मौजूदा इलेक्शन और ग्यारह (11) करोड़ मुस्लिम वोटर ? राहुल गांधी -प्रियंका गांधी वाड्रा - की लीडर शीप का इम्तेहान - मोहम्मद असलम अंसारी

मौजूदा इलेक्शन और ग्यारह (11) करोड़ मुस्लिम वोटर ?   राहुल गांधी -प्रियंका गांधी वाड्रा - की लीडर शीप का इम्तेहान -  मोहम्मद असलम अंसारी

संवाददाता- अजय कुमार यादव   

                                                                                                               

                                                              लखनऊ:-

इस वक़्त देश के हालात बहुत ही ज्वलनशील है , देश में सच्चाई को दबाया जा रहा है और झूठ को फैलाया जा रहा है | गरीब - कमजोर और अल्पसंख्यकों के साथ गैरों जैसा बर्ताव किया जा रहा है | समाज में गरीब तबकों के साथ मारधाड़ और कत्ल तक किया जा रहा है मुसलमानों से पाकिस्तान जाने की गुहार की जा रही है | ईमानदारी के साथ काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को उनकी जगह से हटाकर दूसरी जगहों पर भेजा जा रहा है देश में निराज़ का आलम है ।

                                                               मोहम्मद असलम अंसारी ( कनवीनर)

                                                       अखिल भारतीय डॉक्टर अब्दुल जलील   

     फरीदी मेमोरियल सोसायटी लखनऊ उ०प्र०

                                                            मोबइल न०-9336001113 

 

 

 

इसका जीता जागता सबूत 12 अप्रैल 2019 को हिंदुस्तान के सभी अखबारों में यू एन ओ की हुकूक इंसानी कमेटी की  अध्यक्ष "मशील बिसलिट" कि वो रिपोर्ट है जिसमें उन्होंने 2014 से 2018 के दरमियान हिंदुस्तान में होने वाले ह्जुमी तशद्दुद ( माब्लान्चिंग ) की रिपोर्ट शामिल की है | जिसका शिकार दलित और मुसलमानों को बनाया गया है | ऐसे हालत में देश की सबसे बड़ी और पुरानी  कांग्रेस पार्टी की अब ये ज़िम्मेदारी होती है कि वो देश को बचाने के लिये सामने आए | और देश के सैकुलर ताने बाने की हिफाज़त करे | 

 

राहुल गाँधी ने कुछ समय पूर्व अमरीका भ्रमण के दौरान अमरीका के कई विश्वविद्यालय में बातचीत  किया  | बातचीत  का केंद्र बिंदु हिन्दुस्तान की वर्तमान सरकार की कार्यशैली रही , खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निशाने पर रहे | देश की बढती हुई असहनशीलता पर चिंता व्यक्त की | इस के साथ उन्होंने अपनी कांग्रेस पार्टी की भी आलोचना की | राहुल गाँधी ने कहा की कांग्रेस पार्टी वर्ष 2004 से 2009 तक सत्तारूढ़ थी , वर्ष 2014 के बाद कांग्रेस नेतृत्व घमंड में आ गया | जिस प्रकार से छोटे नेताओं से लेकर बड़े नेताओं को काम करना चाहिए लेकिन  उन्होंने नही किया जिसका दुष्परिणाम  2014 के चुनाव में भुगतना पड़ा |

 

       राहुल गाँधी  कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व में घमंड 2004 में ही शुरू हो गया था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री  मनमोहन सिंह ने अपने पहले भाषण में कहा था की मै बुहत जल्द ही गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगा दूंगा ताकि गुजरात के 2002 के फसाद की जाँच नए सिरे से करवा सकू , लेकिन  कांग्रेस पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने उन्हें ऐसा करने से रोका जिसका परिणाम ये हुआ की 2014 के चुनाव में पार्टी इस बुरी तरह से हारी की संसद में विपक्ष की कुर्सी भी गंवा बैठी | 

 

