शिक्षा या व्यवसाय

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 बिलग्राम

जिलाधिकारी ने 4 दिन पहले स्कूलों का भीषड़ गर्मी की वजह से कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों का समय 7 बजे से 11बजे तक करने निर्देश बीएसए को दिया थापर यह आदेश सरकारी स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो वहीं निजी स्कूलों ने अपने स्कूलों समय नही बदला है

अभी तक कस्बे लगभग सभी स्कूलों का समय वही पुराना ही हैइससे लगता है कि इन लोगों पर जिलाधिकारी के आदेश ज़रा सा भी असर नही हुआ बच्चे सुबह 8 बजे से 1:30 बजे तक इस भीषण गर्मी में परेशान होते हैं तपती धूप में स्कूल बैग उठाये स्कूल आते जाते हैं मौसम गर्मी का है कई तरह की बीमारियां चल रही हैं जैसे डायरिया,कालरा, लू,हैजा, और शरीर में पानी की कमी होना।यूनिफॉर्म कोड जो कि पूरे शरीर को नही कवर करते हैं

कई स्कूलों की यूनिफॉर्म ऐसी है जिससे बच्चों का पूरा शरीर यूनिफॉर्म से नही कवर हो पाता है धूप की तेजी से पानी की कमी लू लगने की और स्किन इंफेक्शन का खतरा बना रहता है अभिभावक अपने बच्चों के लिये परेशान दिखाई देते हैं पर निजी स्कूलों में हाल कुछ ऐसा है कि वो आदेश का पालन नही करेंगे।स्कूल प्रबंधक और प्रिन्सिपल खुद तो ac लगे कमरे में बैठे रहतें हैं और बच्चों के लिए कोई इंतजाम नही है।जबकि फीस के नाम पर अच्छा खासा पैसा अभिभवक से वसूल करते हैं।

बच्चे स्कूल वैन, मैजिक, बसों,और आटोरिक्शा आने जाने पर मजबूर हैं बच्चे हाल इतना बुरा है कि बच्चों को वैन,मैजिक, बसों में ठूंस ठूंस कर भरे जाते हैं।क्या मैजिक, वैन, या ऑटोरिक्शा से बच्चों को ले जाना सही है? अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

अभिभावक भी क्या करें मुहं मांगी फीस की मार और ऐसे माहौल में बच्चों को वैन या मैजिक से भेजना क्या ठीक है। इन स्कूल वालों का कौन सा नियम कायदा जरा से पैसों के लिए बच्चों कि ज़िन्दगी से खिलवाड़ कर रहे हैं पर जिले के आला अधिकारियों का असर भी नही होता।

कस्बे के इन स्कूलों पर जिलाधिकारी के निर्देशों का कोई असर होता नही दिख रहा है क्या यह निर्देश सिर्फ सरकारी स्कूलों के लिए ही है क्या निजी स्कूल इन निर्देषों का पालन नहीं करेंगे।

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