इटौंजा के बगहा ग्राम में चल रहा अवैध  क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग ने बांधी आंख पर पट्टी

इटौंजा के बगहा ग्राम में चल रहा अवैध  क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग ने बांधी आंख पर पट्टी

  नरेश कुमार गुप्ता

इटौंजा के बगहा ग्राम में चल रहा अवैध  क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग ने बांधी आंख पर पट्टी


 राम मोहन गुप्ता की रिपोर्ट इटौंजा

झोलाछाप डॉक्टर और अवैध क्लिनिक पर कसी जाए नकेल

दवा के नाम पर बाँटी जा रही मौत

 

उत्तर प्रदेश के जनपद लखनऊ के अंतर्गत  विकासखंड  बख्शी का तालाब के इटौंजा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बगहा में झोलाछाप डॉक्टर का आतंक और अवैध नर्सिंग होम खुलेआम धड़ल्ले से चल रहा है जिस पर स्वास्थ्य विभाग सुध नही लेता दिखाई दे रहा है।

ये झोलाछाप डॉक्टर अपने अवैध नर्सिंग होम बनाकर गली गली केवल मौत बेंच रहे है और जब इस बाबत किसी अधिकारी से बात की जाती है तो वह कार्यवाई की बात कहकर अपने कदम पीछे खींच लेता है।  इन झोलाछाप डॉक्टर और अवैध रूप से चल रही क्लिनिक्स पर नकेल कसी जाए।

मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं झोलाछाप डॉक्टर 

 

बिना डिग्री और रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे क्लीनिक 

ग्रामीण इलाकों में इन दिनों मौसमी बीमारियों से पीडि़त मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। जिसका पूरा फायदा क्षेत्र मेें फैले झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। कुछ दिनों पूर्व जिला प्रशासन द्वारा छेड़े गए अभियान से झोलाछाप डॉक्टरों में हडकंप व्याप्त था,

मगर वर्तमान में उनके हौसले बुलंद है और वो बेखौफ होकर मरीजों का ईलाज कम और कमाई ज्यादा कर रहें हैं।  अधिकांश मरीज झोलाछाप डाक्टर के गलत ईलाज में फंसकर अपनी जान जोखिम मेें डाल रहें है। वर्तमान में प्रशासन की ओर से इस ओर किसी प्रकार से ध्यान नही दिया जा रहा है।

बताया गया है कि नगर में कई जगह झोलाछाप डाक्टर अपनी दुकान खोलकर बैठे हुये है और मरीजों का इलाज करने के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है। पहले दो-तीन दुकानें ही नगर में नजर आती थी। वहीं इन दिनों दर्जनों ऐसे लोग है जो इलाज के नाम क्लीनिक खोलकर मरीजों को न सिर्फ  लूट रहे है बल्कि उनके जीवन से खिलवाड़ भी कर रहे है। विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान जनापेक्षित है। 

बिना डिग्री इलाज, झोलाछाप चिकित्सकों की हो रही चांदी

गर्मी का मौसम आते ही शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न बीमारियां होने लगी हैं। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कथित तौर पर डॉक्टर कहे जाने वाले झोलाछापों का जाल फैला है। हर तीसरी गली में एक क्लीनिक चल रहा है। क्लीनिक के नाम पर एक टेबल-कुर्सी पर एक व्यक्ति बैठता है और मरीजों का इलाज करता है।

क्लीनिक का नाम क्या है, इलाज करने वाले के पास मेडिकल में क्या डिग्री है, इलाज करने वाले व्यक्ति के क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन है या नहीं.. यह तो किसी को नहीं पता होता है। 

इन झोलाछापों का इलाज जान पर भारी पड़ सकता है। झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा मरीजों का आर्थिक शोषण करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। 

स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से कार्रवाई नहीं 

गौरतलब हो कि क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी चिकित्सकीय पढ़ाई किए फर्जी चिकित्सक बिना किसी भय के अपनी क्लीनिक खोल कर इलाज कर रहे है और उनसे मनमानी फीस वसूल कर अपनी जेबों को भर रहे है। इसके अलावा झोलाछाप चिकित्सक अपनी क्लीनिक में बड़े बड़े बोर्ड लगाकर खुले आम प्रशासन को अंगूठा दिखा कर लोगों का इलाज कर रहे है।

बिना डिग्री के इलाज कर रहे हैं। आरएमपी यानि रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर का सर्टिफिकेट लिए 12वीं पास झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से एलोपैथी दवा और इंजेक्शन के जरिए लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। सस्ते इलाज के झांसे में आकर लोग भी अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। 15-20 सालों से इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टर किसी कायदे कानून को भी नहीं मानते, उनके लिए डॉक्टरी के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं।

सिर्फ एक्सपीरियंस ही उनका सर्टिफिकेट हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के नगर के विभिन्न हिस्सों में झोला छाप चिकित्सक धड़ल्ले से अपनी क्लीनिक चला रहे हैं। यह चिकित्सक हर मर्ज का इलाज करने में अपने आप को एक्सपर्ट बताकर ग्रामीण व नगर वासियों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है। यह सब भगवान भरोसे है।

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