     राहुल गाँधी आज मुल्क पर जो पार्टीयाँ राज कर रही है ये सब पार्टीयाँ आरएसएस की देंन है , चाहे भारतीय जनसंघ हो , हिन्दू महासभा हो , भारतीय जनता पार्टी हो , बजरंगदल हो और चाहे विश्व हिन्दू परिषद हो , इस सबकी माँ आरएसएस है और कोई नही | जब 30 जनवरी 1958 को गोडसे ने  महात्मा गाँधी  को गोली मारकर उनकी ज़िंदगी का खात्मा कर दिया तब तत्कालीन प्रधानमंत्री सरदार पटेल ने आरएसएस पर पाबंदी लगा दी थी , क्योकि गोडसे आरएसएस और हिन्दू महासभा का कार्यकता था | लेकिन एक साल के अंदर ही सरदार पटेल ने आरएसएस से नेतृत्व करने के बाद ये पाबंदी उठा ली | आज वो ही आरएसएस कांग्रेस को मुल्क दुश्मन बता रही है | 

 

     राहुल गाँधी अगर हम 1962पर निगाह डाले तो हमें ये दिखाई देगा की मुल्क में साम्प्रदायिक दंगो की शुरुआत जबलपुर (जहा बीड़ी बनाने का काम होता है ) से हुई | उसके बाद देश के हर उस शहर और कस्बो में हुए जहा पर मुसलमानों ने मुल्क के बटवारे के पुरआशोब दौर के गुजरने के बाद अपनी दस्तकारी के हुनर के ज़रिये छोटे छोटे उद्योग कायम कर लिये थे | कम पढ़े लिखे मुसलमान उन उद्योगों में काम करने लगे थे लेकिन पढ़ा लिखा मुसलमान नौकरी हासिल नही कर पा रहा था क्योकि 1950 में कांग्रेस की केन्द्रीय सरकार ने एक गश्ती (सर्कुलर) जारी करके सभी राज्य सरकारों को अवगत करवा दिया था की सरकारी  नौकरियो में मुसलमानों की तादाद 35 प्रतिशत है

अब मुसलमानों को और नौकरियों में ना रखा जाए | वो गश्ती आज तक अपना असर दिखा रही है जिस की वजह से सरकारी नौकरियों में मुसलमान एक से चार प्रतिशत ही नौकरिया हासिल कर पा रहा है | 1962 से दंगो के ज़रिये मुसलमानों के छोटे बड़े सभी कारखानों और उघोग तबाह और बर्बाद किये जा रहे थे , ये सिलसिला लगभग 20 हज़ार दंगो के बाद जब 1977 में जनता पार्टी केंद में आयी तब जाकर फसादात का सिलसिला रुका | क्योकि आरएसएस , भारतीय जनसंघ और हिन्दू महासभा , जनता पार्टी में शामिल थी इस लिये फसादात नही हुए

यही तमाम पार्टिया 1962 से फसादात में शामिल थी | कांग्रेस पार्टी ने इन पार्टियों को छुट दे रखी थी | इसकी मिसाल हम यहाँ यू दे सकते है की 1969 में महाराष्ट्र के शहर भिवंडी में जो की पावरलूम का शहर भी कहलाता है जहा हर घर में 8-10 पावरलूम लगे हुए थे  जहां पर लाखों मीटर कपड़ा रोज़ तैयार होता है वहां पर दंगो का सिलसिला शुरू हुआ देखते ही देखते पूरा भिवंडी शहर आग की लपेट में आ गया | चंद दिनों में ही पूरा भिवंडी शहर तबाह व बर्बाद हो गया | 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                       इस फसाद की जाँच के लिये जस्टिस मादान की सरबराही (अध्यक्षता) में एक कमेटी बनायी गयी जिस ने रिपोर्ट के आखरी पैरा में लिखा है की इन दंगो के कुसूरवार वो लोग है जो खाकी वर्दी पहने हुए थे | लेकिन आज तक किसी एक  कुसूरवार को सजा नही मिली क्योकि कांग्रेस की नियत में खोट था , इसी तरह बाबरी मस्जिद की शहादत में भी कांग्रेस पार्टी बराबर की शरीक थी क्योकि  22 दिसम्बर 1949 की रात बाबरी मस्जिद में मूर्तिया  रखवाने , 1986 में मस्जिद का ताला खुलवाकर पूजापाठ की इजाज़त देना , 1989 में शिलान्यास कराना ,1992 में बाबरी मस्जिद शहीद करवाकर मस्जिद की जगह पर 48 घंटो में चबूतरा तैयार कराकर उस पर मूर्तिया स्थापित कराना , मस्जिद की शहादत के बाद फसादात का सिलसिला शुरू हो जाना और मुसलमानों को फसादात का कुसूरवार ठहराकर उन्हें जेलों में डाल देना यह सब वह हाकायक (सच्चाई) है जिनको कांग्रेस पार्टी झुठला नही सकती है क्योकि ये सब वारदात कांग्रेस की ही हुकूमत में हुए | कांग्रेस पार्टी इन सच्चाईयो से भाग नही सकती |

