1 साल में 12 आर्ट अटैक जिसमें 4 की मौत 2 पैरालिसिस

 1 साल में 12 आर्ट अटैक जिसमें 4 की मौत 2 पैरालिसिस

 

 

बिलग्राम मोहल्ला खुर्दपुरा में 12 महीने में  12 लोगों के हार्टअटैक हुए जिसमें 4 लोगों की मौत मोहल्ला निवासी पूर्व नगरपालिका सभासद ने बताया कि मोहल्ला खुर्दपुरा में 12 महीने में 12 आर्ट अटैक में हुए हैं

जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई जिसमें अहमद मुईद के घर दो लोगों की मौत हुई उनका कहना है कि जब से नेटवर्क टावर हमारे मोहल्ले में लगे हैं जब से बीमारियां बड़ी हैं बीच बस्ती में टावर लगने से लगातार हार्ट अटैक और पैरालाइसिस हुए हैं जिसमें हार्ट अटैक से मरने वालों मैं जलील अहमद उम्र 38 वर्ष अब्दुल मजीद उम्र 45 वर्ष अतीक अहमद उम्र 40 वर्ष हबीब अहमद उम्र 50 वर्ष है हार्ट अटैक से पीड़ित लोगों में जलील अहमद हार्ट अटैक से कार्डियोलॉजी में मौत, 2 अब्दुल मजीद की मौत का कारण हार्ट अटैक फूल सभासद मुईद अहमद को भी हार्ट अटैक हुआ

लेकिन समय रहते इलाज से बच गए 3 अज्जन  हार्ट अटैक से मौत 4 शुशील अग्रवाल, इश्तियाक, इदरीश कुरेशी, अतीक अहमद, अब्दुल वाहिद उर्फ मुन्ना, हाफिज हबीब अहमद इत्यादि को हार्ट अटैक हुआ मोहल्ले वासियों का कहना है कि जब से बस्ती के बीच तब से हम लोग बीमार रहने लगे बस्ती के बीच में टावर लगने से रेडियन इतना बढ़ गया है कि दिन-प्रतिदिन समस्याएं बीमारियों के रूप में सामने आती जा रही है किसी को हार्ट अटैक कोई पैरालाइसिस पीड़ित है

मोहल्ले के लोगों ने कई बार इसकी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई बस्ती के बीच में टावर लगाना क्या सही है उससे जो रेडिएशन निकलता है उस से आसपास के लोगों पर इतना बुरा असर पड़ता है डॉ और वैज्ञानिक जब बताते हैं कि मोबाइल को पॉकेट में रखना और तकिए के नीचे रख कर सोना गलत है

उसे ज़ोर होता है मोहल्ले में दोदो नेटवर्क टावर लगे हैं तो आसपास के लोगों पर इसका कितना बुरा असर होता होगा इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं।

बस्ती में लगे नेटवर्क टावर में आग भी लग चुकी है आप समझ सकते हैं कि वहां के लोग कितने सुरक्षित हैं जबकि बीच बस्ती नेटवर्क लगाना मना है लेकिन चंद पैसों की खातिर शासन प्रशासन टावर लगाने टावर लगाने की अनुमति दे देती है लेकिन वहां के लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है इसका जिम्मेदार कौन है 

 12 अटैक में 5 की मौत 2 पैरालाइसिस यह सोचने वाली बात है किसी और मोहल्ले में इस तरह के कोई केस नहीं हुए हैं अगर समय रहते शासन प्रशासन नहीं जागा तो ऐसे ही लोगों के जीवन से खिलवाड़ होता रहेगा और लोग ऐसे ही अपना जीवन होते रहेंगे आखिर इतने सारे हादसे होने के बाद भी प्रशासन की आंख नहीं खुल रही है वैसे शासन प्रशासन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है उनको सिर्फ चंद पैसे के लालच में लोगों की जिंदगी यों से खेल रहे हैं

इस मोहल्ले में ज्यादातर निम्न मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं जो आर्थिक रूप से इतने संपन्न भी नहीं है कि इन बीमारियों का इलाज करा सके इसका कोई जवाब शासन और प्रशासन के पास नहीं है यदि इन लोगों के साथ कोई हादसा हो जाता है तो इनके परिवार के लोगों और बच्चों को कौन पा लेगा इसके अतिरिक्त अगर हमें आने वाली फिलि की बात करें

तो जो नए बच्चे हो रहे हैं वह मां के गर्व से ही तमाम बीमारियां लेकर आ रहे हैं ऐसे बच्चों को शारीरिक रूप से अक्षम ता या दिमागी रूप से अक्षमता हो सकती है इसका कौन जिम्मेदार है आगे आने वाली पीढ़ी को हम बीमार बना रहे हैं मगर इसके लिए कोई जवाब दे नहीं है शायद इसका जवाब शासन या प्रशासन के पास भी नहीं है मोहल्ले वालों की मांग है कि इन टावरों को यहां से हटाया जाए जिससे उनके परिवार और वे स्वयं सुरक्षित रह सके परंतु उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है बार-बार कहने के बाद भी मोहल्ले वाले अब रूस में हैं

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