हैदराबाद एनकाउंटर सही या गलत ? जाने एनकाउंटर की कुछ बारीकियाँ।

हैदराबाद एनकाउंटर सही या गलत ? जाने एनकाउंटर की कुछ बारीकियाँ।

स्वतंत्र प्रभात हैदराबाद-

प्रियंका रेड्डी की जिस निर्दयता से बलात्कार और फिर उसके बाद जिंदा जला कर हत्या की गई वो अपने आप में काफी दुर्भाग्यपूर्ण और विकृत सोच का नतीजा था। और जिस प्रकार से उन आरोपितो का एनकाउंटर किया गया वो भी अपने आप में एक सवाल खड़ा करता है।

आपको मै मुंबई की एक छोटी सी सच्ची घटना सुनाना चाहूँगा। वहाँ पर एक लड़का ठेले पर सब्जी की दुकान लगाता था उसकी उम्र महज 19 साल थी उसकी दुकान काफी अच्छी चल रही थी जिससे उसके घर वालों की मूलभूत जरूरते काफी अच्छी तरीके से पूरी होती थी।वो खुश था गाँव में उसके परिवार के लोग भी काफी खुश थे कि उनका लड़का काफी ढ़ंग से उनकी जरूरते पूरा करता है क्योंकि उस लड़के के अलावा उसके घर में कोई और कमाने वाला नहीं था।

एक दिन शाम को रोज की तरह वो अपने ठेले पर सब्जी की दुकान लगाया था और तभी एक कार उसके ठेले के सामने रुकती है उसमे से एक सज्जन नीचे उतर कर कुछ सब्जियां लेते है फिर  सब्जी लेकर चले जाते है लेकिन थोड़ी देर बाद वापस आते है और बोलते है कि सब्जी लेते समय उनका  200 रूपया उसके ठेले पर ही गिर गया। लड़का बहुत परेशान होता है वो बोलता है कि साहब कहीं और गिरा होगा यहाँ आपका पैसा नहीं गिरा है।

फिर क्या वो सज्जन उसको चोर कहकर उस पर चिल्लाने लगते है और पुलिस में उसकी कंप्लेन कर देते है।पुलिस आती है चूंकि सज्जन पुरुष थोड़ा पहुंच वाले रहते है तो पुलिस पहुंचते ही उस लड़के को थाने उठा लाती है और फिर धमकाते हुए बोलती है कि इनका पैसा 200 रूपये वापस करो। लड़का बोलता है साहब मैने पैसा नहीं लिया । 

अगर लिया होता तो वापस कर देता और यहाँ तक न आता मेरी हजारो रूपये की सब्जियां अलग से बर्बाद हो गयी 200 के चक्कर में।लड़का अड़ जाता है कि जब मैने पैसा लिया नहीं तो दूँ क्यों

फिर उस लड़के को पुलिस जेल में बंद कर देती है और 1 साल वो जेल में रहता है जबकि 200 रूपये चुराने के जुर्म सिर्फ 3 महीने की जेल ज्यादा से ज्यादा हो सकती है।

1 साल जेल में रहने का कारण था कि वो हर पेशी पर बोलता था कि उसने चोरी नहीं की और वकील जिरह करता लेकिन फिर कोर्ट उठ जाती और अगली पेशी की तारीख दे दी जाती थी।फिर अंत में वकील ने उसको समझाया कि मै जानता हूँ तुमने चोरी नहीं कि लेकिन अगर चोरी की होती तो उसमें जितनी सजा होती उससे ज्यादा तुम जेल में रह चुके हो ।

इसलिए तुम इस पेशी पर स्वीकार कर लेना कि चोरी तु्म्ही ने की फिर तुम्हारी बेल हो जायेगी क्योंकि वो सजा तुम आलरेडी भुगत चुके हो । फिर वो लड़का वही करता है और अंत में जेल से छूट जाता है।

अब आप बताईये वो कोर्ट पर और न्याय व्यवस्था पर पूरा जीवन कैसे यकीन कर पायेगा। उसका 1 साल जेल में बीता वो भी 200 रूपये के लिए। और जेल जाने के कारण उस पर आश्रित उसके परिवार पर कितनी मुसीबते आयी होंगी ,कितना आर्थिक नुकसान हुआ होगा।

ये सच्ची घटना मैने  सिर्फ इसलिए बतायी कि कोर्ट और न्याय को आईना दिखाना जरूरी था।

लेकिन इन सबके बावजूद हैदराबाद में जो एनकाउंटर हुआ वो गलत है नहीं होना चाहिए था उसका कारण है कि हमारा संविधान कहता है कि 100 आरोपी छूट जाये लेकिन किसी एक निर्दोष आदमी को सजा न होने पाये।स्वतंत्र प्रभात अखबार इस एनकाउंटर को जस्टीफाई नहीं करता।

एनकाउंटर पर  कुछ विचारणीय प्रश्न-

पहला सवाल-  आप सोचिए कि क्या फारेंसिक जाँच और सारे सबूत उन चारों आरोपियों के खिलाफ थे क्या वो सारे सबूत उनके चारों के खिलाफ थे?

दूसरा सवाल-  मैं मानता हूँ कि हो सकता है चारो लोग वहाँ पर वारदात के समय हो लेकिन जरूरी नहीं कि चारों ने घटना को अंजाम दिया हो?

हो सकता है उनमें से एक बचाने कि कोशिश किया हो लेकिन बाकी दरिंदे उसको भी मारने और फँसाने की धमकी देकर उसको चुप करा दिये हों?क्या इन सब कि गहराई से जाँच होनी जरूरी नहीं थी।

तीसरा सवाल कि अगर चारो आरोपी थे इतना जघन्य अपराध किये तो क्या गारंटी है कि इसके पहले उन्होने कोई जघन्य अपराध नही किये थे क्योंकि इतना जघन्य वारदात को कोई पहली बार में  अंजाम नहीं दे सकता है।

चौथा सवाल-  क्या पुलिस को सारे आरोपियों के फिंगर प्रिंट और विभिन्न प्रकार के सैंपल जो  जाँच के लिये भेजे गये थे उनकी रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना था?

पाँचवा सवाल- अगर जाँच के द्वारा भेजी गयी सारी रिपोर्ट आ चुकी है और वो रिपोर्ट ये सिद्ध करती है कि ये चारो उस भयावह घटना के मुजरिम और दोषी है तो पुलिस उसको सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है?

 

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