अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के हरियाणा प्रतिनिधि राजेंद्र आर्य दादूपुर कहा कि सभी राजनीति दल अपने चुनावी घोषणा-पत्रों में किसान व मजदूर हितेषी घोषणाओं को शामिल करें।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के हरियाणा प्रतिनिधि राजेंद्र आर्य दादूपुर कहा कि सभी राजनीति दल अपने चुनावी घोषणा-पत्रों में किसान व मजदूर हितेषी घोषणाओं को शामिल करें।

संवाददाता- अजय कुमार यादव 

करनाल:-  

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष व अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के हरियाणा प्रतिनिधि राजेंद्र आर्य दादूपुर कहा कि सभी राजनीति दल अपने चुनावी घोषणा-पत्रों में किसान व मजदूर हितेषी घोषणाओं को शामिल करें। 

सभी राजनैतिक दलों के घोषणा पत्रों को पढऩे के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समीति जिसमें प्रदेश के 11 किसान व मजदूर संगठन शामिल है।  एकमत होकर लोकसभा चुनाव में पार्टी विशेष को समर्थन बारे फैसला लेंगे। राजेन्द्र आर्य ने कहा कि निम्रलिखित मांगों को घोषाणा पत्र में शामिल करने वाले दलों पर ही समर्थन बारे विचार किया जाएगा। 


1. सभी किसानों व मजदूरों के लिए एकमूश्त समपूर्ण कर्जा मुक्ति
2. सभी फसलों, फलों, दूध, सब्जियों का न्युनतम समर्थन मुल्य तय हो। 
3. आयुषमान भारत स्वास्थ्य योजना में किसानों को भी शामिल किया जाए।
4. सभी किसान मजदूर दंपतियों को 60 वर्ष आयु होने पर 5 लाख रुपए एक मूस्त ग्रेच्युटी दी जाए। 
5. डा. एमस स्वामिनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार (सीटू+50 प्रतिशत) फसलों का भाव लागत में 50 प्रतिशत जोड़कर दिया जाए। 
6. सभी कंपनियों व उद्योगों में न्युनतम मजदूरी दर से कम दर पर काम करवाने वालों को सजा का प्रवाधान हो। 
7. सभी उत्पादों का न्युनतम समर्थन मुल्य पर खरीद की गांरटी का कानून बने व एमएसपी से कम खरीदने वाले व्यापारी के लिए सजा का प्रावधान बने। 
8. गन्ने की पेमेंट में देरी करने वाले शुगरमिल मालिकों के विरूध सख्त से सख्त कदम उठाए जाए। 
9. खेती को उद्योग का दर्जा दिया जाए। 
10. नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की स्कीमों में सबसीड़ी प्राप्त करने के लिए नियमों को सरल किया जाए। 
11. मनरेगा को कृषि के साथ जोड़ा जाए।


सभी पार्टियों के घोषणा पत्र आने के बाद प्रदेश के सभी किसान मजदूर संगठनों की एक प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाकर फैसला लिया जाएगा व प्रदेश के सभी 22 जिलों में किसान मजदूरों को उनके हकों के लिए जागरूक किया जाएगा। यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है।

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