गांधी को ही ठीक से नही जानते .....

गांधी को ही ठीक से नही जानते .....

रिपोर्ट:-आनंद वेदान्ती त्रिपाठी अयोध्या

गांधीजी के साथ अजीब विडम्बना यह रही है कि जिस देश ने इन्हें बापू कहा, उसी अपने देश ने इन्हें सबसे कम पढा है इनके बारे में सबसे कम जानना चाहा।

हैरी पॉटर और चेतन भगत को दिन रात एक करके पढ़ने वाली पीढ़ी ने कभी गांधी जी के लिये समय ही नही निकाला और गांधी जी जैसे और व्यक्तित्वों के बारे में उनकी जानकारी केवल पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे से सुने किस्से-कहानियों के सहारे ही हैं और इनकी धारणाएं भी इन्ही पर आधारित हैं।

हिंदुस्तान में लगभग हर साक्षर, पढा लिखा टाइप आदमी गांधी जी को पाकिस्तान के बनने का शाश्वत कारण मानता है और यह अनैतिहासिक ज्ञान खूब प्रचलन में हैं। यह अलग बात है कि कुछ गांधी के प्रति श्रद्धा भी रखते हैं तो कुछ नफरत।

अगर इस देश ने जितना मार्क्स को पढा, समझा और अपने में गूँथा-ठूँसा, उतना ही गाँधीजी को पढ़ा-समझा होता तो शायद पीढ़ियों का सबक कुछ और होता..... गांधी के बारे में ठीक मेरी यही राय है। और यह वो पुस्तक है जो मैंने सबसे पहले पढ़ी थी और शायद पढ़नी भी चाहिए ।

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