भारत में सीएचडी से पीड़ित बच्चियों के लिए उम्मीद की नई किरण

भारत में सीएचडी से पीड़ित बच्चियों के लिए उम्मीद की नई किरण

 भारत को दिल की जन्मजात बीमारियों से मुक्त कराने और बच्चियों को बचाने के प्रयास में परनोड रिचर्ड इण्डिया चैरिटेबल फाउन्डेशन; PRICF एवं जेनेसिस फाउन्डेशन ने सीएचडी से पीड़ित बच्चियों की सर्जरी में सहयोग प्रदान करने के लिए एक दूसरे के साथ हाथ मिलाए हैं। इस साझेदारी के तहत परनोड रिचर्ड इण्डिया चैरिटेबल फाउन्डेशन 20 से अधिक लड़कियों की सर्जरी में सहयोग देने के लिए रु 40 लाख का अनुदान देगा।


यूनिसेफ द्वारा 2018 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार ‘‘भारत में लड़कों की तुलना में लड़कियों की मृत्यु अधिक संख्या में होती है क्योंकि माता-पिता अक्सर लड़कियों के इलाज पर ध्यान नहीं देते।’ रिपोर्ट के अनुसार ‘‘देश में बेटों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण कन्या भू्रण हत्या (गर्भपात) आम है जिसका बुरा असर लिंग अनुपात पर पड़ा है।  आज हमारे देश में लिंग अनुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 940 महिलाएं हैं। यूनिसेफ द्वारा 2017 में जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार राज्यों द्वारा संचालित 700 अस्पतालों में भर्ती किए गए 60 फीसदी बच्चे लड़के थे। इसका मुख्य कारण यह है कि माता-पिता अपने बेटों की बीमारी का इलाज तो करवाना चाहते हैं लेकिन बेटियों के इलाज पर ध्यान नहीं देते।


सीएचडी नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली सबसे आम जन्मजात बीमारी है। हमारे देश में 2 लाख से अधिक बच्चे इस समस्या के साथ जन्म लेते हैं, बच्चों की मृत्यु दर में 10 फीसदी योगदान सीएचडी का ही है। प्रभावी प्रणाली न होने के कारण बहुत से बच्चों का इलाज नहीं हो पाता, साीएचडी के 60 फीसदी मामले जीवन के पहले दो वर्षों में जानलेवा होते हैं।


मामले की गंभीरता को देखते हुए परनोड रिचर्ड इण्डिया चैरिटेबल फाउन्डेशन; एवं जेनेसिस फाउन्डेशन ने ऐसे परिवारों की सीएचडी से पीड़ित बच्चियों (नवजात से लेकर 18 वर्ष तक) की सर्जरी में सहयोग प्रदान करने की यह पहल की है, जिनकी मासिक आय रु 10,000 से भी कम है। समाज के इस उपेक्षित वर्ग को ज़रूरी सहयोग प्रदान करना और इन्हें जीवन के नए अवसर प्रदान करना इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य है।


इस साझेदारी पर अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए परनोड रिचर्ड इण्डिया में वाईस प्रेज़ीडेन्ट कोरपोरेट अफेयर्स श्री सुनील दुग्गल ने कहा, ‘‘पिछले सालों के दौरान PRICF ने समाज के ज़रूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई हैं और हम इसी के लिए प्रतिबद्ध हैं। सीएचडी से पीड़ित बच्चियों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए जेनेसिस फाउन्डेशन के साथ साझेदारी करते हुए बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है, जिन्हें समाज उपेक्षित करता है।

ये बच्चियां न केवल दिल की बीमारी से पीड़ित हैं बल्कि उनके इलाज को सिर्फ इसलिए ज़रूरी नहीं समझा जाता, क्योंकि वे लड़कियां हैं। "
इस मौके पर जेनेसिस फाउन्डेशन के फाउंडर ट्रस्टी प्रेमा एवं ज्योति सागर ने कहा ‘‘लड़कियां प्राकृतिक रूप से ज़्यादा मजबूत होती हैं, फिर भी हमारे समाज में उन्हें सही समय पर सही इलाज नहीं मिलता। लिंग भेदभाव के चलते इनकी दिल की बीमारी का इलाज नहीं किया जाता।

समय आ गया है कि हम समाज में मौजूद लिंग भेदभाव को दूर करें और इन बच्चियों को भी जीवन जीने का अधिकार दें। जेनेसिस फाउन्डेशन में हमारा मानना है कि जीवन बहुत कीमती है और पैसे या इलाज की कमी के कारण एक भी बच्चा मरना नहीं चाहिए। हम एक ऐसे भारत का सपना देखते हैं जहां जागरुकता, निदान या संसाधनों की कमी के कारण सीएचडी से पीड़ित एक भी बच्चे की मृत्यु नहीं होगी।’’

  

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