जिलाधिकारी ने पालिका के भ्रष्टाचार सम्बन्धित समस्त पत्रावली की तलब

जिलाधिकारी ने पालिका के भ्रष्टाचार सम्बन्धित समस्त पत्रावली की तलब

जिलाधिकारी ने पालिका के भ्रष्टाचार सम्बन्धित समस्त पत्रावली की तलब
अन्तरिम जाँच रिपोर्ट में सेवा प्रदाता ठेकेदार पर हुआ था दोष सिद्ध
पालिका के दोहन की उपजिलाधिकारी द्वारा की जा रही थी जाँच


ललितपुर।Ravi shankar sen/ Antim kumar jain

जिलाधिकारी ने पालिका की चल रही भ्रष्टाचार की चल रही जाँच की समस्त पत्रावली तलब की है। बीते कई दिनों से जाँच के बाद पत्रावली को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया था। कोई कार्यवाही न होने के कारण जनता में असंतोष था, साथ ही शिकायतकर्ता पाँच पार्षदों को भी न्याय व्यवस्था से विश्वास उठता नजर आ रहा था। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा की जा रही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही की मुहिम के तहत पालिका के खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की पूरी पत्रावली तलब की है। 


उल्लेखनीय है कि नगर पालिका के पाँच पार्षदों द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी को पालिका में फैले भ्रष्टाचार तथ्यों सहित विगत तीन माह पूर्व शिकायत की गयी थी, शिकायत को गम्भीरता से लेते हुये, जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जाँच उपजिलाधिकारी सदर गजल भारद्वाज को सौंपी गयी थी। जाँच की अन्तरिम रिपोर्ट के आधार पर सेवा प्रदाता ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर कर पूरे प्रकरण को दवा दिया गया था। जब यह पूरा प्रकरण नवांगुतक जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेते हुये, पत्रावली तलब की गयी है। बताते चलें कि नगर पालिका में फैले भ्रष्टाचार की जाँच जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। उपजिलाधिकारी द्वारा जिलाधिकारी को सौपीं गयी अन्तरिम जाँच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने अधिशाषी अधिकारी को सेवा प्रदाता कम्पनी के खिलाफ एफआईआर के अलावा रिकबरी के आदेश जारी किये थे।

अधिशाषी अधिकारी द्वारा थाना कोतवाली में मुकदमा तो दर्ज करा दिया, किन्तु रिकबरी के लिए कोई प्रभावी कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी थी। तो वहीं एफआइआर में गबन सहित कई गम्भीर धाराओं पुलिस द्वारा लगायी गयी थी। पालिकाध्यक्ष पति व सत्ताधारी दल के पदाधिकारी ठेकेदार के पक्ष में उतर आये हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस को मुकदमें धाराऐं कम करने के लिए विभिन्न माध्यमों से दबाब बनाने की खबरे भी प्रकाश में आ रही हैं। हालही में शहर में फैली चर्चा पर नजर डाले तो पुलिस ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया किन्तु उनकी गिरफ्तारी के प्रयास नहीं किये हैं। तो वहीं सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण धाराओं को कम करने की चर्चा प्रबल है। सूत्रों की मानें तो अध्यक्ष पति द्वारा कोतवाल से दोहरी वार्ता चल रही है। इस वार्ता में भारतीय जनता पार्टी पार्टी के एक जनपदस्तरीय उच्च पदाधिकारी का भी नाम प्रमुख रूप से आ रहा है। हालाँकि इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है।

किन्तु पुलिस धाराओं को कम करने में नाकाम साबित इसलिए हो गयी, क्योंकि उपजिलाधिकारी स्तर की जाँच के बाद उक्त प्रकरण में एफआईआर दर्ज करायी गयी थी। लेकिन सत्ता के दबाब में ठेकेदार की गिरफ्तारी नहीं हो रही है। बीच में चर्चा मे यह भी आया था कि उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर ठेकेदार द्वारा स्टे लायी गयी थी, किन्तु पुलिस द्वारा इसकी पुष्टि भी नहीं हो रही है। किन्तु गिरफ्तारी न होने के कारण शहर में तरह-तरह की चर्चा बनी हुई है। हालही में पालिका प्रशासन ने जिला प्रशासन को सेवा प्रदाता ठेकेदार द्वारा किये गये गबन का आंकलन कर भेज दिया था। किन्तु एक पखवाड़ा गुजर जाने के बाद भी कोई कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी है। जबकि भ्रष्टाचारी खुलेआम शहर में घूम रहा है। जिलाधिकारी के कढ़े तेवर देख ऐसा लग रहा है कि शीघ्र ही भ्रष्टचारी के खिलाफ कढ़ी कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। 

 

Comments