हमीरपुर के नगर पंचायत सरीला में लिपिक रहे बाप बेटे पर करोड़ों के  गबन का लगा आरोप

हमीरपुर के नगर पंचायत सरीला में लिपिक रहे बाप बेटे पर करोड़ों के  गबन का लगा आरोप

ब्यूरो रिपोर्ट- लखनऊ 

 शासन नियम विरुद्ध करोड़ों रुपए की हुई हेराफेरी

लखनऊ/ योगी भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का सपना सरकारी जुमला बनकर रह गया है प्रदेश में भ्रष्टाचार ज्यादातर पहले दर्जे के कर्मचारी से लेकर चौथे दर्जे के कर्मचारी तक सभी खुलकर लिप्त नजर आ रहे हैं.

मतलब साफ है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावे करने वाली सरकार जमीनी स्तर पर फेल नजर आते दिख रही है. ऐसे में प्रदेश के विकास का सपना कहीं ना कहीं टूटकर बिखरता दिख रहा है.

ऐसा ही मामला हमीरपुर जिले के नगर पंचायत सरीला से आ रही है जिसमें लिपिक रहे बाप और बेटे पर सरकार के करोड़ो रुपए  गबन करने का आरोप लग रहा है.

जी हां, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गंगा प्रसाद सरीला नगर पंचायत में लिपिक के तौर पर कार्यरत थे जो अपने कारनामों को छुपाने के लिए अपने पुत्र राघवेंद्र सिंह को बिना शासन के मंजूरी के बतौर लिपिक बैठाकर 14000000 रुपए की धनराशि फर्जी बिल वाउचर लगवा कर गबन कर चुके हैं. 

स्थानीय लोगों की मानें तो पूर्व पंचवर्षीय शासनकाल में लिपिक राघवेंद्र सिंह व इनके पिता गंगा प्रसाद द्वारा शासन के करोड़ों रुपयों का बंदरबांट अधिशासी अधिकारी अध्यक्ष एवं इनके चहेते ठेकेदारों के माध्यम से हुआ है मामला जब तूल पकड़ा तो डीएम द्वारा टीम गठित कर जांच करवाई गई लेकिन स्थानीय लोग जांच टीम पर दोषियों को बचाने में मेहरबान होते देख  आक्रोशित हो गई.

वही अधिकारी दोषियों को जांच में बचाने में लग गए स्थानीय जनता 7 माह पूर्व हुए जांच से संतुष्ट नजर नहीं आई जनता करोड़ों रुपए के लूट खसोट के लिए अधिकारियों पर जांच के दौरान पैसे लेने का भी आरोप लगा रही है.

बैंक स्टेटमेंट से भ्रष्टाचार का लगा पता 

गबन का पता तब चला जब भारतीय स्टेट बैंक शाखा राठ का स्टेटमेंट चेक हुआ इस बात के पता चलते ही पूरे नगर पंचायत में घोटाले की चर्चा आग की तरह फैल गई. स्थानीय लोगों ने बाप-बेटे पर कई वर्षों से बंदरबांट का आरोप  लगाते हुए कहा कि ऊंची पहुंच और दबंगई के बलबूते पर आज तक इन लोगों के खिलाफ कोई भी सही तरीके से जांच नहीं हो सकी है

और इतना ही नहीं बल्कि स्टेटमेंट में ज्योति कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स के नाम दिनांक 4 जून 2015 से 9 जून 2017 तक एसबीआई के राठ शाखा से 19204400 के भुगतान की बात भी पता लगी जो कि इनके संबंधी या जानकार लोगों के कंपनी बताई जा रही है.

 आरटीआई से प्राप्त जानकारी और तथ्य भी गंगा प्रसाद व पुत्र राघवेंद्र सिंह पर अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर शासन के नियमों का उल्लंघन कर करोड़ों के घोटाले की तरफ इशारा कर रहा है कई जगह तो कार्यस्थल पर कराए गए कार्यों के सापेक्ष अधिक भुगतान भी कराई गई है

स्थानीय जनता तो योगी सरकार से सिर्फ राज्य स्तरीय जांच की मांग कर रही है ताकि हमीरपुर जिले की जनता दूध का दूध और पानी का पानी  देख सके.

अब देखना यह होगा कि क्या योगी सरकार इन दबंगों के खिलाफ जांच के आदेश देती है या भ्रष्टाचार का करोड़ों रुपए का खेल यूं ही चलता रहेगा. 

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