 

कुदरत का अपना फैसला होता है इस फैसले के तहत कांग्रेस पार्टी बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद उभर नही पा रही है , आधे से ज्यादा राज्य उसके हाथ से निकल चुके है | 2004 में कुदरत ने एक मौका केंद्र सरकार बनाकर दिया था | लेकिन आप (राहुल गाँधी ) के कथनानुसार कांग्रेस पार्टी घमंड का शिकार हो गई थी जिसकी वजह से वह पूरी तरह से हारी और संसद में विपक्ष की सीट भी गंवा बैठी |   

 

राहुल गांधी  आपको ऐसे व्यक्ति का परिचय कराना चाहता हूं जिनको आपकी दादी प्रधानमंत्री पूर्व  इंदिरा गांधी  ने 1971  के चुनाव से पहले अपने एक भरोसेमंद मंत्री  वाई०बी०चावन को स्पेशल चार्टर जहांज़ से लखनऊ भेज कर दिल्ली  बुलवाया था वह शख्सियत मुस्लिम मजलिस मुशाविरत उत्तर प्रदेश  के अध्यक्ष  और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के अध्यक्ष डॉक्टर अब्दुल जलील फरीदी की थी ।  दिल्ली बुलाकर श्रीमती इंदिरा गांधी ने डॉक्टर साहब से मुसलमानों की समस्याओं पर विचार-विमर्श  गुफ़्तगू की फिर उन्होंने चुनावी घोषणापत्र में डॉक्टर साहब से ही मुसलमानों से संबंधित वादे दर्ज कराएं  इंदिरा गांधी   ये समझती थी कि अगर मुसलमानों का वोट मिल गया तो हमारी कामयाबी पक्की है क्योंकि उस समय इंडिकेट औऱ सिंडिकेट के मध्य चुनाव होना था ।  इस समझौते से पूरी इंडिकेट  पार्टी में खुशी की लहर दौड़ गई , चुनावी युद्ध में इंदिरा गांधी जीत गयी ।

 

 कांग्रेस ने डॉक्टर साहब से जो वादे किए थे अभी तक उसमे से एक भी वादा पूरा होना तो दरकिनार 1972 में संसद में एक बिल लाकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा  समाप्त कर दिया गया । जब मुसलमानों की तरफ से इसके खिलाफ 16 जून 1972 को बाज़ुओ पर काली पट्टी बांधकर विरोध किया गया तो उस वक्त उत्तर प्रदेश की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने उसका विरोध करते हुए पी०ए०सी० बटालियन से गोली चलवा दी जिसमें अलीगढ़ फिरोजाबाद और बनारस में बहुत से लोग मारे गए

एक जगह तो मस्जिद में इमाम को चटाई में बांधकर आग के हवाले कर दिया गया | उसके बाद डॉक्टर फरीदी साहब ने 5 मई 1973 को लखनऊ में विधानसभा के सामने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा बहाल कराने के लिए जेल भरो तहरीक चलायी जिसकी कयादत डॉक्टर फरीदी और  राजनारायण  ने की थी । जिसमें तकरीबन 350 लोगों ने अपनी गिरफ्तारी दी । तकरीबन एक माह तक जेल में गुजारे । डाक्टर फरीदी  अपने वक़्त के टी०बी०के मर्ज़ के हिन्दुस्तान के चंद डाक्टरों में से एक थे |  डॉक्टर फरीदी  के पास 5 मुल्कों की डिग्रियां थी वह इतने गरीब परवर 

 

( गरीबों का भला करने वाले )  थे कि अपने मतब में सुबह के वक्त 100 मरीज बगैर फीस के देखते थे । सिर्फ शाम के वक्त वक्त 20 मरीज़  फीस लेकर देखते थे । जब डॉक्टर साहब तकरीबन एक माह तक जेल में रहे तो उनके गरीब मरीज बहुत परेशान हुए । यह वही डाक्टर फरीदी साहब है जिन्होंने नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल दिल्ली में 3 और 4 नवंबर 1969 को फिरकावाराना फ़सादात के मुतालिक अपनी अपनी तकरीर अंग्रेजी में की थी तो तकरीबन 90 मिनट तक चली । इस तकरीर का एक पैरा मुल्क के हालात को देखते हुए यहाँ दर्ज कर रहा हूँ । इस जलसे की सदारत (अध्यक्षता) प्रधानमंत्री श्र इंदिरा गांधी कर रही थी , दीगर मेम्बराने कौसिल जो मुल्क भर से आये थे वो मौजूद थे |

 

मोहतरमा.... मैं जानता हूं कि आपके लिए यह फैसला करना बड़ा मुश्किल है कि कौन मुसलमानों की नुमाइंदगी  करता है । क्योंकि इस मुल्क में हर शख्स लीडर है । लेकिन आपके हाथो  में मुल्क की नब्ज़  हैं । और आप आसानी से फैसला कर सकती हैं की किसी मख़सूस (विशेष) फिरके का सबसे ज्यादा एतमाद  और एहतराम किन को हासिल है ।

 

इस वक़्त हमारे सामने मौजू-ऐ-बहस यह है  कि "फिरकावाराना तशद्दुद " का मुकाबला कैसे किया जाय । मेरा ख्याल है कि इस मुसीबत के पुश्त पर जो जस्बा काम कर रहा है उसकी नैवईयत (प्रकार) मजहबी कम और इक्तिदार (कुर्सी) की हवस और इक्तिसादी (आर्थिक) लालच ज्यादा है | मैं यकीन से नही  कह सकता की फिरकावारियत  की तारीफ क्या है । लोग मुझे फिरकापरस्त व कदामत पसंद कहते हैं और यह कि मैं कौमी धारे से नहीं बह रहा हूं |

मै नॉरमल इंसान , एक आम हिंदुस्तानी , और एक मामूली दर्जे का मुसलमान जैसे इस मुल्क में करोड़ों मुसलमान है समझता हूं |  मैं आपसे दरख्वास्त करता हूं कि उन उमूर (विषयों) से आगाह करें जिनके बिना पर मुझे फिरकापरस्त या कदामत पसंद समझा जाता है | मै साइंस की दुनिया से वाबस्ता हूं और मुबहम (गोलमोल) बातों का कायल नहीं हूं | मैं अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में फिरकावारीयत की वाज़ह (स्पष्ट) मिसाले चाहता हूं

जिनको मुझसे ज्यादा आप जानती होंगी अगर  आप चाहती हैं कि मैं अपना मजहब तर्क कर दू , तो मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा , अगर आप चाहती हैं कि मैं अपना नाम बदल दूं तो मैं यह भी नहीं करूंगा , अगर आप चाहती हैं कि अपनी पोशाक तब्दील कर दू  तो मैं ऐसा नहीं करूंगा ,  अगर आप मेरे खाने की आदतें बदलना चाहे और मुझसे सब्जीखोर बनाना चाहती है तो मैं ऐसा भी नहीं करूंगा , बराये करम (कृपया) मुझे कौमी जिंदगी के धारे की तरफ ले चलिए मोहतरमा जैसा कि आप ने खुद पूछा है कि वह धारा कहां है मैं भी उसको जानना चाहता हूं | 

 

राहुल गांधी  मैंने ये वाकियात इसलिए लिखे हैं ताकि आप समझ सके कि कांग्रेस से कहां-कहां गलतियां हुई है |

 

