पर्चा वितरण खिड़की पर उमड़े मरीज व तीमारदार

पर्चा वितरण खिड़की पर उमड़े मरीज व तीमारदार

मौदहा(हमीरपुर)ः- कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ केंद्र्र में भारी आवव्यस्थाओं के चलते यहां प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों मरीजों को दर दर भटकने के बावजूद भी चिकित्सकों के अभाव में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। जिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी किया जाता है उन मरीजो को बाहर से दवा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।आज अस्पताल में वायरल पीड़ित सात सौ मरीजों को देखने के लिए मात्र दो चिकित्सक ही मौजूद थे। अस्पताल के रोगी पंजीयन केंद्र में मरीजों का रेला देखने को मिला है। धक्का मुक्की व घण्टों इंतेजार के बाद इनके पर्चे बन पा रहे थे। जबकि अस्पताल के अधीक्षक ड़ाॅ अनिल सचान के मुख्यालय हमीरपुर जाने पर यहां मात्र दो ही चिकित्सक ड़ाॅ रजत रंजन तिवारी व आयुष के आर्युवेदिक यूनानी चिकित्सक ड़ाॅ अस्लम अपने काउन्टरो  पर मौजूद थे। इन दोनो चिकित्सकों को वायरल पीड़ितों को खासी मसक्कत के बाद ड़ाॅक्टर तक पहुंचने का मौका मिल रहा था। उमस भरी गर्मी और खचा खच भीड़ के बीच वृद्ध व महिला तथा रोग से पीड़ित मासूम बच्चों का और बुरा हाल था। 

अस्पताल में जिन रोगियांे को भर्ती किया गया है उनमें भमौरा गांव निवासी मंगू 60 पुत्र मेड़ेलाल ने बताया कि वायरल से पीड़ित होने पर उसे भर्ती तो कर लिया लेकिन अस्पताल से सरकारी दवायंे कम और बाहर से दवाओं के लिए पर्चा लिख दिया गया जो बाहर से खरीदी गयी। वहीं फत्तेपुर की जाहरी 65 पत्नी पंजाबी की बहु रेशमा ने अस्पताल से लिखी गयी बाहर से लाने वाली दवाआंे का पर्चा दिखाते हुए बताया कि उसकी दवायंे सात सौ में मिली लेकिन उसके पास इतने पैसे ही नहीं थे। जिससे उसने आधी ही दवा खरीद सकी। वहीं पाटनपुर के संजय 28 पुत्र राकेश ने बताया कि वह लगातार वायरल से पीड़ित होने के बावजूद वह दो घण्टे से इलाज के इंतेजार में ही बैठा रहा तब कहीं उसका नम्बर आया। इसी तरह अन्य मरीजों की भी यही दास्ता थी वहीं मरीजों के बेड़ में चादर ही नहीं थे।  

कस्बे के इस सरकारी अस्पताल की कभी भी ऐसी स्थिति नहीं रही जैसे की इस समय है। आये दिन जिला मुख्यालय में होने वाली बैठकों में अस्पताल के अधीक्षक ड़ाॅ अनिल सचान के जाने से उनसे मोबाइल पर भी बात नहीं हो सकी। हालाकि इससे पूर्व अस्पताल के हालात पर उन्होने बताया था कि चिकित्सकांे का भारी अभाव है जिन चिकित्सकों का यहां से स्थानान्तरण हो चुका है उनके स्थान पर दूसरे चिकित्सक नहीं आ सके। कुल मिलाकर शासन व जिला प्रशासन जब तक इस बड़े अस्पताल की तरफ तवज्जो नहीं देते तब तक यहां आने वाले 600 से 700 के बीच रोगियों का कैसे सही इलाज होना सम्भव है। 

 

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