जिला सूचना कार्यालय पर भूमाफियाओ की नजर

जिला सूचना कार्यालय पर भूमाफियाओ की नजर


सूचना अधिकारी ने लिखा प्रमुख सचिव को पत्र

 

रिपोर्ट - नृपेन्द्र तिवारी


बाराबंकी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एंटी भू माफिया टास्क फोर्स जिले में पूरी तरह से नकारा साबित हो रही है। जिले के सरकारी भवनो  को भी भूमाफिया चुनौती दे रहे है। पिछले कई वर्षो से भूमाफिया नगर में स्थित जिला सूचना कार्यालय को खाली कराने के लिये रात दिन एक किये हुये है और आये दिन सूचना कार्यालय में जाकर कर्मचारियो से अभद्रता करने से नही बाज आ रहे है। जिला सूचना अधिकारी ने प्रमुख सचिव सहित अन्य अधिकारियो को पत्र भेज कर भूमाफियाओ के विरूद्व कार्यवाही की मांग की है। जानकारी के अनुसार बीते 70 वर्षो से संचालित सरकारी कार्यालयो की पहचान भूमि/भवन पर अब भूमाफियाओ ने अपनी नजर गड़ा दी है।

आये दिन अधिकारियो को भवन खाली कराने को लेकर उन्हे वहां से अपना कार्यालय स्थानांतरित करने की धमकी और बकाया किराया तक वसूलने की मांग की जा रही है। यहां पर वर्तमान में 2017 से सूचना विभाग कार्यालय है। इससे पूर्व यहां पर जिला विद्यालय निरीक्षक का कार्यालय हुआ करता था। जो आजादी से पूर्व से संचालित था और 70 वर्षो तक रहा जिसके अधिकारियो द्वारा 70 वर्षो तक दीवानी न्यायालय में विद्युत, पानी और फोन का बिल भी भुगतान किया जाता था और 20 वर्ष पूर्व जब इसका किराया लेने किसी के नही आने पर कोर्ट ने किराया जमा करना बंद कर दिया।

गाटा संख्या-2629 और 2630 में दर्ज तथा रकबा 0.294 भूमि एएन कक्कड़ के नाम से दर्ज थी। इस कक्कड़ नामक व्यक्ति की सन् 1950 से पूर्व में ही मृत्यु हो चुकी थी। जिनका कोई वारिस नही होने के चलते कानूनन यह कीमती भूमि नान जेड ए में दर्ज है। ऐसी भूमि का क्रय-विक्रय नही किया जा सकता लेकिन जिलाधिकारी की अनुमति हो तभी ऐसी भूमि की खरीद-फरोख्त हो सकती है। लेकिन बीते पांच वर्षो से भूमाफियाओ की नजर इस कार्यालय पर पड़ी तो तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक ने 11 अप्रैल 2014 को उपजिलाधिकारी नवाबगंज से इसकी लिखित शिकायत की थी।

वर्तमान में इस भवन भूमि पर सूचना अधिकारी का कार्यालय है। जिला सूचना अधिकारी नीलिमा कुमारी ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक का कार्यालय मार्च 2017 तक इसी भवन में था और जीआईसी मैदान में नया भवन बनने के बाद वहां चला गया। उसके बाद से यहां पर सूचना कार्यालय है और विभाग द्वारा पानी और बिजली का बिल जमा किया जाता है। उन्होने बताया कि गाटा सं-2629 और 2630 मोहल्ला नेहरु नगर तहसील नवाबगंज में दर्ज इस प्रापर्टी को आजादी से पूर्व से ही जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय था।

भवन का स्वामी एएन कक्कड़ नाम के व्यक्ति हुआ करते थे। जिनकी मृत्यु 1950 से पूर्व हो गयी थी और उनका कोई वारिस नही था। न्यायालय द्वारा यह निर्देश देने के बाद कि सम्बन्धित भवन का स्वामी कोई नही है। अतः सरकारी विभाग द्वारा भवन किराया जमा करने को कोई औचित्य नही। पूर्व में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कार्यालय भवन के विद्युत एवं जल का किराया लगभग 40 वर्षो से जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जमा कराया जाता रहा है। वर्तमान में जिला सूचना कार्यालय यह सभी भुगतान कर रहा है।

जिला सूचना अधिकारी ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा पूर्व में समय-समय पर जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी को प्रेषित पत्रों एवं अन्य कागजातों के दृष्टिगत स्पष्ट कराया कि भवन/परिसर सरकारी भूमि है और इस पर सरकार का स्वामित्व व कब्जा है। यह भी स्पष्ट है कि कुमकुम कक्कड़ के मुख्तारआम के पत्र के साथ संलग्न खतौनी में दर्ज किये गये नाम फर्जी ढंग से किये गये हैं। उक्त प्रकरण में कार्यालय जिलाधिकारी के पत्र सं-22 तथा 27 अप्रैल 2017 के लिखित पत्र में पूर्व में उपजिलाधिकारी को अवगत कराया कि सन् 1950 से लेकर अभी तक इस परिसर के स्वामित्व के सम्बन्ध में विस्तृत गहन जांच की मांग भी की जा चुकी है। जिला सूचना अधिकारी ने 14 को प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश को शिकायती पत्र भेज कर भूमाफियाओ के विरूद्व कार्यवाही की मांग की है।

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