मुगल काल में करनैलगंज में स्थापित किये गये थे 18 देवी स्थान

मुगल काल में करनैलगंज में स्थापित किये गये थे 18 देवी स्थान

धर्म के साथ राष्ट्र प्रेम की भावना भी जुड़ी थी स्थापना में  

 

आज भी मौजूद हैं उस समय के अधिकांश देवी स्थान 

अतीक राईन के साथ रितेश गुप्ता की रिपोर्ट

करनैलगंज,गोण्डा-

 मुगल काल में अपने अस्तित्व को बचाये रखने हेतु तथा शक्ति प्राप्त करने के लिए हिंदुओं ने करनैलगंज नगर की चौहद्दी के विभिन्न किनारों व नगर के मध्य में 18 देवी स्थानों की स्थापना की थी जिनमें से अधिकांश में आज भी विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है। ये स्थान दुश्मनों से अपनी सीमा की रक्षा करने का भी एक बड़ा हथियार थे। 

    मुगल काल में जब औरंगजेब हिंदुओं को जबरन मुसलमान बना रहा था उस समय अपने धर्म की रक्षा व अपने अस्तित्व को बचाये रखने और इसके लिए शक्ति प्राप्त करने हेतु करनैलगंज और आसपास के हिंदुओं ने करनैलगंज नगर की चौहद्दी के चारों ओर तथा नगर के मध्य में कुल मिलाकर 18 देवी स्थानों की स्थापना की थी।

इनमें से कई देवी स्थान तो अब गायब हो चुके हैं किन्तु अधिकांश देवी स्थानों में आज भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा अर्चना करते हैं। विशेषकर नवरात्रि के अवसर पर इन स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है। नगर के कुछ बुजुर्गों के अनुसार पूर्व का सिकरौरा जो ब्रिटिश काल में कमिश्नरी हुआ करता था, आज करनैलगंज नगर के सकरौरा मोहल्ले के नाम से जाना जाता है। उस समय करनैलगंज का अस्तित्व ही नहीं था।

सकरौरा में वर्तमान गायत्री मंदिर के सामने स्थित दुर्गा मंदिर, शीतला माई थान, कोटही माई थान, धमसा माई थान आज भी मौजूद हैं। इसी प्रकार लखनऊ रोड पर ज्वाला माई थान, रेलवे स्टेशन के पास सर्वामाई थान, बालूगंज  मोहल्ले में मंगली माता, नगर पालिका परिषद कार्यालय के पीछे फूलमती माता, गाड़ी बाजार में पुराने स्टेट बैंक के पीछे जंगली माता, गांधी नगर में शीतला माता व काली मंदिर, ठठराही बाजार में काली मंदिर आदि स्थान उसी समय की देन हैं।

शेष कुछ स्थानों के बारे में तो अब पता भी नहीं चल पा रहा है। बुजुर्गों के अनुसार प्रत्येक देवी स्थान पर नीम का पेड़ भी लगवाया गया था जिनमें से कालान्तर में तमाम पेड़ गिर गये। कहीं दोबारा नीम के पेड़ लगाये गये और कहीं नहीं भी लगाये गये। ऐसे तमाम देवी स्थानों के पास कुंए भी बनाये गये थे जहां श्रद्धालु स्नान करके देवी मां की पूजा अर्चना किया करते थे। मौजूदा देवी स्थानों में लगभग सभी पर वर्तमान समय में भी विधिवत पूजा अर्चना की जाती है

बुजुर्गों के अनुसार दूसरे राज्यों द्वारा इस राज्य पर हमला करते समय उन्हें इन देवी स्थानों पर भी कब्जा करना पड़ता और उस समय के धार्मिक लोग अपने देवी स्थान को अपना जीवन रहते कभी भी दुश्मनों के हाथ में न जाने देते। इस प्रकार इन स्थानों की स्थापना में धार्मिक भावना के साथ ही राष्ट्रीय भावना का भी समावेश था।

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