ईवीम (EVM) - मशीन या मायाजाल?

ईवीम (EVM) - मशीन या मायाजाल?
ईवीम (EVM) - मशीन या मायाजाल?

 

एक युग की शुरुआत हो चुकी है , जहाँ हर कोई बहुत बड़ा ज्ञाता है, सबके पास जिओ का फ़ोन है और टिकटोक के वीडियो जिसमे ज्ञान का अद्भुत भण्डार है । ऐसे में evm कैसे अपने आप को बचा कर रख सकती है और वो भी तब जब हमारा समाज पुरुष प्रधान हो । इलेक्शन 2019 का समापन हो चुका है, सारे महारथी अपना अपना दांव लगा चुके है और सबकी किस्मत अब उसी EVM में कैद है जिसका चीरहरण 23 मई को होना तय है।  ये सदियों से होता रहा है जब बीजेपी विपक्ष में थी तब भी और आज जब कांग्रेस विपक्ष में है तब भी । लेकिन तब से अब तक गंगा  जी में बहुत पानी बह चुका है ।

हम लोग स्वतंत्र है और ऐसे में एक जिम्मेदार मीडिया की तरह हमें अपने पाठको को EVM के बारे में अवगत कराना बहुत आवश्यक है , ताकि पाठक सही निर्णय ले पाए और मायाजाल में न फसे। EVM एक टेक्निकल वस्तु है लेकिन फिर भी हम आपको सरल शब्दों में समझाने की कोशिश करेंगे ।

EVM है क्या ये बाला  - मशीन या मायाजाल ?

परेशान मत हो ये आपकी पत्नी या गर्लफ्रेंड की तरह कॉम्प्लिकेटेड नहीं है। सबसे पहले जानिये इसका पूरा नाम , "इलक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन" ,इसका तलब है वोट आप यहाँ भी करेंगे लेकिन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नाकी पेपर बैलट से । जैसे पहले आप चिट्ठी पोस्ट कार्ड में भेजते थे फिर जमाना आ गया व्हाट्सप्प का । अब सोचो आप किसी को पोस्ट कार्ड भेजे इस जामने में तो वो आपको सल्फेट शिरोमणि ही समझेगा।

 

EVM में 3 यूनिट्स होती है , BO , CO  और VVPT । ये तीनो देविया (मशीन)  एक दूसरे से जुड़ी होती है । BO को Ballot Unit कहा जाता है जिसका काम है वोटो को CO तक भेजना।  CO यूनिट को Control Unit कहा जाता है जिसका काम है इलेक्ट्रॉनिक वोट्स को स्टोर करना और VVPT मशीन का काम है की वोटर को विश्वास दिलाना की वोट वही गया है जहाँ पर आपने डाला है।

इलेक्शन शुरू होने से पहले , पीठासीन अधिकारी EVM का ट्रायल  सभी पार्टी के बूथ एजेंट्स के साथ करता है. इसमें 2 चरण होते है , पहले चरण में मशीन सही से काम कर रही है या नहीं ये चेक किया जाता है (मतलब कनेक्शन ढंग से हुआ है या नहीं ) इसमें 7 डमी (Uncounted) वोट्स पड़ते है जिसका काम होता है मशीन की कनेक्शन को वेरीफाई करना मतलब तीनो देविया (BO, CO & VVPT) एक दूसरे से कनेक्टेड है . और फिंर दूसरा चरण होता है जिसमे हर एक कैंडिडेट के लिए डमी वोट्स डाले जाते है (कम से कम 50 डमी वोट्स डालना आवश्यक है) इन डमी वोट्स का वेरफिकेशन हर पार्टी के बूथ एजेंट्स करते है । इससे ये पता चलता है की मशीन सही से काम कर रही है , जिसको जितने वोट दिए गए है उतने ही मिले है। इसमें Control Unit में आये मत और VVPT की पर्ची का मिलान किया जाता है । फिर मशीन को रिसेट करके वोटिंग के लिए लगा दिया जाता है। गौर करने वाली बात ये है की इस पूरे कार्य में पीठासीन अधिकारी के साथ हर पार्टी का बूथ एजेंट शामिल होता है।

