खड्गासन पद्मप्रभ भगवान की प्रतिमा के पंचामृत कलशाभिषेक, उमड़ेंगे श्रद्धालु

जयपुर से शोभित जैन की रिपोर्ट

 

वार्षिकोत्सव प्रारम्भ .......
बाड़ा के पदम् जिनेश मंगल रूप सही, काटो महेश क्लेश मेरी अर्ज यही .......... से गुंजा पद्मप्रभ जिनालय 
ध्वजारोहण के साथ हुआ मेले का शुभारम्भ, हुई अष्ट द्रव्यों से पूजन 

- मुख्य आयोजन आज (रविवार को), होंगे खड्गासन पद्मप्रभ भगवान की प्रतिमा के पंचामृत कलशाभिषेक, उमड़ेंगे श्रद्धालु 

जयपुर।

विश्व विख्यात दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा का दो दिवसीय वार्षिक मेला का शुभारम्भ शनिवार को मुनि मार्दवनन्दी महाराज के मंगल सानिध्य एवं पंडित विमलचंद जैन बनेठा वालो के निर्देशन में समाजसेवी महावीर प्रसाद माणकचंद, राजेन्द्र कुमार चन्द्रप्रकाश, गौरव, सौरभ जैन परिवार केकड़ी वालो द्वारा ध्वज डंडे का पूजन, मंगल कलश स्थापित एवं ध्वजारोहण कर शुभारम्भ हुआ।

इस दौरान समिति अध्यक्ष सुधीर जैन, संरक्षक ज्ञानचंद झांझरी सहित समिति पदाधिकारियों ने ध्वजारोहण से पूर्व समजश्रेष्ठि का अभिनन्दन स्वागत किया जिसके पश्चात कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा के बेंड वादकों द्वारा श्रीजी की मधुर धुनों से प्रांगण को श्रद्धा-भक्ति के साथ गुंजयमान हुआ और पद्मप्रभ भगवान के जयकारों की गूंज से जगमग हो उठा। 

समिति मंत्री हेमन्त सौगानी ने बताया कि ध्वजारोहण के पश्चात दोपहर मध्याह 12 बजे से मूलनायक पद्मप्रभ भगवान के सम्मुख सौधर्म इंद्र - इंद्राणियो सहित 15 प्रमुख इन्द्रों ने " बाड़ा के पदम जिनेश मंगल रूप सही कांटो महेश क्लेश मेरी अर्घ यही ..... " के गुणगान के साथ विधान पूजन प्रारम्भ की।

पूर्व प्रातः 11 बजे से पद्मप्रभ भगवान के कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ जिसमे सम्मिलित सभी इन्द्रों द्वारा श्रीजी के कलशाभिषेक कर विश्व मे शान्ति की कामना के साथ शांतिधारा कर अर्घ चढाये। 


सौगानी ने बताया कि मेला प्रति वर्ष की भांति श्रद्धा-भक्ति के साथ मेले के स्वरूप का शुभारंभ किया गया। सांध्यकालीन में सायं 7 बजे से पद्मप्रभ भगवान की व्रहद्र दीपों से भव्य मंगलआरती की गई व शास्त्र प्रवचन सम्पन्न हुए। जिसके बाद श्रीमती नेहा काला के निर्देशन में भव्य भजन - भक्ति संध्या का आयोजन हुआ जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओ ने भजनों के साथ भव्य भक्ति कर श्रीजी की आराधना का रसपान किया।


इस दौरान मुनि मार्दवनन्दी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि " जिनेन्द्र आराधना ही सबसे अच्छी एवं उत्कृष्ट साधना है, जिसने जिनेन्द्र प्रभु के स्वरूप को जाना है उसमें स्वयं के स्वरूप को भी पहचाना है।

श्रद्धा - भक्ति के साथ कि गई आराधना ही सबसे बेहतर साधना है। आज का इंसान आराधना को छोड़ आराध्य में सुमार हो रहा है, जो कि मोह, माया को बढ़ाता है जबकि इंसान को आराध्य में नही आराधना में लीन होना चाहिए। आराध्य अनुसरण के लिए है और आराधना पूजन के लिए। इसलिए आराध्य के बताए मार्ग पर चलकर आराधना को महत्व देंवे वही उत्कृष्ट साधना है। "

मेला संयोजक नेमीचंद गंगवाल एवं सहसंयोजक विनोद शाह ने बताया कि रविवार को मेले के दूसरा एवं अंतिम दिन है जिसकी मांगलिक शुरुवात प्रातः 7 बजे से मूलनायक पद्मप्रभ भगवान के पांच प्रथम इन्द्रो के प्रथम स्वर्ण एवं रजत कलशों से कलशाभिषेक कर प्रारम्भ होगी जिसके बाद सभी इंद्र कलशाभिषेक करेगे साथ ही प्रातः 9.15 बजे से क्षेत्र में विराजमान विशाल खड्गासन प्रतिमा के पंचामृत कलशाभिषेक होंगे। जिसमे (जल, चन्दन, केसर, दूध, दही, मौसमी, सर्वोषधि, पुष्प, घी) आदि इत्यादि 11 रसों सहित विभिन्न रसों से कलशाभिषेक होंगे एवं व्रहद्र शांतिधारा की जाएगी। दोपहर मध्याह 4 बजे मेले का मुख्य आकर्षण श्रीजी की भव्य रथयात्रा शोभायात्रा का आयोजन होगा। इस रथयात्रा में श्रीजी चांदी के रथ पर विराजमान होकर नगर प्रक्रिमा लगाएंगे। रथयात्रा के पश्चात समाज की सामूहिक गोठ का आयोजन होगा। कार्यक्रम में समिति के सभी पदाधिकारी और सदस्यों सहित कोषाध्यक्ष राजकुमार कोठयारी, राजेन्द्र के गोधा, गणेश राणा, हरीश धाडुक, सुरेंद्र पांड्या, आईपीएस अनिल जैन, अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू सहित बड़ी संख्या में जयपुर शहर की विभिन्न कॉलोनियों सहित चाकसू, केकड़ी, बस्सी, दोसा आदि स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण सम्मिलित होंगे। 

Comments