ज्योतिष या विज्ञान या पाखण्ड ....पहचाने कैसे...?

ज्योतिष या विज्ञान या पाखण्ड ....पहचाने कैसे...?

प्रश्न : आज का युग विज्ञान का युग है , फिर भी हर व्यक्ति वास्तु एवं ज्योतिष के पीछे पड़ा है ...यह अन्धविश्वास कब और कैसे ख़त्म होगा ?

उत्तर : उलटी बात है ....प्रश्न करने वाले को अकल नहीं है ......वास्तुशास्त्र एवं ज्योतिषशास्त्र अपने आप में श्रेष्ठतम विज्ञान है किसने आपसे कहा कि ज्योतिष विज्ञान नहीं है

.....गणित का विद्यार्थी एमएससी पास कर लेता है तो उसे वैज्ञानिक कहते है या नहीं ......गणित विज्ञान है या नहीं ....ज्योतिष में तो गणित की पराकाष्ठा है !

अब दम्भी ज्योतिष या वास्तुशास्त्री से आपका पाला पड़ा हो वह अलग बात है ....ज्योति का अर्थ जानते है ? काल की गणना जिससे होती है ....ज्योतियों की ज्योति भगवान है ...महाकाल भगवान है ....लेकिन चन्द्रमा , अग्नि , सूर्य , नक्षत्र इनके आधार पर काल की गणना होती है

.....और ज्योतिष अपने आप में पराकाष्ठा का गणित है ...उसे आप विज्ञान विहीन कैसे कहते है ...प्रश्न करने वाले वैज्ञानिक या विज्ञान से तो बिलकुल नहीं है ! वास्तुशास्त्र भी अपने आप में विज्ञान है या नहीं ......मै दम्भियों की बात नहीं कर रहा हूँ ....

थोडा विचार कीजिए वायु तो वायु है या नही ...पश्चिम को छूकर हवा चले उसका प्रभाव अलग होगा .....पूर्व , उत्तर को छूकर हवा चले उसका प्रभाव अलग होगा या नहीं ....सब मिलाकर ऊपर , निचे वायु के दस प्रभाव या प्रकार हुए या नहीं !

वस्तु से वस्तु प्रभावित होती है .....देश काल से वस्तु प्रभावित होती है ...यह विज्ञान है ! एक मिर्च स्वयं पा लो ....उसका अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव व्यक्ति तक सिमित रहेगा

.....किन्तु वही मिर्च अग्नि में झोंक दो ..वस्तु से वस्तु का प्रभाव हो गया .....मिर्च का प्रभाव चारो और सब छींकने लगेंगे ......वस्तु का प्रभाव वस्तु पर पड़ने से घटता भी है बढ़ता भी है ! कोई वस्तु उतपन्न होती है तो आप मानने के लिए बाध्य है कि उसके साथ देश , काल जुड़ा है ....

धरती से कोई अंकुर उतपन्न हुआ देश , काल मानना पड़ेगा ...तीनो द्रष्टि से वास्तुशास्त्र उत्तम विज्ञान है ! अन्धविश्वास – आपलोगों ने अच्छा शब्द निकाला है ....जबकि अंध – अविश्वास भी घातक है या नहीं .........

एक तर्क आजकल हिन्दुओ ने रख लिया अन्धविश्वास .....और वे भी जो वैज्ञानिक नहीं है बस इधर उधर से सुन लिया ....मेरा तो विश्वस्तर के वैज्ञानिको से पाला पड़ता है ....कोई आक्षेप नहीं करते .....बच्चो के समान सुनते है ....

एक से एक उच्च वैज्ञानिक संस्थानों में हम प्रवचन करते है ....अधकचरे ज्ञानी जो है ...विज्ञान को नहीं जानते वे ही आक्षेप करते है ! साधक – बाधक भाव का जिसको विज्ञान होता है वह व्यावहार कुशल होता है और वास्तुशास्त्र और ज्योतिषशस्त्र में तो साधक – बाधक भाव की पराकाष्ठा है ..........

एक वाक्य मैंने कहा अंध – अविश्वास ....सबसे पहले अ ही क्यों , सबसे पहले A ही क्यों ........इसे पॉइंट क्यों कहे रेखा क्यों नही ...पहले 1 ही क्यों ....अब इसका उत्तर दे दीजिए

...कितने ही अकल के बड़े खां क्यों न हो यहाँ जाकर अनुत्तरित .....कहीं न कहीं तो जाकर तो अच्छे से अच्छे वैज्ञानिक को भी विश्वास ही करना पड़ता है .....अमुक का बेटा या बेटी कौन .....माता का वचन प्रमाण होता या नहीं

.....डाक्टर इब्राहीम की थ्योरी के अनुसार रक्त परिक्षण करवा लो ....वह तो बहुत बात की चीज है ...माता का वचन प्रमाण होता है ये तुम्हारे पिता .........तो ये जितने क्यों वाले है इन सबको पंचदशीकार ने अच्छा उत्तर दिया ....कार्यकारण भाव का विचार कीजिए

...उन्होंने उदा. दिया >> पहली , दूसरी व् तीसरी कक्षा में अज्ञान आपके सामने मुँह फाड़े खड़ा रहता है ...हर प्रश्न में क्यों के स्थान पर मौन ही रहना पड़ता है ......इसलिए यह माया की चमत्कृति है .......! अन्धविश्वास नही होना चाहिए तो क्या अंध – अविश्वास होना चाहिए !

अन्धविश्वास से तो हिन्दू पूरा भरा हुआ है .......अंग्रेजो के यहाँ लहर चल पड़ी ...मैकाले ने कूटनीति का प्रयोग किया ....हम नहीं कहते यह शिक्षा पद्धति हमारे लिए वरदान है ! रक्षा की प्रणाली अंग्रेजो ने लाकर दे दी ....कहा वरदान है ...

यह अंधविश्वास है या नहीं कृषि , वाणिज्य की प्रणाली अंग्रेजो ने दी ...कहा वरदान है – अंधविश्वास है या नहीं न्याय की प्रणाली हमारी अपनी थी ...अंग्रेजो ने अपनी प्रणाली यहाँ लाकर रख दी... ये वरदान है या अभिशाप ... सारा हिन्दू समाज तो अन्धविश्वास पर चल रहा है ......

हम लोग अन्धविश्वास पर नही चल रहे तो हमारे सिद्धांत को लोग कह रहें है अन्धविश्वास .....अपने आप में ज्योतिषशास्त्र व् वास्तुशास्त्र उत्कृष्ट विज्ञान है ! लगता है किसी दम्भी वास्तु या ज्योतिषशास्त्री के चक्कर में पड़कर आपने धन गँवाया होगा ...दम्भियों से बचिए लेकिन विज्ञान पर आक्षेप मत कीजिए ।

!! हर हर महादेव !!

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