जन-जन की सहभागिता चुनावी जंग।

जन-जन की सहभागिता चुनावी जंग।

हरदोई ।

लोकतंत्र के महापर्व के तीन चरण संपन्न हो चुके हैं. पश्चिम बंगाल में कुछ हिंसा भी हुई कुछ जानें भी गयीं लेकिन मतदान का प्रतिशत सर चढ़ कर बोला.

पूरे देश के किसी अन्य राज्य में न तो इतनी हिंसा हुई और न ही मतदान का रिकॉर्ड बढ़ा. तीसरे चरण में देश के सिरमौर कहे जाने वाले कश्मीर में मात्र 13•/• वोट ही पड़े. इसे लोकतंत्र के लिए एक शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता है. यह तो मात्र चुनाव की औपचारिकता हीहै. चुनाव आयोग,देश के शीर्शष्ट प्रतिष्ठान,खिलाडी,अभिनेता,अधिकारी सभी मतदान के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं.

बार-बार अपील की जा रही है कि अपनी मनपसंद सरकार चुनने के लिए मतदान अवश्य करें. परन्तु पता नहीं क्यों कुछ राज्यों को छोड़कर मतदाता उदासीनता बरत रहा है. इसके अनेक कारन हो सकते है. जैसे या तो जनता को लोकतान्त्रिक व्यवस्था पसंद नहीं आ रही है

 या तो वह सोचता है कि हमारे एक वोट से क्या फर्क पड़ता है. सरकारी तंत्र लाखों खर्च करके मतदाता को तरह-तरह की सुविधाएं तथा पीने का पानी,मतदान स्थल पर छाया तथा दिव्यांगों को वाहन आदि लेकिन मतदान का प्रतिशत आधे से कुछ ज्यादा पर रुक जाता है.यदि हम सभी लोग जागरूक हो जाएं तो देश में एक स्वस्थ लोकतंत्र बलवान होगा.

 

 

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