जिन मरीजों को पहले दिल का दौरा पड़ चुका हो या स्टेंट लगा हो उन्हें एस्प्रिन लेना जारी रखना चाहिए। 

जिन मरीजों को पहले दिल का दौरा पड़ चुका हो या स्टेंट लगा हो उन्हें एस्प्रिन लेना जारी रखना चाहिए। 

सालों से, कम खुराक वाली एस्प्रिन को दिल के दौरे, स्ट्रोक और दिल से जुड़े अन्य रोग को दूर रखने के लिए वृद्ध मरीजों को दिया जाता था, लेकिन अब अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट असोसिएशन द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में डॉक्टरों को ऐसा नहीं करने का सुझाव दिया गया है। 

इन दिशा-निर्देशों को लिखने वाले डॉक्टर्स में से एक डॉ. एरिन माइकोस के मुताबिक, 'यह गाइडलाइन्स विशेष तौर पर उन लोगों के लिए है जिनमें दिल की बीमारी या स्ट्रोक से जुड़े कोई संकेत दिखाई नहीं देते हैं।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन मरीजों को पहले दिल का दौरा पड़ चुका हो या स्टेंट लगा हो उन्हें एस्प्रिन लेना जारी रखना चाहिए। 

हाई रिस्क मरीजों को दी जा सकती है एस्प्रिन 
हालांकि, डॉक्टर एस्प्रिन डोज हाई रिस्क मरीजों को प्रिस्क्राइब कर सकते हैं जैसे कि वे मरीज जिन्हें अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल व शुगर लेवल को नियंत्रित रखने या कम करने में दिक्कत हो, लेकिन इसमें भी यह बात ध्यान में रखी जानी चाहिए कि एस्प्रिन के कारण उन्हें इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा न हो। 

दिल की बीमारी को दूर रखने के लिए सुझाव 
दिल की बीमारी को दूर रखने के लिए गाइडलाइन्स में लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव लाने के सुझाव जैसे हेल्दी वेट, स्मोकिंग न करना, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तक व्यायाम करना और सब्जियों, फलों, नट्स, साबुत अनाज और मछली खाना आदि शामिल हैं। 

बता दें कि, साल 2018 में एक रिसर्च में यह सामने आया था कि स्वस्थ बुजुर्ग लोगों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए एस्प्रिन से कोई मदद नहीं मिलती है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित तीन अध्ययनों में के मुताबिक 70 साल के अपेक्षाकृत स्वस्थ बुजुर्गों को प्रतिदिन एस्प्रिन की हल्की डोज (100मिलीग्राम) देने के बावजूद उनमें दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम नहीं हुआ।

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments