बॉसस्थान मेले में धड़ल्ले से जुआ खेले जा रहे हैं कोई पूछनहार नहीं

बॉसस्थान मेले में धड़ल्ले से जुआ  खेले जा रहे हैं कोई पूछनहार नहीं

संवाददाता- अजय कुमार यादव 
 

इतिहासिक बामन्त स्थान मेला नाम जुआरीयों के कतुत से धुमिल हो रहा है. प्रति दिन जुए के दाव पर लाखों रुपये का वारा न्यार हो रहा है. स्थानीय पुलिस मूकदर्शकबनी है  जुआ के धंधे में लीन नाबालिगों का किस्मत दाव पर है 

गोरखपुर-पिपराइचः जनपद के गुलरिहा इलाके में बांस्थान के धार्मिक मेले में पुलिस के सह पर खुलेआम अवैध जुआ खेल सरेआम खेला जा रहा है. प्रतिदिन लाखों रुपये की बाजी खेली जा रही है. जुआरियों की टीम जनपद से आकर धार्मिक मेले का नाम धुमिल करने लगी है.

धंधेबाज के गैंग में माशूम बच्चे भी है जिनका भविष्य जिन्दगी रेस में दाव पर नजर आ रहा है. गुलरिहा पुलिस दिनरात मेले ड्यूटी बजाती रहती है। बावजूद इसके ये हाल देखने को मिल रहा है. जुआरीयों की माने तो पुलिस से उनकी सेटिंग्स है.

बांसस्थान स्थित बामन्त मां के मंदिर पर गत 13 अप्रैल से भव्य धार्मिक मेले का आयोजन चल रहा है. पूर्वांचल का इतिहासिक मेला दक्षिण भारत में विख्यात है. मंदिर पर बडी संख्या में दर्शनार्थी दर्शन करने जाते है. वही सुरक्षा के दृष्टि से अस्थाई पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है.

लेकिन चौकी के ईर्द गिर्द खुलेआम अवैध जुआ दर्जनों जगह पर जुआरी खेलते दिखेंगे। लोगों का कहना है कि पुलिस को सह पर ही धंधेबाज बेखौफ है उधर पुलिस रकम मिलने से मूकदर्शक बनी हुई है।

बताया जाता है कि जुए के धंधेबाज बस्ती सिद्धार्थ नगर आदि गैर जनपद से अपने गैंग के वहां पहूंचे है. जुआ कारोबार को अंजाम देने में लगे है. मेला में खास कर तीन प्रकार का जुआ खेला जा रह है। लूडो जुआ लक्की नंबर, चर्खी जुआ (रोऊलेट गैम) और तीन पत्ती (अल्टीमेटम) जो रंगों का खेल।

अल्टीमेटम जुआ

तीन टोकन पर आधारित जुआ रंगों की पहचान से हार जीत का फैसला होता है दो टोकन काला और एक लाल रंग का होता है। लाल रंग के टोकन की पहचान पर पैसा दाव पर लगता है। उक्त मेले मेले में इसकी शुरुआ दो सौ रुपया से होती है इसके उपर पांच दस और 15 हजार ₹ तक, जुए का खिलाड़ी अपनी इच्छानुसार रुपया दाव पर रख सकता है। बांसस्थान मेला मे यह जुआ बडे पैमाने पर खेला जा रहा है। इन्ही जुआरीयों की करतूतों से मेले का नाम धूमिल हो रहा है.

ईर्दगिर्द के लोगों का कहना है कि वर्दीधारीयों तथा मेला ठीकेदार की मिलीभगत से जुए का कारोबार बेखौफ चल रहा है दर्शानार्थियों की माने तो इसका अलग अलग रेट बधा हुआ है। तीन पत्ती का तीन हजार, चर्खी जुआ का एक हजार रोजाना और लूडो लक्की नंबर का पांच सौ रुपया वसूले जाते है। वही दिन का रेट अलग रात में जुआरीयों विशेष छूट भी दिया जा रहा है।
जुआरीयों के गैंग में कुछ अल्प आयु के किशोर भी शामिल है. जो भविष्य पिछे छोड़ कर जुए के दलदल में फंसे है। इनका भविष्य बर्बाद हो रहा पुलिस का ध्यान इस ओर से भी परे है।

श्रद्धा और भक्ति के पवित्र अरमान लेकर श्रद्धालु दर्शन करने वहां जाते है. जुआ स्टाल देख दाव आजमाने जुए की ओर आकर्षित होते है और जरुरतों को एक तरफ छोड़ कर जेब खाली कर बैठते है। पेशेवर जुआरीयों से बाजी जीतना नामुमकिन है उसता ही आसान है बाजी हारना। संभ्रांत भक्तगणो का कहना है कि जुआ स्टाल मेले में नही लगाई जाती तो नासमझ लोग ठगी के शिकार नही होते शासन प्रशासन को संज्ञान में लेकर इस पर अंकुश लगाने की पहल करनी चाहिए।

इस संदर्भ में गुलरिहा प्रभारी निरीक्षक मनोज राय से उनका पक्ष जाने की कोशिश की गई तो उनहोंने कहना कि अधिकांश फोर्स चुनाव ड्यूटी में चली गयी है जो हमारे पास सीमित संसाधन है उसी में कार्य किया जारहा है. अभी हम भी दो तीन लोगों लेकर वहां जा रहे है. अगर वहां इस तरह की बात है तो चेक करके बंद कराया जायेगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही किया जायेगा

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