सत्य साबित हो रहा है मेरा लेख एक इंदिरा गांधी थीं , एक बाल ठाकरे। 

सत्य साबित हो रहा है मेरा लेख एक इंदिरा गांधी थीं , एक बाल ठाकरे। 

फ़तेहपुर , एक राजीव गांधी थे और एक उद्धव राज ठाकरे हैं। एक राहुल गांधी हैं , एक आदित्य राज ठाकरे हैं। इन दोनों परिवारों का राजनीतिक क्षरण देखने लायक है। जब कि एक समय दोनों ही बहुत ताकतवर थे। राजनीति में परिवारवाद की सब से मज़बूत धुरी। पर अब इन दोनों ही राजनीतिक परिवारों के उत्तराधिकारियों को सत्ता की अति महत्वाकांक्षा में बांस के खूंटे पर बैठने की कुलति लग गई है। 

राहुल गांधी तो बांस के खूंटे पर बैठते-बैठते इतने गलगल हो गए कि पूछिए मत।  अब वह कब अवकाश पर जाते हैं , कब लौट आते हैं। 

लोग जानना भी नहीं चाहते। अब सत्ता की महत्वाकांक्षा में बांस के खूंटे पर बैठने को आतुर उद्धव ठाकरे अपने बेटे समेत पोरस के हाथी बन कर खुद ही को रौंदने को आतुर हैं। 

भाजपा अगर संयम से काम ले सके तो ज़रा थम जाए और कर्नाटक का प्रयोग महाराष्ट्र में भी हो जाने दे। तय मानिए ऐसा होते ही आदित्य ठाकरे मुख्य मंत्री तो बन जाएंगे लेकिन भस्मासुर बन कर शिवसेना को समाप्त भी करने का अनुष्ठान भी संपन्न कर लेंगे। लेकिन दिक्क्त यह है कि भाजपा भी सत्ता की बीमारी में आकंठ डूब गई है। 

अगर भाजपा लंबी रेस का सोच कर इस बार शिव सेना को बांस के खूटे पर बिठा दे , उस की इच्छा के मुताबिक तो तय मानिए 2020 की राजनीति की धरती और आकाश बदल जाएगा। 

क्षेत्रीय दलों की ब्लैकमेलिंग पर पावरब्रेक लग जाएगा। लिख कर रख लीजिए ! 

27 अक्टूबर को लिखा गया मेरा लेख महाराष्ट्र की घटना को लेकर आज सत्य साबित होता हुआ दिख रहा है ।

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