हरियाणा मे वर्तमान सरकार के वादे व हरियाणा में कर्मचारियो के हाल

हरियाणा मे वर्तमान सरकार के वादे व हरियाणा में कर्मचारियो के हाल

सिवानी मण्डी -

वर्तमान समय में हरियाणा के जो हालात चल रहे हैं उन्होंने मुझे कुछ लिखने के लिए मजबूर कर दिया है। इस वक्त हरियाणा सरकार की नीतियों से परेशान होकर रोज हर वर्ग रोज नए धरने और प्रदर्शन कर रहें हैं

जिस कारण हर इंसान व्यथित है। इस वक्त हरियाणा के इतिहास में सबसे बड़ा आन्दोलन अगर किसी सरकारी विभाग ने किया है या सबसे लम्बी पीड़ा अगर किसी ने झेली है तो वो हरियाणा के गेस्ट टीचर्स साथी है जिनका आन्दोलन 12 साल से चल रहा है। पिछली सरकारों से त्रस्त इन साथियों को वर्तमान बीजेपी सरकार ने अपने घोषणा पत्र में आते ही नियमित करने का जो झुनझुना दिया था, उसकी पोल पट्टी खुल चुकी है।


इनकी दोगली नीतियों से तंग आकर और समान काम समान वेतन की बेहद जायज मांग को लेकर एक शहीद सैनिक की पत्नी और वर्तमान में गेस्ट टीचर बहन मैना यादव अपना मुण्डन करा चुकी है। मिड-डे मील की कुक भी कई महीनों पहले आंदोलन किया था। नए नियमित लगे हुए कर्मचारी भी एनपीएस के खिलाफ पुरानी पेंशन नीति को बहाल करने का झन्डा सरकार के खिलाफ बुलंद किये हुए हैं। इसी तरह महिलाओं की संख्यां के हिसाब से सबसे बड़ा आन्दोलन हमारी आँगनबाड़ी की वर्कर्स और हैल्पर्स का चल रहा है जो लगभग 38 दिनों से अपने न्यूनतम वेतन और नियमित कर्मचारी का दर्जा दिए जाने को लेकर संघर्षरत हैं।

इसके साथ-साथ कई साल से कई सरकारों की दमनकारी नीतियों के शिकार हमारे गेस्ट टीचर्स भाई भी अपने नियमित होने की माँग को लेकर बैठे हुए हैं। पिछले कुछ समय पूर्व अभी करनाल में नियमित जेबीटी अध्यापकों के ऊपर सरकार लाठीचार्ज करा चुकी है। नगरपालिका के कर्मचारी अपनी माँगों को लेकर सरकार के खिलाफ बिगुल बजाए हुए हैं। नए मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन में कर्मचारी हितों के खिलाफ पेश किए जाने से नाराज हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है।

सरकार इन प्रदर्शनों को कितना भी दबाने की कोशिश कर ले या ये कहके अपना पल्ला बचने की कोशिश करे कि ये सब धरना प्रदर्शन विपक्ष की राजनीति है लेकिन वास्तविकता क्या है, ये बात हम सबको समझनी होगी। गेस्टों की बात करें तो 12 साल से नौकरी पर लगे हुए इन भाई बहनों की क्या गलती है कि भाजपा सरकार वादा करने के बाद भी नियमित करना तो दूर इनको सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद समान काम के लिए समान वेतन भी नहीं दे सकती है।


सबसे ज्यादा दुष्प्रचार आंगनबाड़ी में लगी हुई बहनों को लेकर किया जा रहा है कि ये बहनें काम नहीं करती हैं। राशन को गलत तरीके से इस्तेमाल करती हैं। इनके पास कोई काम नहीं है। बच्चों की गिनती हो या शौचालय का विश्लेषण, गर्भवती स्त्रियों की सही संख्याँ और स्थिति का ब्यौरा हो या पोलियो का अभियान सब कुछ आँगनबाड़ी सेविका के माध्यम से ही करवाया जा रहा है। 43 साल से ज्यादा खुले विभाग में सबसे ज्यादा सर्वे के काम इन्हीं बहनों के पास है।

साल में 300 दिन आँगनबाड़ी खोलने की जिम्मेवारी है। सबसे कम छुट्टियां इनको मिलती है। इसके बावजूद भी इनके साथ सरकार सौतेला व्यवहार क्यूँ कर रही है। इसी तरह उबर और ओला जैसी बड़ी कम्पनियों के आकाओं के लिए हरियाणा सरकार परिवहन नीति में संशोधन का षड्यंत्र रच रही है।

हरियाणा ने अपने इतिहास में पहली बार देखा ऐसी समस्या और उसमें से निपटने में विफल सरकार। यह सरकार ऐसी है जिसने तीन-तीन बार हरियाणा को जलवाने जैसी नकारात्मक उपलब्धि हासिल की हो व 200 करोड़ से ज्यादा सैन्य बलों पर आन्दोलनकारियों से जान-माल की रक्षा के लिए खर्च कर डाले हों।


सुरेन्द्र गिल (पत्रकार-सिवानी मण्डी)

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