योगी तेरे राज में गौ वंश का ये हाल कही भूखो मर रही दवा बिना बेहाल

योगी तेरे राज में गौ वंश का ये हाल कही भूखो मर रही दवा बिना बेहाल

फतेहपुर न्यूज़

भारत सभी धर्मों का आदर करने वाला विविधताओं से भरा देश हमारे देश में धर्म के साथ साथ मानवता को प्रमुखता दी जाती है यहां पर पर पशु, पक्षी पेड़ पौधे सभी को विशेष स्थान देते हुए पूजा जाता है इन्हीं विविधताओं से भरे देश में गोवंश व उसकी रक्षा एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में सामने आती है तथा सरकारी इसके लिए समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य करती नजर आती है

Vo १- भारत में गोवंश की रक्षा के लिए वर्तमान सरकार के द्वारा विभिन्न जनपदों में गौशालाओं का निर्माण कराया गया उद्देश्य साफ था सड़क में आवारा घूम रहे गायों की रक्षा हो सके और गाय जो हिंदू धर्म में पूजनीय है उसको एक नियत आसरा मिल सके सरकार द्वारा किए गए कार्यों का बखान 2019 के आम चुनावों में भी खूब सुनने को मिला सरकारी तौर पर बनाई गई

इन गौशालाओं में गैर सरकारी संगठनों विभिन्न धर्म संप्रदाय के लोगों ने सोशल मीडिया पर तो गाय और गौशाला के साथ खूब सेल्फी पोस्ट की जिससे वह अपने आप को गौ रक्षक और सबसे बड़ा देशभक्त साबित कर सके बड़े-बड़े न्यूज़ चैनलों में गाय के नाम पर खूब सारी डिबेट हुई पर इन डिबेट्स का क्या नतीजा निकला आज तक आम जनता समझ नहीं पाई वह तो बस अपनी दो वक्त की रोजी रोटी के लिए एक बेहतर कल और अच्छे दिन अपनी पत्थराती आंखों से  ढूंढती रही

Vo 2.. गाय पर बातें तो बहुत हुई गौशालाओं का निर्माण हुआ इन्हीं गौशालाओं की वास्तविकता जानने के लिए हमारी टीम ने कूच किया फतेहपुर जनपद की जय भोले गौशाला चक़ हाता जहां के हालात और पशुओं की स्थिति देखकर मन अंदर से द्रवित हो उठा क्या यह वही गाय है जिनकी रक्षा का हवाला बड़े बड़े संगठन किया करते हैं

क्या सच में यह वह  गाय हैं जिस पर राजनीति करके जो मजहब के लोगों को आपस में बांटने की क्रूर राजनीति की जाती है गायों की ऐसी स्थिति देखकर रहा नहीं गया हमने वहां की स्थिति के बारे में वहां के चौकीदार से पूछा तो उसने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वह यहां बस चौकीदारी वह गायों के चारे के लिए नियुक्त किया गया है गायों के खानपान संबंधित जानकारी देते हुए उसने हमसे कहा गायों को खिलाने के लिए भूसे की व्यवस्था की जाती है

पर चुनी चोकर जैसी व्यवस्था मौजूद नहीं है नाही आला अधिकारियों द्वारा इस विषय पर कोई कार्यवाही की जाती है ना ही समय-समय पर मेडिकल की टीम सुचारू रूप से आकर बीमार गायों का निरीक्षण करती हैं 3 महीने से गौशाला की देखरेख कर रहे चौकीदार ने साफ कर दिया कि उन्हें उनकी गौशाला के डॉक्टर का नाम तक याद नहीं अब आप ही बताइए डॉक्टर साहब आएंगे तब तो उनका नाम याद होगा सत्ता के सुख में मगरूर  यह सरकार सरकार गाय और गोवंश के नाम पर केवल सियासत करती है या फिर सच में उसके अंदर गायों को लेकर श्रद्धा आदर की भावना है

सरकार व आला अधिकारियों की पोल तब खुली जब चौकीदार ने हमें बताया कि कोई भी अधिकारी यहां आने से कतराते हैं यहां तक की मर रहे जानवरों का नियत रूप से इलाज नहीं किया जाता ना ही उनके संसकार की कोई समुचित व्यवस्था की जाती है शासन-प्रशासन स्तर पर चुप्पी साधे हुए हैं अब यह देखने वाली बात होगी की सरकारें आला अधिकारी इन गौशालाओं पर केवल राजनीति करते हैं या फिर गायों के पुनरुत्थान व उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए इन गौशालाओं का निरीक्षण व कमियों की पूर्ति

सरकारी कोई भी आए गोवंश की रक्षा हो और गाय को केवल किताबों में मां का दर्जा ना दिया जाए बल्कि उसकी अहमियत व इज्जत सभी लोग करें केवल मजहबी उन्माद के लिए गायों को मुद्दा ना बनाया जाए क्योंकि मां के लिए बेटा बेटा होता है क्योंकि मां किसी एक धर्म कि नहीं बल्कि मां सभी की होती है यही भावनाओं को समझते हुए सरकारों को और हमारे आला अधिकारियों को इन छोटी-छोटी बातों को समझना होगा तभी हम सशक्त भारत की कल्पना कर सकते हैं और अपने देश में बापू के सपने और को पूरा कर आपसी उन्माद की राजनीति को दूर करें

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