लखनऊ से लेकर हरदोई में चलने वाले फर्जी लाइसेंस के बड़े खुलासे पर हरदोई के अफसरों ने नही की 2 माह बाद भी कोई कार्यवाही

लखनऊ से लेकर हरदोई में चलने वाले फर्जी लाइसेंस के बड़े खुलासे पर हरदोई के अफसरों ने नही की 2 माह बाद भी कोई कार्यवाही

आरटीआई के माध्यम से 2 माह पूर्व हुआ खुलासा।

हरदोई के असला ऑफिस ने दी थी गलत रिपोर्ट

आरटीआई कार्यकर्ता ने हरदोई के अफसरों से शिकायत कर कार्रवाई की लगाई गुहार।

हरदोई के सवायजपुर पाली क्षेत्र में जमकर चल रहे सशस्त्र के फर्जी लाइसेंस।

कहा जाता है कि  सस्त्र लाइसेंस लेने में लोगों को सालों लग जाते हैं और दौड़ते दौड़ते लोगों के जूते चप्पल भी गिस जाते हैं।

लेकिन जब विभागीय मेहरबान हो जाए और विभाग के बाबू मेहरबानी की बरसात कर दें तो सोने पर सुहागा ही कहा जाएगा।

जी हां आज हम बात कर रहे हैं लोगों की जिंदगी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण वस्तु की जो कि लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन लोगों की मांग पर देता है और जो व्यक्ति इस वस्तु को रखता है उसकी हर गहन
 

जांच भी करा कर और हर कार्रवाई पूर्ण करके जिला अधिकारी के द्वारा असला को दिया जाता है।

लेकिन हर जांच और हर पहलू को पानी फेरते हुए हरदोई से एक बड़ा पर्दाफाश हुआ है यह पर्दा फाश हरदोई के असलाह ऑफिस का है।

 हरदोई के कलेक्ट्रेट में बैठे अफसरों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पाली थाना क्षेत्र का रहने वाले 60 वर्षीय वृद्ध जोकि बांकेलाल के नाम से जाना जाता है वह फर्जी लाइसेंसों की शिकायत को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंचा और जो लखनऊ से लेकर

हरदोई तक सूचनाएं दी गई थी उन सूचनाओं की कॉपी को भी लेकर के सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंचा और एक शिकायत पत्र फर्जी लाइसेंस जो कि उसके थाना क्षेत्र में जारी हुए थे उनकी मर्जी कारनामों के पूरी पुष्टि के साथ सिटी मजिस्ट्रेट को एक शिकायती पत्र कार्रवाई के लिए 2 माह पूर्व दिया था।

हरदोई के जिला कलेक्ट्रेट में बैठे अफसरों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब हरदोई जिले के पाली थाना क्षेत्र के बांकेलाल नामक 60 वर्षीय वृद्ध सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय पहुंचकर फर्जी असला लाइसेंसों का पर्दाफाश किया था  जिसने हरदोई के

असलाह कार्यालय से दो लाइसेंसों की सूचना मांगी थी जिसे हरदोई के असलाह कार्यालय ने सूचना दी कि यह असला लखनऊ से ट्रांसफर होकर आए हैं।

 लेकिन यह वृद्ध काफी जागरूक होने के कारण लखनऊ से भी सूचना मांग बैठे जब लखनऊ के सूचना

आई तो काफी चौंकाने वाली थी या लाइसेंस वहां किसी भी दस्तावेजों में दर्ज ही नहीं थे जिसे लेकर शिकायती पत्र के साथ बांकेलाल हरदोई के सिटी मजिस्ट्रेट के दफ्तर पहुंचकर।

उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया था सिटी मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार ने आनन-फानन में मामले को गंभीरता से लेते हुए बांकेलाल नामक वृद्ध को टीम गठित कर फर्जी लाइसेंस धारकों पर कड़ी कार्रवाई की आश्वासन दिया भी था । लेकिन अफसोस वही पुराने ढर्रे पर अफसरों का आस्वासन आज भी चल रहा है।

फिलहाल फर्जी लाइसेंसों का मामला यह काफी चौकाने वाला है आप लखनऊ से लेकर हरदोई द्वारा दी गई सूचनाएं भी अपनी  किस तरीके से हरदोई के अलावा ऑफिस ने एक 60 वर्षीय वृद्ध को आंखों में धूल झोंकने का काम किया लेकिन वृद्ध तो जागरुक था।

उसने लखनऊ से सूचना मांग ली लेकिन हरदोई में बैठे अफसरों का क्या जिन्होंने इन गंभीर मसलों पर अभी तक अपनी नजर ही नहीं दौड़ आई और उनके कलम के द्वारा फर्जी कारनामे होते ही रहे।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है की उन बाबू और अधिकारियों का क्या कार्रवाई होगी जिन की आड़ में ऐसे फर्जी करनामें चल रहे हैं?

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