कात्यायनी शक्तिपीठ पर चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा

कात्यायनी शक्तिपीठ पर चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा

शाहाबाद, हरदोई -

भागवत के प्रथम दिन कथा व्यास ने भक्ति ज्ञान और वैराग्य के विषय मे बहुत ही रोचक प्रसंग प्रस्तुत किया। उन्होंने रहस्योद्घाटन करते हुए कहा कि एक बार वृन्दावन में एक युवा स्त्री के पास दो वृद्ध व्यक्ति अचेतावस्था में पड़े थे।

देवर्षि नारद ने स्त्री से पूछा कि आप कौन हैं और ये दो पुरुष कौन हैं तो स्त्री ने बताया कि में भक्ति हूँ। द्रविड़ प्रदेश में मेरा जन्म हुआ और कर्नाटक में धीरे2 बड़ी हुई। महाराष्ट्र में कहीं2 हमारा सम्मान हुआ और गुजरात आते आते मेरा शरीर जर्जर हो गया तो मैं वृन्दावन आयी।

यहाँ के प्रभाव से हम तो युवा हो गए किन्तु ये मेरे दोनों पुत्र यहाँ आकर जर्जर और अचेत हो गए हैं। भक्ति की दशा को देखकर देवर्षि नारद ने उन दोनों पुरुषों के कानों में गीता के श्लोक और वेद की ऋचाएं सुनायीं किन्तु चेतना नहीं आयी। तो नारद जी ने यह प्रकरण विष्णु जी के सामने रखा तो विष्णु जी ने कहा-यदि आप इन पर कृपा करना ही चाहते हैं तो इन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराओ।

नारद जी द्वारा सौनकादिक ऋषियों से उन तीनों को कथा का श्रवण कराया गया जिसके प्रभाव से वह तीनों युवा हो गए। इस प्रकार कलियुग में एक मात्र श्रीमद्भागवत कथा ही कल्याणकारी है। कथा श्रवण करने वालों में से राजीव नयन दीक्षित, अरुण कुमार श्रीवास्तव, अंकित मिश्र, धीरज मिश्र, राजा मिश्र, अवधेश मिश्र, करुणा कुमारी मिश्रा, दीक्षा श्रीवास्तव, शिखा रस्तोगी आदि सैकड़ों स्त्री/पुरुषों ने कथा का श्रवण कर रसपान किया।

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