कान फिल्म समारोह: भारतीय दल ने की कई देशों के फिल्म आयुक्तों से मुलाकात

कान फिल्म समारोह: भारतीय दल ने की कई देशों के फिल्म आयुक्तों से मुलाकात

कान फिल्म फेस्टीवल में सूचना प्रसारण सचिव की अगुवाई में भारतीय दल ने की कई देशों के फिल्म आयुक्तों से मुलाकात, दुनिया को दी गयी भारत में शूटिंग की प्रक्रिया आसान बनाने से जुडी जानकारी, समारोह में झारखंड की फिल्म लोहरदगा की स्क्रीनिंग.

 

72वें कान फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत हो चुकी है वहां दुनिया भर के तमाम सितारे अपना जलवा विखेर रहे हैं। तमाम देशों की फिल्में कान फिल्म फेस्टीवल में दिखाई  जा रही हैं। गुरुवार को सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने  कान फिल्म समारोह में भाग लेने वाले देशों के फिल्म आयुक्तों से मिला। बैठक के दौरान दुनिया के तमाम देशों को ये बताया गया कि कैसे भारत फिल्मों की शूटिग के लिए एक आकर्षक स्थान बन गया है।

इन देशों को ये भी जानकारी दी गयी कि कैसे फिल्म सुविधा कार्यालय के माध्यम से भारत में शूटिंग के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उठाए गए हैं। फिल्म सुविधा कार्यालय फिल्म निर्माताओं के लिए एकल खिड़की मंजूरी की सुविधा प्रदान करता है। फिल्म पाइरेसी से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी चर्चा की गई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत में मौजूद कुशल पेशेवरों और तकनीशियनों की भरपूर प्रतिभा के उपयोग के अवसरों पर प्रकाश डाला। साथ ही भारत के एक प्रमुख पोस्ट प्रोडक्शन हब के रूप में उभरने की संभावना भी पेश की गयी।

चर्चा के दौरान अमित खरे ने द्विपक्षीय सह-उत्पादन समझौतों के तहत विभिन्न देशों के फिल्म निर्माताओं के एक साथ आने की संभावना के बारे में बात की। इसके जरिए भारत को विश्व स्तर की अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों की शूटिंग के लिए हब बनाया जा सकेगा जिससे नया बाजार और व्यापक दर्शक वर्ग तैयार होगा। महोत्सव में इस बार भले ही कोई भारतीय फिल्म प्रतियोगिता खंड में नहीं है लेकिन झारखंड में बनी दो फिल्मों की धमक फिल्म फेस्टिवल में सुनी जा रही है।  

गुरुवार को फिल्म महोत्सव में नागपुरी भाषा में बनी फिल्म फुलमनिया और हिन्दी में बनी लोहरदगा की स्क्रीनिंग हुई। इस मौके पर फिल्म की टीम के लोग मौजूद थे। लोहरदगा बेरोजगार युवकों के नक्सली बनने की कहानी पर आधारित है। 20 साल का लड़का मनु सेना में जाना चाहता है, लेकिन एक एजेंट के चक्कर मे फंसकर नक्सली बन जाता है। शर्त होती है कि नक्सली बनकर समर्पण करने के बाद सरकार की पॉलिसी के मुताबिक नौकरी पक्की। लेकिन उसके साथ ऐसा कुछ नहीं होता। 

इसके अलावा नागपुरी फिल्म फुलमनिया भी फिल्म महोत्सव में अपना जलवा बिखेर रही है। फुलमनिया में झारखंड की डायन बिसाही प्रथा को दिखाया गया है। झारखंड के ज्वलंत मुद्दे पर बनी दोनों फिल्में बॉलीवुड इंडस्ट्री को रास्ता दिखायेंगी कि कम बजट और सीमित संसाधन में भी बेहतरीन फिल्में बनायी जा सकती हैं।

सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने बुधवार को क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों की अहमियत पर जोर दिया था और गुरुवार को झारखंड की दो फिल्मों की स्क्रीनिंग उसी का हिस्सा है। 

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