रामलीला के मंच पर कवियों ने समा बांधा

रामलीला के मंच पर कवियों ने समा बांधा

किशनपुर/फतेहपुर- 

किशनपुर कस्बे में चल रही रामलीला में आज अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें देश के जाने-माने कवि आए और उन्होंने अपनी संरचनाओं को सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 कार्यक्रम की मुख्यअतिथि क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती कृष्णा पासवान ने की वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता खागा चेयरमैन गीता सिंह ने की कार्यक्रम संयोजक किशनपुर व्यापार मंडल के महामंत्री कुंवारे सिंह ने की और कार्यक्रम के प्रबंधक रामलीला अध्यक्ष राजेंद्र कुमार मिश्रा ने की पासवान ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की और उनका स्वागत असोथर थाना अध्यक्ष हेमराज सरोज ने किया।

इसी तरह क्रम सा लोगों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और मीरा तिवारी ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की इसके बाद लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई।

समीर शुक्ला ने कहा बड़ी खुश है महतारी बिटिया हमार पढ़े जाति ही या नहीं जानते हैं कि मिस कॉल मार मार लोफरन से बतिया ही वही अंसार हाशमी ने कहा छत टपकती हो तो बरसात बुरी लगती है।कोई बीमार हो तो रात बुरी लगती है।

जिसमे ऐ दोस्तो एहसान की बू आती हो।सच पूछो तो वो सौगात बुरी लगती है और नीरज पांडे ने कहा

धरती ने कहा गंगा जी का जल पवित्र है।आकाश ने कहा मेरा बादल पवित्र है।तभी एक बालक ने कहा मेरे माँ का आँचल पवित्र है।

इसी तरह सभी कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पढ़ी इलाहाबाद के कवि अखिलेश द्विवेदी ने लोगों के बीच समां बांधे रखा और लोगों को हंसाते रहे उन्होंने कहा कि जो है पढ़े लिखे वह सब हैं।

संतरी बने जिनको जेलों में होना तब विधायक मंत्री बने विवाह करके जिसने अपनी पत्नी छोड़ दी वह हमारे देश में प्रधानमंत्री बने उन्होंने लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराई लोग हंस हंस कर लोटपोट हो गए और लोगों ने कहा कि इतने वर्षों से कवि सम्मेलन हो रहा है ऐसा बंधा हुआ कवि सम्मेलन हमने पहली बार सुना है कि लोग खेलने के लिए भी तैयार नहीं थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही गीता सिंह ने कहा कि इतना समय बांधने वाला कवि सम्मेलन काफी समय बाद देखने को मिला है।

उन्होंने कहा कि यह सब फाल्गुन की बाबा की महिमा है और घायल के बारे में उन्होंने कहा कि घायल को देखकर कुछ समय के लिए तो दिल की धड़कन रुक सी जाती है यह सब बाबा का ही प्रताप है अब मैं यहीं से अपनी वाणी को विराम देती हूं। 

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