एसएनसीयू में मिला अंकिता की संतान को जीवन

एसएनसीयू में मिला अंकिता की संतान को जीवन
  • ब्लड ट्रांसफ्यूजन कर बचाई गई नवजात बच्ची की जान 
  • बेहद गंभीर हालत में 3 सितंबर को कराया था वार्ड में भर्ती

हमीरपुर। 09 सितंबर, 2019 13 साल से अपने दूसरे बच्चे की किलकारियां सुनने को तरस रही अंकिता और पंकज द्वेदी की मुराद तो पूरी हुई, मगर नवजात बच्ची की जिंदगी पर खतरा मंडराने लगा। जन्म के 10 घंटे के अंदर ही नवजात का हीमोग्लोबिन आधा रह गया। बच्ची को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों के अथक प्रयास के बाद इस नवजात को दूसरी जिंदगी मिल गई। अब बच्ची स्वस्थ है। परिजन भी एसएनसीयू टीम के प्रयास के कायल हो गए।

मुख्यालय से 30 किमी दूर बिवांर कस्बा निवासी पंकज द्विवेदी की कस्बे में बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान है। 13 साल पूर्व उनकी पत्नी अंकिता ने एक बेटी को जन्म दिया था। लेकिन इसके बाद उनका आंगन दूसरी संतान की किलकारियां सुनने को तरस गया। अंकिता बताती हैं कि इस दौरान तीन बार उनका गर्भपात हुआ। यह बड़ा दु:खद पल था। किसी तरह वह और उनके पति इस पल से बाहर आए। लेकिन तकलीफ तब ज्यादा हुई जब उनकी दो और बेटियां जन्म तुरंत बाद दुनिया से चली गई।

अंकिता और पंकज दोनों इस सदमे से टूट गए थे। लेकिन भगवान ने फिर से उनकी सुन ली। अंकिता फिर से गर्भवती हुई। पति ने अपने कामकाज के साथ-साथ पत्नी का भी खूब ख्याल रखा। समय-समय पर डॉक्टरों से परामर्श भी लेते रहे। 2 सितंबर की रात 10.10 बजे अंकिता ने बेटी को जन्म दिया। फिर से परिवार में खुशियां लौटी। लेकिन सुबह होते-होते नवजात की हालत बिगड़ गई। जिससे दंपति के ज़हनमें फिर से पुरानी यादें हिलोरने मारने लगी। बच्ची को तत्काल एसएनसीयू (सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती किया गया।
एसएनसीयू के प्रभारी डॉ.सुमित सचान ने बताया कि इस बच्ची का जन्म के समय हीमोग्लोबिन 19 ग्राम था, लेकिन 10 घंटे के अंदर ही हीमोग्लोबिन 7.2 ग्राम पर पहुंच गया।

बच्ची का पीलिया भी बढ़कर 10 मिलीग्राम पहुंच गया। स्थितियां बहुत कठिन थी। इसके बाद उन्होंने और उनकी टीम ने बच्ची का उपचार शुरू किया। सबसे पहले ब्लड का इंतजाम कराया गया और बच्ची का ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया। इसके बाद बच्ची की सघन निगरानी शुरू की गई। 24 घंटे से ज्यादा समय गुजरने के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार होना शुरू हुआ। 6 दिनों से एसएनसीयू में भर्ती अंकिता की बच्ची अब खतरे से बाहर है। दंपति भी डॉक्टरों के इस प्रयास का कायल हो गया है।

एंटी डी का इंजेक्शन न लगना हो सकता है कारण  
इस संबंध में डॉ.सुमित सचान बताते हैं कि 13 साल पूर्व जब अंकिता पहली बार मां बनी थी, तब उनके और नवजात बच्ची का ब्लड ग्रुप अलग-अलग था। इस स्थिति में मां को एंटी डी का इंजेक्शन लगाया जाता है। यह इंजेक्शन अगर नहीं लगता है तो मां को दूसरी बार गर्भधारण करने में ऐसी ही दिक्कतों से गुजरना पड़ता है। या तो गर्भपात हो जाता है या फिर जन्म के कुछ ही समय के भीतर नवजात की मौत हो जाती है।


 

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