जहाजी कौन....?

जहाजी कौन....?

महाभारत के युद्ध के बाद एक बार विश्राम करते हुये युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से प्रश्न किया: हे माधव, कलयुग मे जब मनुष्य लोभी व अत्याचारी होगा तब इस संसार का पालन, परोपकार व धर्म का पालन कौन करेगा !

श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया : हे तात ,मै तुम्हे भविष्य के एक विशेष वर्ग के कर्मियों के बारे में बताता हूँ .... “कलियुग मे कर्म का समुचित व संकलित आदान-प्रदान करने वाले, कंपनी के भिन्न ऑर्डर्स का पालन कर प्रजा की भलाई करनेवाले, बुद्धिमान, परोपकारी, परिश्रम कर्मी जन्म लेंगे

जो जहाजी कहलाए जाएंगे जो विभिन्न कष्टदायक परिस्तिथियों मे भी बिना अन्न जल के भी सूर्योदय से मध्यरात्रि तक अपने कंपनी के निर्देशों का पालन करेंगे... एवम् प्रजा के जीवन को सुखमय बनाने के लिये अपने माँ-बाप बीवी -बच्चों, कुल और देश से दूरस्थ होकर भी तथा नाना प्रकार के कष्टों को झेलते हुए इस संसार का कल्याण करेंगे...

वे पराक्रमी जहाजी जो विकट समस्याओं से भयभीत ना होते हुए न्यूनतम वेतन पर परिश्रम करते रहेंगे... शालीन, ज्ञानवान व विनम्र होने के कारण वे कभी कंपनी के प्रति आक्रोश करने की हिम्मत तक नही करेंगे तथा न्यूनतम वेतन मे ही किसी प्रकार निर्वाह करने को विवश होंगे पोर्ट ऑथरिटी, पायलट,पोर्ट स्टेट कंट्रोल द्वारा प्रताडित, अपमानित व दण्डित होने पर भी

ये लज्जाहीन होकर बेशर्मी से अपने कार्यों के निर्वाह मे अनवरत डटे रहेंगे । हे तात , कालांतर में यही निरीह परंतु जीवट प्राणी* .... "जहाजी" कहलायेँगे तथा संसार का आर्थिक, सामाजिक और चौमुखी कल्याण करेंगे. इति

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