दंबग कोटेदार की मनमानी का शिकार हो रही महिगवाँ की जनता ।

दंबग कोटेदार की मनमानी का शिकार हो रही महिगवाँ की जनता ।
  • जनता मे भारी रोष व्याप्त 
  • हजारों शिकायतों के बाद भी आज तक नहीं हुई कोई कार्यवाही
  • अधिकारी बने मूक दर्शक
  • अधिकारीयों की ना सुनने के बाद मुख्यमंत्री से ग्रामीणों ने लगायी गुहार ।
  •  जनता त्रस्त ,कोटेदार मस्त
  •  1 वर्ष से नहीं बांटा गया मिट्टी का तेल कोटेदार अपनी दुकान से रहते हैं 50 किलोमीटर दूर।

हरदोई /सण्डीला।विकास विकास खण्ड के ग्राम पंचायत महिगवाँ गाँव मे दंबग कोटेदार दिनेश सिंह की मनमानी का शिकार हो रही राशन कार्ड पात्र ग्रहणी महिगवाँ की जनता ।राशन कार्ड धारकों के नाम इस प्रकार है ।

विमला वर्मा ,पत्नी गिरीश कुमार, मैकिन पत्नी गंगू,सुशीला  पत्नी फूलसिंह , श्रीमती  पत्नी कमलेश, शिव प्यारी पत्नी कमलेश ,सीमा पत्नी हरि किशन, राम देवी पत्नी सुशीला,  संतोष, सुशीला ,राकेश ,धीरज आदि। 3 दर्जन से अधिक कार्ड धारको ने दंबग दिनेश सिंह पर राशन ना देने की शिकायत की है।

ग्रामीणों का आरोप:-

मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत की है।कि हमारे कोटेदार दिनेश सिंह हैं जो कि हमारी ग्राम पंचायत महिगवाँ से लगभग 50 किलोमीटर दूर बघौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांव गंगापुर जिला हरदोई के मूल निवासी हैं ।वह  वर्तमान मे भी परिवार सहित वहीं निवास करते हैं ।यहां हमारे गांव महिगवाँ में इनको वरासत में जमीन व घर मिला है। उसी घर में कोटे की दुकान है क्योंकि यह परिवार सहित अपने मूल निवास गंगापुर में रहते हैं ।

इसलिए इनकी कोटे की दुकान तालाबंद रहती है। महीने की किसी भी तारीख में बिना किसी सूचना के उक्त कोटेदार अथवा उनका पुत्र राहुल आते हैं और एक या 2 घंटे में ही जो उनके खास होते हैं या फिर दबंग होते हैं उन्हें राशन देकर चले जाते हैं ।लगभग 1 वर्ष से उन्होंने मिट्टी का तेल नहीं बंटा है ।जब भी कोई राशन कार्ड धारक इनकी शिकायत करता है तो दबाव बनाकर सुलह करा दी जाती है।

राशन की मशीन भी अपने साथ ही रखते हैं और अपने मूल निवास पर बैठे बैठे बिना किसी का अंगूठा या आंख स्कैन किये ही सारा राशन खुद ही हड़प कर जाते हैं ।जो थोड़ा-बहुत राशन बटता भी है ।वह भी बाल्टी की  नाप से जोकि एक यूनिट पर लगभग एक किलो राशन कम  मिलता है। मानक से अधिक रुपए की वसूली करते हैं कोई विरोध करता है तो बिना राशन के ही भगा देते हैं और राशन कार्ड कटवा देने की धमकी देते हैं ।

इससे यह प्रतीत होता है कि राजनीतिक पहुंच के चलते अधिकारियों का भी संरक्षण प्राप्त है।

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