फ़तेहपुर से और दूर हुए मोदी!

फ़तेहपुर से और दूर हुए मोदी!
  • फ़तेहपुर से और दूर हुए मोदी!
  • तीन संसदीय क्षेत्रों के लिये चौकीदार की जनसभा अब बाँदा में
  • पहले तिंदवारी में होनी थी सभा, अब जाना होगा 85 किलोमीटर
  • मोदी को फ़तेहपुर लाने के लिये  साध्वी ने लगाया वीटो

फ़तेहपुर। संसदीय चुनाव में भाजपा के मुख्य खेवनहार पीएम नरेन्द्र मोदी फ़तेहपुर से और दूर हो गये है। इस चुनाव में मोदी की सभा न मिलने से परेशान स्थानीय भाजपाईयो ख़ासकर पार्टी प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति को अब कार्यकर्ताओं के साथ ८५ किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। पहले ४५ किलोमीटर ही जाना पड़ता।ग़ौरतलब है कि पिछले कई दिनो से कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर, बाँदा और फ़तेहपुर संसदीय क्षेत्रों में प्रस्तावित पीएम नरेंद्र मोदी की चुनावी जनसभा को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर विराम लग गया है। अब पीएम की जनसभा बाँदा के कृषि विद्यालय प्रांगण में २५ अप्रैल को होगी। पहले यह रैली तिंदवारी इलाक़े में होनी थी किंतु बाद में इसे बाँदा, फ़तेहपुर और हमीरपुर संसदीय क्षेत्रों की सीमा वाले स्थल पर कराने का निर्णय हुआ। 

 इस रैली में तीनो संसदीय क्षेत्र के पार्टी प्रत्याशी और उनके समर्थक शिरकत करेंगे। इस चुनावी रैली में भारी-भरकम भीड़ का लक्ष्य भी तय हो गया है, जिसमें बाँदा के साथ-साथ फ़तेहपुर और हमीरपुर को भी भीड़ का लक्ष्य दिया गया हैं। यहाँ के भाजपाईयो की समस्या अब समर्थकों को ८५ किलोमीटर दूर ले जाने की है, पहले तिंदवारी में होनी थी, वहाँ तक फिर भी ग़नीमत थीं, फ़तेहपुर से तिंदवारी की दूरी ४५ किलोमीटर के क़रीब हैं जबकि बाँदा ८५ किलोमीटर के क़रीब है। ऐसे में हज़ारों समर्थकों के साथ चुनावी सफ़र किसी बड़ी समस्या से कम नहीं है।

 वैसे साध्वी निरंजन ज्योति ने यह जानते हुए कि इस चुनाव में यहाँ मोदी की जनसभा मिल पाना लगभग नामुमकिन है, बावजूद इसके साध्वी रितंभ्रा के माध्यम से स्वामी परमानन्द के रास्ते वीटो के प्रयास में है। साध्वी प्रत्येक वो प्रयास करने में जुटी है, जिससे किसी भी तरह विकल्प खुले और मोदी की फ़तेहपुर में जनसभा मिल जाये, जिसकी फ़िलहाल संभावनायें काफ़ी कम है किन्तु प्रयास करने में क्या जाता है।बताते चले कि भाजपा द्वारा फ़तेहपुर सीट से दोबारा प्रत्याशी बनाई गई साध्वी निरंजन ज्योति मौजूदा मोदी सरकार में मन्त्री होने के साथ-साथ पार्टी की स्टार प्रचारक भी है। इतना ही नहीं साध्वी निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर भी है किन्तु इस बार उनके समक्ष ऐसे चुनावी हालत बन गए है कि मोदी के फ़तेहपुर आये बग़ैर नैया पार लगना खाँसा मुश्किल लगता है। 

 जानकार भाजपाई भी मानते है कि २०१४ में फ़तेहपुर से सांसद बनने के बाद साध्वी ज़्यादातर ग़ायब रही और जनमानस की समस्याओ से उनका सरोकार न के बराबर रहा। ऐसे में जब साध्वी को फ़तेहपुर में मोदी की चुनावी रैली की भरसक आवश्यकता समझी जा रही थी तो फ़तेहपुर के बजाये बाँदा में जनसभा कराने के निर्णय का उन्हें कितना लाभ होगा यह तो समय बतायेगा लेकिन इतना तय है कि इस बार अकेले राष्ट्रवाद के भरोसे काम चलने वाला नहीं है! इसके लिये कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे मोदी के ना आने से उत्पन्न होने वाली कमी की भरपाई हो सके!

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