहारो में से एक है। दिवाली आने से महीनो पहले अपने घरो और दुकानों की सफाई शुरू हो जाता है। ऐसा कहा जाता है जहाँ साफ सफाई रहती है वही पर माँ लक्ष्मी विराजमान होती है।

दिवाली धनतेरस के दो दिन बाद यानि कार्तिक माह की अमावस्या के दिन पूरे देश में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता हैं। दिवाली को रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। इस दिन शहर जगमग जगमग करता है।

रामचरितमानस में लिखा गया है की भगवान् रामचंद्र अपना चैदह वर्ष का वनवास पूरा कर कार्तिक मास के अमावस्या के दिन अयोध्या लौटे थे। अपने प्रभु रामचंद्र जी के अयोध्या लौटने के खुशी में नगर वासियों ने दीप जलाकर अपनी खुशियाँ मनायी थीं।

इसी याद में आज तक दिवाली पर दीपक जलाए जाते हैं और कहते हैं कि इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य का राजतिलक भी हुआ था। अंधकार पर प्रकाश का जीत हुआ था इसके उपलक्ष में हम दिवाली मानते है।

आज के दिन लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती जी की विधि पूर्वक पूजा किया जाता है। दिवाली के दिन व्यापारी अपने बही खाते बदलते है तथा फायदा और नुक्सान का ब्यौरा तैयार करते हैं। दिवाली पर जुआ खेलने की भी परम्परा हैं। आज के दिन लोग खूब जुआ खेलते है। और लोग जुआ खेलकर यह पता लगाते हैं कि उनका पूरा साल कैसा रहेगा।

दीपावली पूजा कैसे करे 


दिवाली पर माता लक्ष्मी गणेश और माँ सरस्वती की पूजा किया जाता है। भारत मे दिवाली परम्परम्पराओं के पर्व के रूप में मानते है। पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ दिवाली का पूजन विधि  पूर्वक किया जाता है। इस दिन लक्ष्मी गणेश और सरस्वती जी के मूर्ति या चित्र की पूजा की जाती है।

कहा जाता है कि सबसे पहले गणेश जी की पूजा किया जाता है इसके बाद ही सभी देवताओ की पूजा किया जाता है इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन भी किया जाता है। सरस्वती की पूजा का कारण यह है कि धन व सिद्धि के साथ ज्ञान भी पूजनीय है इसलिए ज्ञान की पूजा के लिए माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।


इस दिन धन की देवी लक्ष्मी जी की पूजा के रूप में लोग चाँदी के सिक्के और नोटों की गड्डी भी रखते हैं। इस दिन माता को प्रसन करने के लिए अपने घरो में रंगोली सजाकर माँ लक्ष्मी को खुश किया जाता है।

इस दिन धन के देवता कुबेर, इन्द्र देव तथा सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाले भगवान् विष्णु की भी पूजा की जाती है। रंगोली रंग बिरंगे रंगों से सजाकर बनाई जाती है।


शास्त्री परमान्नद शर्मा ने बताया की-


दीपावली पर पूजा सामग्री मे क्या क्या होना चाहिये।


धूप बत्ती (अगरबत्ती), चंदन, कपूर, केसर, यज्ञोपवीत 5, कुंकु, चावल, अबीर, गुलाल, अभ्रक
हल्दी, सौभाग्य द्रव्य- मेहँदी, चूड़ी, काजल, पायजेब, बिछुड़ी आदि आभूषण, नाड़ा
रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, कमलगट्टे
धनिया खड़ा, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, कुशा व दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल
शहद (मधु), शकर, घृत (शुद्ध घी), दही, दूध, ऋतुफल, (गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े इत्यादि)
नैवेद्य या मिष्ठान्न (पेड़ा, मालपुए इत्यादि), इलायची (छोटी), लौंग, मौली, इत्र की शीशी

तुलसी दल, सिंहासन (चैकी, आसन), पंच पल्लव (बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते) औषधि (जटामॉसी, शिलाजीत आदि), लक्ष्मीजी का पाना (अथवा मूर्ति), गणेशजी की मूर्ति, सरस्वती का चित्र, चाँदी का सिक्का लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र,

गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र, जल कलश (ताँबे या मिट्टी का), सफेद कपड़ा (आधा मीटर) लाल कपड़ा (आधा मीटर), पंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार) दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा)
श्रीफल (नारियल), धान्य (चावल, गेहूँ), लेखनी (कलम), बही-खाता, स्याही की दवात
तुला (तराजू). पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल), एक नई थैली में हल्दी की गाँठ,
खड़ा धनिया व दूर्वा आदि खील-बताशे, अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र

दिवाली की पूजा विधि 


दिवाली के दिन दीपकों की पूजा का विशेष महत्व हैं। सबसे पहले दो थाली में छः चैमुखे दीपक रखें।

छब्बीस छोटे आकार के दीपक भी दोनो थालों में सजा कर रख दे। इन सभी दीपको को बारी बारी से प्रज्जवलित करके जल, रोली, खील, चावल, गुड, अबीर, गुलाल, बताशे, धूप, आदि से पूजा करें और टीका लगावें।

दुकानदार और व्यापारी लोग दुकान की गद्दी पर गणेश लक्ष्मी की पूर्ति रखकर पूजा करें। इसके बाद घर आकर पूजन करें। सबसे पहले पुरूष पूजा करे उसके स्त्रियाँ पूजन करें। स्त्रियाँ चावलों का बायना निकालकर कर उस रूपये रखकर अपनी सास को भेट कराये और उनका चरण स्पर्श करके आशीवार्द प्राप्त करें।

पूजा समाप्त होने के बाद सभी दीपकों को घर में जगह-जगह पर रख दे। एक चैमुखा, छः छोटे दीपक गणेश लक्ष्मीजी के पास रख दें। चैमुखा दीपक का काजल सब बडे बुढे बच्चे अपनी आँखो में डालें।

दिवाली पूजन कैसे करें 
सबसे पहले सुबह उठाकर नित्यक्रिया करने के बाद स्नान करे उसके नया या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
संध्या के समय पुनः स्नान करें।

लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी में घर की साफ सफाई कर दे और दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मी जी का चित्र बनाएं। (लक्ष्मी जी का फोटो भी लगाया जा सकता है।)

भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन, कदली फल, पापड़ तथा अनेक प्रकार की मिठाइयाँ बनाएं।
लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चैकी रखकर उस पर मौली बाँधें।
इस पर गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें।
फिर गणेश जी को तिलक कर पूजा करें।
अब चैकी पर छः चैमुखे व 26 छोटे दीपक रखें।
इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं।
फिर जल, मौली, चावल, फल, गुढ़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें।
पूजा पहले पुरुष तथा बाद में स्त्रियां करें।
पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें।


यह लेख शास्त्री परमानन्द शर्मा से प्रेरित हो कर लिखा गया।
 

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