डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही मरीज की हुई मौत परिजनों ने लगाए आरोप

डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही मरीज की हुई मौत परिजनों ने लगाए आरोप

हरदोई, बिलग्राम। जनपद के स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही बरतने की आदतें कितनी हद तक गहरी हो चुकी हैं।इसका अंदाजा लगाना अब बिल्कुल भी मुश्किल नहीं रहा।जहां कहीं भी देखो प्राइवेट अस्पतालों की बाढ़ सी आई दिखती है।इन अस्पतालों में एक लाइसेंस पर अनगिनत सेवाओं को बेधड़क चालू किया जा रहा है।जिनके संचालक खुले आम बन्द परदों व शीशे के पीछे कई गैरकानूनी कार्यों को अंजाम देने से भी नहीं चूकते।उसके लिए उनका साथ देने के लिए पुलिस भी एक हमसफ़र की तरह कार्य करने के लिए बेताब नजर आती है।ऐसा  ही मामला कोतवाली बिलग्राम का है जब अधिकांश लोग गहरी नींद के आगोश में आराम फरमा रहे थे।उसी वक्त जनपद मार्ग पर उपजिलाधिकारी कार्यालय से लगभग 100 मीटर की दूरी पर संचालित हो रहे फ़ातिमा  हास्पिटल  में इलाज कराने आए भगवानदीन पुत्र मुन्ना लाल उम्र लगभग 55 वर्ष निवासी ग्राम पंचायत कटरी छिबरामऊ के चिरंजीवपुरवा के निवासी भगवानदीन अपने लड़के राजेश कुमार  के साथ इलाज के लिए स्वस्थ्य होने की उम्मीद से आए।जहां पर फ़ातिमा हास्पिटल के  मालिक हारून ने ही गलत इंजेक्शन लगाने का कार्य किया।

जिससे मरीज़ भगवादीन की मौत हो गयी।यही नहीं अस्पताल के द्वारा इलाज के नाम पर पैसा लेने के बाद भी उचित इलाज न करते हुए गलत इंजेक्सन किसी योग्य मान्यता प्राप्त डॉक्टर की जगह हॉस्पिटल के संचालक हारून ने लगा दिया।मरीज़ की मौत के बाद म्रतक के लड़के ने कहा तो डॉक्टर हारून ने अपनी दबंगई   आगे एक ना सुनी  और अपने अज्ञात पांच साथियों के साथ बहुत बेहरहमी से अपने अस्पताल में मारा।सूत्रों से मिली जानकारी पर मौके पर पहुचे कुछ बेख़ौफ़ पत्रकारो के सहयोग से मामले का खुलासा होने के बाद फ़ातिमा हास्पिटल के मालिक डॉक्टर हारून को कोतवाली पुलिस ने हिरासत में  लेकर काफी मजबूर होकर थाने में लेकर आयी।जबकि मृतक के बेटे को देर रात तक जबरन सुलह समझौते का दबाव न्याय की रक्षक पुलिस करती रही।जिसने देर रात बवाल मचते देख शव को कोतवाली लाने की बात कही।हॉस्पिटल में संचालक व पुलिस की मैत्रीपूर्ण बातचीत घण्टों चली।जब मृतक के बेटे ने आरोपी की गिरफ्तारी की जिद की व मौके पर बढ़ती भीड़ पर आरोपी संचालक को थाने लाया गया।जबकि मारपीट में घायल मृतक के बेटे का डॉक्टरी परीक्षण भी कोतवाली पुलिस ने नहीं कराया।

कुल मिलाकर मौके पर पुलिस की मौजूदगी पर भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाना अपने आप में बिलग्राम पुलिस की भूमिका को सन्देहास्पद दृष्टि से हर कोई देख रहा है।जबकि मृतक के परिजनों को न्याय की जगह जबरन सुलह करवाने की स्थानीय व उसके ग्राम के कुछ दबंगों द्वारा अनावश्यक दबाव बनाने में भी कोतवाली पुलिस ने अपनी भूमिका का जो दायित्व निभाने का कार्य किया।वह भविष्य में जनपद पुलिस की जनता के बीच बनी स्वच्छ छवि पर एक बदनुमा दाग लगाने का ही कार्य करेगी।अब देखना है कि बिलग्राम पुलिस व जनपद के प्रशासनिक अधिकारी ऐसे दबंग अस्पताल  के मालिक डॉ हारून  के खिलाफ  कार्यवही करेगा या फिर पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दर दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।वहीं दूसरी ओर अब मृतक के शव विच्छेदन के बाद क्या निकलता है इसी मसले को हल करने के लिए कुछ तथाकथित लोगों द्वारा भी पीड़ित परिवार को जबरन समझौता करने के प्रयास समाचार लिखे जाने तक जारी थे।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार समाचार लिखे जाने तक 24 घण्टे बीतने के बावजूद बिलग्राम पुलिस ने अभियोग पंजीकृत नहीं किया।जिस पर तरह तरह की चर्चाओं का दौर जारी है।

 

 

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