चुनावी हारजीत पर अटकलें लगाना शुरू 

चुनावी हारजीत पर अटकलें लगाना शुरू 

मौदहा(हमीरपुर)

-विधान सभा उप चुनाव में पूरे दिन बारिश होने से जहां मतदान प्रतिशत में खासी कमी आई। वहीं परम्परागत पार्टियों से जुड़े मतदाताओ के अलावा बिरादरीवाद भी इस चुनाव में हाबी रहा है। जिससे अब पार्टी से जुड़े लोगों के अलावा आम लोग चुनावी हारजीत पर अटकलें लगाना शुरू किये हैं। कुछ लोग तो इस पर सट्टे भी लगा रहे हैं। मुख्य लड़ाई भाजपा व सपा के बीच होने की चर्चा आम है। विधान सभा उप चुनाव में मुख्य रूप से भाजपा के युवराज सिंह व कांग्रेस के हरदीपक निषाद एक ही गांव यहां इचौली के मूल निवासी हैं।

जहां इस गांव में कल हुए मतदान में बारिश के बावजूद भी खासा जोश मतदाताओं में दिखाई दिया और इस गांव में 52 से 53 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं सपा के डॉ मनोज प्रजापति जो यहां के पौथिया गांव निवासी वहीं बसपा के नौशाद अली(कन्नौज) बाहरी निवासी होने के वजह से वह यहां मतदान तो नहीं कर सके लेकिन इस दल से परम्परागत जुड़े दलित मतदाताओं में विशेषकर अहिरवार बिरादरी का खासा समर्थन मिला। हालाकि प्रत्याशी की खुद की बिरादरी ने इन्हें निकट से नहीं अपनाया। वहीं निषाद बिरादरी जो बीते चुनावों में भाजपा की रीड़ की हड्डी बनी थी इस बिरादरी का रूझान भी अपनी बिरादरी के कांग्रेस प्रत्याशी हरदीपक निषाद की ओर कल हुए मतदान के समय देखने को मिला।

वहीं सपा से जुड़े परम्परागत यादव व पिछड़े वर्ग के कुछ अन्य बिरादरियां के अलावा अल्पसंख्यक मतदाताओं का भी अधिकांश रूझान सपा प्रत्याशी को मतदान के दौरान ज्यादातर पोलिंग बूथों में देखा गया। इसी तरह भाजपा से जुड़े पार्टी के लोगों के अलावा प्रत्याशी के बिरादरी के लोग भी जी जान से अपने दल के समर्थन में लगे देखे गये। खास बात यह थी कि इस बार अल्पसंख्यक समुदाय के बीच भाजपा के कार्यकर्ताओं ने नहीं बल्कि अल्प संख्यक समुदाय के लोगों ने ही भाजपा के बस्ते लगाये और प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए भी प्रयासरत रहे हैं। इस चुनाव में बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी प्रत्याशी ने अपनी बिरादरी में खासा सेंदमारी की है। यह कल मतदान के दिन देखने को मिला है। इस चुनाव का मतदान तो सम्पन्न हो गया लेकिन अब हार जीत की अटकलें तेज हो गयीं। ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्र तक कल मतदान के बाद से हार जीत के आंकड़े बाजी की गणित में लगा हुआ है। जबकि इसका फैसला 27 सितम्बर को मतगणना के बाद होगा। वहीं पार्टी प्रत्याशी व उनकी पार्टियों के नेता भी मतदान समीक्षा के साथ ही अब हार जीत का अंतर भी कम बताने लगे हैं

जहां बीते लोक सभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने इस विधान सभा से गठबंधन प्रत्याशी को 35 हजार मतों से हराकर मात दी थी। वहीं अब विधान सभा चुनाव में जहां हार जीत का अंतर भी कम होने की पूरी सम्भावना है वहीं हार जीत का फैसला भी 60 और 80 के बीच होने की सम्भावना जताई जा रही है।

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