राहुल  हम आपको इसका कुसूरवार नहीं मानते हैं आप इसके जिम्मेदार नहीं हैं | क्योकि आपकी उस वक्त उम्र बहुत कम थी , लेकिन आज हम आपको इस  लेख के जरिए यह  स्प्ष्ट कराना चाहते हैं कि आप सब के साथ इंसाफ करें चाहे वह किसी भी धर्म का मानने वाला हो क्योकि हिंदुस्तान एक गुलदस्ता है जिस में किस्म-किस्म (विभिन्न) प्रकार के फूल होते हैं | आप  नौजवान है , आप सेक्युलर सोच को मुल्क में परवान चढ़ाने के लिए मैदान अमल में कदम आगे बढ़ा रहे हैं । इस मुल्क की बुनियाद  ही सेक्युलरिज़्म पर रखी गई , मुल्क सेक्युलर सोच से ही परवान चढ़ेगा |  हमारे मुल्क का  दस्तूर  ही सेक्युलरिज़्म पर  आधारित है | हमारे  मुल्क  दस्तूर के पहले ही वर्क पर तमहीद (प्रस्तावना)  छपी है | यही हमारे मुल्क की शान है जो नीचे दर्ज है ।

 

 हम भारत के आवाम मतानत व संजीदगी से अज्म (प्रण) करते हैं की भारत को एक मुकतदिर (मजबूत) समाजवादी , गैर मज़हबी , अवामी ,जम्हूरिया  (गणराज्य) बनाये  और इसके तमाम शहरियों के लिए हासिल करें इन्साफ  , समाजी ,माशी और सियासी आजादी , ख्याल , इजहार अकीदत दीन और  इबादत , मसावात बाऐतबार हैसियत और मौके और उन सबमें उखवत को  तरक्की दे जिससे फर्द की अज़मत और कौम के इत्तेहाद और सालमियत का यकीन हो | अपनी आईंनसाज़ असेंबली में आज 26 नवंबर 1949 को ये  आईन बजरिये हाजा  इख्तियार करते है | वजा करते है और अपने आप पर नाफ़िद करते है | 

 

 राहुल गांधी आपको इस सोच के लोगों को अपने साथ जोड़ना होगा  एक रंग पर मुल्क को ले जाने वाले फिरकापरस्तो से आपको लड़ाई जारी रखना होगी  इस लड़ाई में सेक्युलर अफराद आपका साथ देने को तैयार है | क्योंकि हिंदुस्तान की आवाम मुल्क में दस्तूरी हकूमत चाहती है | गैर दस्तूरी हुकूमत मुल्क में निराज फैलाती है , मुल्क को कमजोर करती हैं , पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाती है , आवाम को गरीबी की तरफ ले जा रही हैं |

 

राहुल गांधी हमें उम्मीद है कि आप मुल्क में  सेक्युलर हुकूमत कायम करने के लिए तमाम सेक्युलर पार्टियों को एक प्लेटफार्म पर लाकर मुल्क में सेक्युलर  हुकूमत कायम करने के लिए तमाम सेक्युलर पार्टियों को एक प्लेटफार्म पर लाकर मुल्क में एक सेक्युलर हकुमत कायम करने के लिये अपना जद्दोजहद संघर्ष जारी रखें और हिंदुस्तान की तमाम अल्पसंख्यको , मुसलमानों को शामिल कर उनकी आबादी के हिसाब से उनका पूरा हिस्सा दिलाने की ज़हमत करेंगे ।

दुनिया में 58  मुस्लिम मुस्लिम मुल्क है जिसमें से सिर्फ एक ही मुल्क  इंडोनेशिया है जहां दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी है | इसके बाद हिंदुस्तान ही एक ऐसा मुल्क है जहां दुनिया के मुसलमानों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है | क्योंकि हिंदुस्तान में तकरीबन 18 करोड मुसलमान बसते हैं जिस में तकरीबन 11 करोड़ मुस्लिम वोटर है इस तादाद को अपने ध्यान में रखते हुए  कोंई ऐसा फैसला करें जिससे मुस्लिम आबादी भी तरक्की की दौड़ में बराबर की शरीक रहे और मुल्क भी तरक्की की तरफ  गामज़न हो ।

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