प्रधानमंत्री आवास में हुई धांधलेबाजी

प्रधानमंत्री आवास में हुई धांधलेबाजी

मृतात्माओं के नाम पर भी हो रहा किश्तों का भुगतान

आवास किसी और का भुगतान किसी - किसी और को करके भ्रष्टाचार को दे रहे अंजाम

तरबगंज,गोण्डा-

तरबगंज विकासखंड के  नरायनपुर गांव में आश्चर्यचकित करने वाला मामला सामने आया है।जहां पर मृतका की आवास आईडी पर गांव की ही दूसरी महिला के खाते में ब्लाक के कर्मचारियों की मिली भगत से क्रमशः तीनो किश्तों का भुगतान कर दिया गया है।

ग्रामसभा के मजरा कुड़वा के रहने वाले राम सँवारे ने जब देखा  कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी आवास विहीनो को आवास दिया जा रहा लेकिन मैं वंचित हूँ तो अपनी फरियाद लेकर एसडीएम से कहने तहसील मुख्यालय पहुंच गया।

वहां ग्रामसभा के ही रहने वाले अधिवक्ता अभिमन्यु शुक्ला से अपनी समस्या बताते हुए एसडीएम से मिलवाने की बात की।अभिमन्यु ने पहले ऑनलाइन आवास सूची में जांच की तो पता चला रामसंवारे की माता राजपती पत्नी मोहनलाल के नाम से वर्ष 2017-18 में आवास दिया जा चुका है।

जबकि राजपती की मृत्यु 4-5 साल पहले ही हो चुकी थी।पीड़ित रामसंवारे ने इसकी शिकायत जब जनसुनवाई पर की तो जांच हुई।

जांच में पता चला राजपती के आवास आईडी यूपी3327098 पर आवास दिया जा चुका है।आवास के तीनों किश्तों का भुगतान भी इलाहाबाद बैंक की शाखा तरबगंज में खाता संख्या 50357082588 पर दूसरी महिला सोनापति पत्नी मोहनलाल को किया जा चुका है।

तीनो किश्तों का भुगतान क्रमशः 27 अप्रैल 2017,25 अक्टूबर 2017 व 04 मार्च 2018 को किया गया है।थाने की पुलिस द्वारा जांच रिपोर्ट में यह लिखकर कि ऐसा गलती से हो गया है व मृतका के बेटे रामसंवारे को आवास की रकम वापस कर दी जाएगी यह कहकर फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी गयी है।

जबकि ठीक ऐसा ही मामला नरायनपुर ग्रामसभा में ही कुछ दिनों पहले हुआ था।ग्रामसभा के ही मजरा गांधी चबूतरा की महिला कौशल्या पत्नी धनवंत जब आवास के लिए भटकते हुए जिम्मेदारों से फरियाद करने गयी तो उसे बताया गया तुमको आवास मिल चुका है।

महिला हताश होते हुए जब इसकी शिकायत जनसुनवाई पर की तो पता चला कौशल्या पत्नी धनवंत के आवास को ग्रामसभा के ही कौशल्या पत्नी रतन सिंह को दे दिया गया।

कौशल्या पत्नी धनवंत जिसकी आवास आईडी यूपी3531179 है उस पर आवास की तीनों किश्त  का भुगतान किया जा चुका है।लेकिन जब जिम्मेदार लोगों ने अपने को फंसता देखा तो आनन फानन में पीड़ित महिला कौशल्या पत्नी धनवंत के खाते में कौशल्या पत्नी रतन सिंह के खाते से 1 लाख बीस हजार रुपये एकमुश्त ट्रांसफर करवा दिया।

हैरत की बात तो ये रही कि कौशल्या पत्नी रतन सिंह को भी आवास मिल चुका है व दोबारा भी उसके खाते में आवास की किश्त जारी कर दी गयी।जबकि अभी तक पीड़ित महिला के घर की नींव तक नही पड़ी है।

चौंकाने वाली प्रमुख बातें

जब राजपती की मृत्यु लगभग चार वर्ष पहले ही हो चुकी थी तो चार साल बाद आवास के किश्त का भुगतान कैसे व किसे दिया जा रहा है इसकी जांच जिम्मेदारों द्वारा क्यों नही की गई।

सोनापति कौन है व जब उसका नाम आवास सूची में है ही नही तो फिर किश्तों का भुगतान उसके खाते में कैसे हो गया।

अगर पैसा गलती से चला गया तो पहली किश्त के बाद दूसरी व तीसरी किश्त भी बिना जांच के कैसे रिलीज कर दीं गयी।

किश्त जारी करने के लिए जियो टैगिंग के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्ट मौकेपर जाकर भेजना होता है, जब महिला मृत हो चुकी थी जियो टैगिंग में किसकी फोटो अपलोड की गई व किश्त भी जारी की गई।

एक ही ग्रामसभा में बार बार आवास प्रकरण का मामला क्यों आ रहा है।क्या जिम्मेदारों द्वारा इतना कह देना कि गलती से हो गया व रुपयों की भरपाई कर देना  ही काफी है या ऐसे खेल खेलने वालों के लिए और भी कोई दंड है।

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