सभी बूथ एजेंट्स के सामने मशीन को सील कर दिया जाता है। ये सील 3 लेयर्स की होती है, जिसमे हर पार्टी के बूथ एजेंट्स के सिग्नेचर समय और तारीख होता है । तो आप ये दिमाग से निकाल दे की आप EVM रेप्लस कर सकते है ।

 

क्या EVM हैक हो सकता है?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले ये जानना जरूरी है की हैक क्या होता है ? सरल शद्बों में कहे तो हैक का मतलब है सेंधमारी ।

यानी बिना कोई मशीन को छुए दूर से देख के (अपनी नजरो या फिर इंटरनेट से ) उसके नतीजे बदल दे।

अब बात करते है हैकिंग की, तो इसका सीधा सीधा जवाब है की यहाँ हैकिंग की कोई सम्भावना नहीं है । कारण, ये है की ये मशीन कही से भी किसी भी नेटवर्क या इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होती तो ऐसे में आप इसे हैक कर पाए ये सिर्फ तभी संभव है जब आपको काला जादू आता हो ।

 

क्या EVM रेप्लस हो सकता है ।

एक शंका ये भी है की EVM रेप्लस करा जा सकता है क्योकि हैक वाला कार्ड ढंग से चला नहीं। आजकल लोग पढ़ लिख गए है जो पहले नहीं था। नीम्बू को संतरा बताकर बेचना संभव नहीं है । तो हम बात कर रहे थे रेप्लस करने की, इसके 2 पहलु है , पहला ये की सारी एवम एक सेंट्रल लोकेशन पर रखी जाती है जहाँ पर मिलिट्री फ़ोर्स के साथ साथ हर पोलिटिकल पार्टी के कार्यकर्त्ता भी उपस्थित होते है| वहाँ से EVM को रेप्लस करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है और रही सही कसर EVM की सील पूरी कर देती है जिसको आप चाह के भी दुबारा नहीं लगा सकते क्योकि उसके ऊपर हर एक पोलिंग एजेंट के दस्तख्वत होते है और समय दिनांक भी नोट होता है ।

 

EVM Malfunction (तकनीकी त्रुटि) :

ये एक ऐसी चीज है जो संभव है लेकिन  कुछ अनिभिज्ञ लोग इसे EVM की हैकिंग मानते है । असल में ये एक मशीन का ख़राब हो जाना भर ही है जिसका मतलब है की ये मशीन उपयोग योग्य नहीं है ऐसे केस में सभी पार्टी के बूथ एजेंट्स और पीठासीन अधिकारी की सहमति से मशीन को बदल दिया जाता है और नयी मशीन को लगाया जाता है ।

निष्कर्ष - EVM को हैक करना संभव नहीं है, हाँ रेप्लस किया जा सकता है लेकिन वो करने के लिए आपको मिस्टर इंडिया के अनिल कपूर बनकर आना पड़ेगा और हाँ साथ में सभी बूथ एजेंट्स के सिग्नेचर भी लाने पडेंगे और हाँ साथ में आपको नयी EVM भी खरीदनी पड़ेगी  (जो मिलती नहीं है ) और हाँ साथ में शायद आपको सेंट्रल फोर्स की गोलिया भी खानी पड़े । तो मेरे पाठको , ये राह उतनी ही मुश्किल है जितनी एक शादी शुदा इंसान का खुश होना :)

 

स्वतंत्र मीडिया का विचार ये है कि , फैसला जो भी आये  उसको स्वीकार करे और एक लोकतान्त्रिक देश के लोकतान्त्रिक नागरिक बने ।

नेता तो खाली लोकतंत्र की बात करेंगे लेकिन अलोकतांत्रिक होना ही उनका आचरण है , पाठक ऐसा होने से बचे।  

 

सत्य की खोज में असत्य आतम - अरुणेश गिरी

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