राष्ट्र के निर्माण में माँ की भूमिका अद्वितीय, जो माँ का सम्मान नहीं रख सकता, वह राष्ट्र का नहीं हो सकता

राष्ट्र के निर्माण में माँ की भूमिका अद्वितीय, जो माँ का सम्मान नहीं रख सकता, वह राष्ट्र का नहीं हो सकता

हमीरपुर

सुमेरपुर में आर्य समाज चौथे दिन बोलते हुए दर्शन शास्त्री वेद प्रकाश श्रोत्रिय ने कहा कि मां अपना सर्वस्व न्योछावर करने बीर बालक का निर्माण करती है और अपने राष्ट्र का सम्मान सुरक्षित रखती है। राष्ट्र के निर्माण में माताओं की भूमिका अद्वितीय है।

जो व्यक्ति अपनी मां का सम्मान सुरक्षित नहीं रह सकता वह राष्ट्र का नहीं हो सकता है।उन्होने कहा कि, मा वह जो मान रखती है। मां संतान को बुलाने के लिए अरमान लगती है। गर्भ में रखती हुई उसका परिमाण रखती है। अपना सर्वस्व न्योछावर कर उसका निर्माण करती है।

निर्माण  से अपने देश का का सम्मान रखती है। उन्होंने कहा कि पहले कि लोग पढ़े लिखे नहीं थे फिर भी उनके  अच्छी संताने  पैदा होती थी। उसका कारण यही है कि उनकी आत्मा पवित्र रहती थी। देश  समाज की आन बान शान के लिए उनकी भावना जुड़ी रहती थी।

आजकल पढ़े लिखे लोगों की संताने भी किसी काम की नहीं रहती। उन्होंने कहा कि वेद  पढ़ने वाला व्यक्ति कभी कायर नहीं हो सकता। अतः हमे संस्कार युक्त होकर हमें देश समाज की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। सायं काल की सभा में, कल्याण देव वेदी  ने भजनों के माध्यम से स्वामी दयानंद द्वारा देश समाज के लिए किए गए  योगदान प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में दूर  दूर से पधारे विद्वानों ने  अपने प्रवचन के  माध्यम से लोगों को पर्यावरण की रक्षा के लिए यज्ञ करने, वेद  के अनुसार जीवन जीने का संदेश दिया। कार्यक्रम में  अच्छी भूमिका  निभाने वाले युवाओं को प्रतीक चिन्ह  देकर उनका उत्साह वर्धन किया गया।

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