वेतन न मिलने से धरने पर बैठे कर्मचारी

वेतन न मिलने से धरने पर बैठे कर्मचारी

पंजाब सरकार के कई विभागों के कर्मचारियों ने नवंबर का वेतन अब तक नहीं मिलने के विरोध में सोमवार को कलम छोड़ हड़ताल की. इनमें तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग, सिंचाई, उद्योग और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने रोष रैली का भी आयोजन किया.

पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने 29 नवंबर 2019 को घोषणा की थी कि सभी सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन जारी कर दिया जाएगा.

रिपोर्ट से इस बात का पता चला है कि एक हफ्ता बीत जाने के बाद अब कर्मचारी आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं. पंजाब सिविल सचिवालय में कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रधान सुखचैन सिंह खैरा ने कहा कि मंगलवार को भी हड़ताल जारी रखी जाएगी. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं किया तो इस हड़ताल को पूरे राज्य में सरकारी कर्मचारियों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा.
 
मुलाजिमों को वेतन मिलने तक मंत्रियों के लाभ बंद हों: सूत्रों का कहना है कि शिरोमणि अकाली दल ने मांग की है कि जब तक मुलाजिमों का वेतन नहीं मिल जाता मंत्रियों और चेयरमैन के सभी लाभ बंद किए जाएं. पूर्व वित्तमंत्री परमिंदर ढींडसा ने कहा कि राज्य सरकार के पास मुलाजिमों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं. सीएम के विदेश में सैर-सपाटे और सलाहकार नियुक्त करने को करोड़ों हैं.

जो सरकार देश में सबसे ज्यादा टैक्स वसूल कर रही है, उसके पास छह विभागों, सिंचाई, उद्योग, तकनीकी शिक्षा, ग्रामीण विकास, खेतीबाड़ी व योजना के 70000 कर्मचारियों को नवंबर वेतन देने को पैसे नहीं हैं. जबकि, मंत्रियों और उनके सलाहकारों के वेतन जारी कर दिए गए हैं. वहीं सरकार ने इस साल के पहले छह महीनों के दौरान अपने टैक्स लक्ष्य का सिर्फ 34 फीसदी ही हासिल किया.

जहाँ इसमें भी 14 फीसदी की कमी दर्ज की गई. उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते की सात किस्तें जारी न कर मुलाजिमों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. 

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