जिसने इच्छाशक्ति से किये असम्भव काम मां संदोही देवी साहित्यिक परिषद का कवि सम्मेलन सम्पन्न 

जिसने इच्छाशक्ति से किये असम्भव काम  मां संदोही देवी साहित्यिक परिषद का कवि सम्मेलन सम्पन्न 

चित्र संख्या-2

बीघापुर-उन्नाव 

भारत रत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 144वीं जयंती के उपलक्ष्य में माँ संदोही देवी साहित्यिक परिषद बीघापुर द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें वरेण्य कवियों ने अपनी रचनाओं से देश की दशा दिशा का चित्रण कर वाह वाही बटोरी। 


    कार्यक्रम का शुभारम्भ सरदार पटेल, भगवान बुद्ध व सरस्वती की प्रतिमाओं पर अध्यक्ष श्रीराम सिंह पूर्व प्राचार्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर व माल्यार्पण कर करुणेश दीक्षित की स्वर वंदना से हुआ। इसके बाद दिनेश उन्नावी ने पढ़ा-कमी नहीं दुश्मन कै, जितने चहौ बनाव, खाली तुम एतना करौ, नीके खाव कमाओ। गीतकार जयराम जय ने पढ़ा-गांवों की चैपालों ने बतियाना छोड़ दिया, इसीलिए तो खुशियों ने मुस्काना छोड़ दिया। बाराबंकी के शिवकुमार व्यास ने पढ़ा-जब-जब कदम उठाया लिखने को

, बिंदिया कुमकुम पायल पर, तब-तब घायल घाटी की प्राचीर दिखाई पड़ती है। कुमार रजनीश ने पढ़ा-वफा किसको दें बेवफाई किसे दें, कि खुद आग अपनी लगाई किसे दें। अजय अलबेला ने पढ़ा-कभी शहरों को लिखता हूँ कभी मैं गाँव लिखता हूँ, हुकूमत करती है जो वो सियासी दाँव लिखता हूँ। डॉ0 मान सिंह ने पढ़ा-जिसने इच्छाशक्ति से किये असम्भव काम, उस सरदार पटेल को शत्-शत् कोटि प्रणाम। नरेंद्र आनंद ने पढ़ा- दुश्मन की था नकेल जुझारू पटेल तू, दूजा नहीं तुझसा कोई हिन्दोस्तान में।

अनिल वर्मा ने पढ़ा-बीत पावस गया शरद आयी शीत ऋतु ने लिया है अंगड़ाई, नैन अलसाये खोले कलियों ने, बह चली है धरा पे पुरवाई। रामकिशोर वर्मा ने पढ़ा-कान पकरि उठि बइठि पुलिस जब हड़काइसि, फंसे रोमियो अब महंत के चक्कर मा। अन्य कवियों में आलम सुल्तानपुरी, संजीव तिवारी पिंटू, मनोज कुमार सरल, अयोध्या प्रसाद आदि ने भी काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन बरेली के वरिष्ठ कवि उर्मिलेश सौमित्र ने किया। व्यवस्थापक गंगाप्रसाद पटेल, अतुल विक्रम पटेल,

कपिल साहू, अनुज पटेल, अजयदीप पटेल, दिलीप सोनी, आशीष पटेल आदि रहे। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक बाबू कृपाशंकर सिंह एडवोकेट ने शिरकत की और सरदार पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से ही सरदार पटेल के वास्तविक विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। सरदार साहब की इच्छा शक्ति इतनी दृढ़ थी कि उसके आगे बड़े-बड़े सूरमाओं ने सिर झुकाया था। आज देश को ऐसे ही सरदार जैसे नेता की जरूरत है।

सरदार साहब किसानों, नौजवानों के प्रेरणास्रोत हैं। झूठ बोलकर देश को ठगने वालों की नहीं। पुरवा ब्लॉक प्रमुख शिवबहादुर पटेल ने भी शिरकत की। अन्य लोगों में गजेंद्र पटेल, ऊदल फौजी, विवेक पटेल, बंशबहादुर सिंह, अजीत सिंह बाबी, रामबाबू सिंह, विश्वनाथ सिंह आदि रहे।
 

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